मोदी ने विनम्रता और निरंतर सीखने का संदेश देने वाला सुभाषित साझा किया
सीमित सफलता के बाद अहंकार नहीं, प्रगति के लिए सीखते रहने की प्रेरणा दी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 10:09 · 1 मिनट का पाठ
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें सीमित सफलता मिलने के बावजूद विनम्र रहने और निरंतर सीखते रहकर आगे बढ़ने के महत्व पर जोर दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने 'X' (ट्विटर) पर लिखा: "खद्योतो द्योतते तावद् यावन्नोदयते शशी। उदिते तु सहस्रांशौ न खद्योतो न चन्द्रमाः।।" सुभाषित का अर्थ समझाते हुए बताया गया है कि चंद्रमा के उगने तक ही जुगनू चमकता दिखाई देता है; सूर्य के उगने पर न जुगनू का प्रकाश दिखता है, न चंद्रमा। इसी तरह, छोटी या सीमित उपलब्धि का महत्व तब तक ही होता है, जब तक उससे श्रेष्ठ या बड़ा कुछ सामने न आए। इसलिए सीमित सफलता मिलने पर अहंकारी होने के बजाय विनम्र रहना चाहिए और निरंतर सीखते हुए प्रगति करते रहना चाहिए।
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