पशुओं में खुरपका-मुहपका के नए SAT-1 स्ट्रेन को लेकर भारत सरकार अलर्ट
चीन और मंगोलिया में मामले मिलने के बाद बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी अभ्यास आयोजित
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 8:10 · 4 मिनट का पाठ
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पशुओं में फैलने वाली खुरपका-मुहपका बीमारी, जिसे फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) के रूप में जाना जाता है, के नए सीरोटाइप SAT-1 को लेकर भारत सरकार द्वारा सतर्कता बढ़ा दी गई है। एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह नया वायरस गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे पशुओं को संक्रमित करने की क्षमता रखता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक भारत में SAT-1 का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन चीन और मंगोलिया सहित कई देशों में इसके मामले दर्ज होने के कारण भारत सरकार चिंतित है और एहतियाती कदम उठा रही है।
इस बीमारी के जोखिम को देखते हुए हाल ही में बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्तर पर एक तैयारी अभ्यास का आयोजन किया गया था। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य बीमारी की जल्द पहचान करना और यदि संक्रमण पाया जाता है, तो उसे तेजी से फैलने से रोकना था। केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने ICAR-NIVEDI के सहयोग से बेंगलुरु में दो दिवसीय ‘वज्र-सेट’ अभ्यास आयोजित किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में 25 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 83 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक के दौरान बीमारी की त्वरित पहचान, प्रयोगशाला में जांच, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और संक्रमण मिलते ही तत्काल उठाए जाने वाले कदमों जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो, खुरपका-मुहपका वायरस के कुल सात मुख्य सीरोटाइप होते हैं, जिनमें O, A, C, SAT-1, SAT-2, SAT-3 और Asia-1 शामिल हैं। इस वायरस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसी एक सीरोटाइप के खिलाफ विकसित हुई रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) दूसरे सीरोटाइप के खिलाफ सुरक्षा प्रदान नहीं करती है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी पशु को सामान्य FMD का टीका लगाया गया है, तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह SAT-1 के खिलाफ सुरक्षित है। वर्तमान में भारत में जिस FMD वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है, वह SAT-1 से सुरक्षा नहीं देती है, जिसके कारण यदि यह नया सीरोटाइप भारत में प्रवेश करता है, तो पशुओं में संक्रमण फैलने का जोखिम काफी बढ़ सकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिक और पशु चिकित्सा विभाग वर्तमान में इस नए सीरोटाइप के लिए विशेष वैक्सीन तैयार करने और आवश्यक व्यवस्थाएं करने पर काम कर रहे हैं।
SAT-1 के लक्षणों की बात करें तो, इस वायरस से संक्रमित पशुओं को बहुत तेज बुखार आता है। उनके मुंह, जीभ, मसूड़ों और खुरों के आसपास के हिस्सों में छाले या घाव बन जाते हैं। इन घावों के कारण पशुओं को चलने और चारा खाने में भारी कठिनाई होती है, जिसके परिणामस्वरूप वे अक्सर भोजन और पानी लेना कम कर देते हैं। यह बीमारी संक्रमित पशु के सीधे संपर्क से फैलती है। इसके अलावा, दूषित चारे, पानी, बर्तनों, वाहनों और जूतों के माध्यम से भी यह वायरस एक जगह से दूसरी जगह पहुँच सकता है। इस बीमारी के फैलने से दूध के उत्पादन में कमी आती है, जिससे पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। विशेष रूप से छोटे पशुओं में यदि संक्रमण गंभीर हो, तो मृत्यु का जोखिम भी रहता है।
सरकार ने पशुपालकों को भी अपने स्तर पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। यदि किसी पशु में बुखार, मुंह में छाले या लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर देना चाहिए और नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचित करना चाहिए। सरकार और विशेषज्ञों द्वारा इस नवीनतम चुनौती से लड़ने की तैयारियों को तेज कर दिया गया है ताकि पशुधन और पशुपालकों के हितों की रक्षा की जा सके।
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