भोपाल कॉन्क्लेव में अंतर्देशीय मत्स्य पालन के निवेश और निर्यात पर जोर
कॉन्क्लेव में 1,000 से अधिक मत्स्य पालक जुड़ेंगे; मध्य प्रदेश की निवेश और निर्यात मार्गदर्शिका जारी होगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 9:41 · 3 मिनट का पाठ
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मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य पालन विभाग और भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में ‘फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव 2026’ आयोजित किया जाएगा। कॉन्क्लेव का उद्देश्य अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन को निवेश, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन बुनियादी ढांचे, मूल्यवर्धन और निर्यात बाजारों के साथ जोड़ना है। उत्पादन-केंद्रित दृष्टिकोण से एकीकृत मूल्य-श्रृंखला मॉडल की ओर मुड़कर मछुआरों और मत्स्य पालकों के लिए बाजार पहुंच तथा रिटर्न सुधारने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कॉन्क्लेव में निवेशकों, निर्यातकों, मछुआरों, मध्य प्रदेश के विभिन्न भागों से 1,000 से अधिक मत्स्य पालकों, सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स (FFPOs), उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स, प्रोसेसर्स, वित्तीय संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य हितधारकों की भागीदारी होगी। अंतर्देशीय राज्यों को मत्स्य पालन निवेश और निर्यात तंत्र के साथ जोड़ने के अलावा, मूल्य-श्रृंखला में उद्यम विकास, वित्तीय सहायता, बाजार संबंधों और सहयोग के अवसरों पर चर्चा होगी।
कॉन्क्लेव में ‘मध्य प्रदेश फिशरीज इन्वेस्टमेंट एंड एक्सपोर्ट गाइडलाइंस, 2026’ का विमोचन होगा। केंद्र ने मध्य प्रदेश को ‘जलाशय मत्स्य पालन क्लस्टर’ के रूप में अधिसूचित किया है। मार्गदर्शिका का उद्देश्य हैचरी, मत्स्य बीज और भोजन, जलाशय तथा केज फिशरीज, जलीय पशु स्वास्थ्य, प्रसंस्करण, कोल्ड-चेन ढांचा, लॉजिस्टिक्स, मूल्यवर्धन और बाजार विकास सहित क्षेत्रों में निवेश सुगम करना है।
कार्यक्रम में अंतर्देशीय राज्यों की निर्यात क्षमता के बारे में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स का विमोचन और इंटीग्रेटेड केज कल्चर यूनिट्स का वर्चुअल उद्घाटन भी होगा। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह मध्य प्रदेश में जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास के लिए प्रशासनिक मंजूरी सौंपेंगे।
2024-25 में भारत का मत्स्य उत्पादन 197.75 लाख टन था, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन की हिस्सेदारी 151.60 लाख टन थी—देश के कुल उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा। 2025-26 में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य ₹73,890 करोड़ रहा था। मध्य प्रदेश के पास लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र है। कॉन्क्लेव राज्य के उत्पादन आधार को निवेश, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और स्थानीय तथा निर्यात बाजारों के साथ जोड़ने का प्रयास करेगा।
कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव; केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह; केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल; और मध्य प्रदेश सरकार के मत्स्य पालक कल्याण और मत्स्य पालन विकास विभाग के मंत्री नारायण सिंह पवार उपस्थित रहेंगे। आयोजकों के अनुसार, चर्चा और निवेश के माध्यम से प्रतिस्पर्धी, बाजार-केंद्रित मूल्य-श्रृंखला को प्रोत्साहन देकर उद्यमों, निर्यातकों, मछुआरों और मत्स्य पालकों के लिए अवसरों को मजबूत करने का प्रयास होगा।
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