भारतीय विरासत के डिजिटलीकरण के लिए संस्कृति मंत्रालय और गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के बीच समझौता
इस साझेदारी के माध्यम से देश के स्मारकों, पुस्तकालयों और कलाओं को डिजिटल माध्यम से विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाएगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 7:56 · अपडेट रात 9:44 · 4 मिनट का पाठ
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भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश की सांस्कृतिक विरासत को अत्याधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाने के लिए गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। पीआईबी (PIB) के अनुसार, यह समझौता एक वर्चुअल समारोह के दौरान किया गया था, जिसमें संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल और गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के उपाध्यक्ष और संस्थापक श्री अमित सूद उपस्थित थे।
इस साझेदारी में भारत की सभ्यता की विशालता को प्रतिबिंबित किया जाएगा। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक और पुरातात्विक स्थल तथा उनके पास मौजूद संग्रह शामिल हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय संग्रहालयों की सामग्री, 'ज्ञान भारतम' के तहत दस्तावेजीकृत किया जा रहा पांडुलिपि विरासत और देश भर के मंत्रालय के संस्थानों द्वारा संरक्षित हस्तशिल्प, प्रदर्शन कला और जीवंत परंपराओं को भी डिजिटल किया जाएगा।
इस परियोजना के केंद्र में नई दिल्ली के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में तैयार हो रहा 'युगे युगीन भारत संग्रहालय' है, जो भारत के विभिन्न युगों के इतिहास का संग्रहालय होगा। इसके डिजिटलीकरण से इन इमारतों और उनमें रखी जाने वाली कीमती कलाकृतियों का स्थायी रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे जनता को इस महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक प्रयास की जल्द झलक देखने को मिलेगी।
संस्कृति मंत्रालय के इस प्रयास का उद्देश्य डिजिटल पहल का विस्तार करना और सुलभता बढ़ाना है, ताकि भारत की विरासत को किसी भी उपकरण पर और भारतीय भाषाओं में जाना जा सके। इस दृष्टिकोण के माध्यम से संरक्षण, सार्वजनिक पहुंच और भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के भागीदार और सभी आकार के संस्थान शामिल होंगे।
इस साझेदारी के बारे में बात करते हुए संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा, "भारत की सांस्कृतिक विरासत एक जीवंत विरासत है। यह प्रत्येक नागरिक की है और संपूर्ण विश्व के साथ संवाद करती है। गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के साथ हमारी साझेदारी प्राचीन पांडुलिपियों और स्मारकों से लेकर राष्ट्रीय संग्रहालयों और आगामी युगे युगीन भारत संग्रहालय तक विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और साझा करने के लिए तकनीक का उपयोग करती है। इस खजाने को भारतीय भाषाओं में और वैश्विक दर्शकों के लिए उपलब्ध कराकर, हम अधिक लोगों को भारतीय सभ्यता की कहानी के करीब लाने और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने की आशा करते हैं।"
गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के उपाध्यक्ष और संस्थापक श्री अमित सूद ने कहा, "पिछले 15 वर्षों से गूगल आर्ट्स एंड कल्चर भारत की सहस्राब्दियों पुरानी कहानी कहने की कला, कलात्मक निपुणता और विशाल विरासत से प्रेरित रहा है। संस्कृति मंत्रालय के साथ हमारी साझेदारी अत्याधुनिक तकनीक की मदद से भारत के अमर खजाने को सहेजने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चाहे वह युगे युगीन भारत संग्रहालय के विजन का समर्थन करना हो या ऐतिहासिक पांडुलिपियों का संरक्षण करना हो, हमें प्राचीन विरासत को आधुनिक सुलभता से जोड़ने के लिए अपनी तकनीक का उपयोग करने पर गर्व है, ताकि यह संग्रह प्रत्येक जिज्ञासु मन के लिए मुफ्त में उपलब्ध हो सके और उन्हें शिक्षित, प्रेरित और आनंदित करे।"
गूगल आर्ट्स एंड कल्चर का संस्कृति मंत्रालय के संस्थानों के साथ लंबा संबंध रहा है। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट शामिल हैं, जिनके संग्रहों को अधिक लोगों तक पहुँचाने में गूगल पहले ही मदद कर चुका है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से मंत्रालय ने भारत की सभ्यतागत विरासत को सहेजने, दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और देश-विदेश के विशाल नेटवर्क के साथ संस्कृति साझा करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
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