राज्य एग्रीवोल्टेइक्स के लिए नीति और निवेश को गति दें
सम्मेलन के दूसरे दिन राज्य की योजनाओं, नई तकनीक और ब्लेंडेड फाइनेंस पर चर्चा हुई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
22 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट सुबह 8:27 · 5 मिनट का पाठ
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एग्रीवोल्टेइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 के दूसरे दिन राज्य नीति नेतृत्व, तकनीकी नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर क्रॉस-सेक्टरल जुड़ाव को गति मिली। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IISD) और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) द्वारा सह-आयोजित मंत्रिस्तरीय सत्र में ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के ऊर्जा तथा कृषि राज्य मंत्रियों ने एग्रीवोल्टेइक कार्यान्वयन के लिए राज्य-स्तरीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। निवेश के अवसरों, भूमि-उपयोग मॉडल, टैरिफ प्रोत्साहनों और स्थानीय कृषि तथा फसल की स्थिति के अनुरूप PM-KUSUM योजना के अनुकूलन पर चर्चा हुई।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने राज्य के कृषि आधार, विभिन्न फसल पद्धतियों और विस्तार लेते सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर को एग्रीवोल्टेइक्स के लिए फायदे गिनाए। खेती के साथ सोलर बिजली उत्पन्न करने से जमीन का बेहतर उपयोग और किसानों को अतिरिक्त आय हो सकती है, ऐसा उन्होंने बताया। रूफटॉप सोलर और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए बिजली की निकासी को मजबूत करेगा। राज्य में कृषि भूमि रखने वालों में छोटे और सीमांत किसानों का हिस्सा लगभग 80% होने की बात बताते हुए, उन्होंने उनके लिए अनुकूल वित्तपोषण और तकनीक की आवश्यकता पर जोर दिया। निवेशकों को उत्तर प्रदेश के अवसरों को आजमाने का निमंत्रण देकर उन्होंने ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली की निकासी के लिए राज्य के सहयोग का आश्वासन दिया।
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बिजली के बिल माफ किए गए राज्य के सभी 16 लाख कृषि ट्यूबवेल को समर्पित ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सोलराइज करने की योजना बताई। उन्होंने किसानों के भूमि स्वामित्व के अधिकारों के संरक्षण, फसल के चयन और एग्रीवोल्टेइक पद्धतियों के बारे में संरचित प्रशिक्षण की आवश्यकता दर्शाई। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के उपयोग से किसानों की क्षमता बढ़ाने तथा एग्रीवोल्टेइक्स को कृषि विविधीकरण और किसान-सहायक पहलों के साथ जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया।
मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने एग्रीवोल्टेइक्स, सोलर डिप्लॉयमेंट और बैटरी स्टोरेज को आगे बढ़ाने के राज्य के प्रयासों की जानकारी दी। 2026 को मध्य प्रदेश में ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। कुछ स्थानों पर सोलर पैनल्स के नीचे खेती शुरू होने और बैटरी-स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी होने की बात उन्होंने बताई। ओंकारेश्वर प्रोजेक्ट सहित राज्य के अक्षय ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उन्होंने उल्लेख किया।
बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार मंडल ने फीडर सेपरेशन और सोलराइजेशन के माध्यम से कृषि बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के प्रयास प्रस्तुत किए। राज्य ने लगभग 2,700 कृषि फीडरों पर काम आगे बढ़ाया है और उनके सोलराइजेशन के लिए वित्तीय सहायता मंजूर की है। बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एग्रीवोल्टेइक्स को किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण रोजगार पैदा करने का अवसर बताया। अनुसंधान, किसानों की जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए कृषि तथा वित्तीय संस्थानों और ऊर्जा उपक्रमों के बीच सहयोग की आवश्यकता उन्होंने दर्शाई।
ओडिशा के उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने बताया कि राज्य अपनी समर्पित एग्रीवोल्टेइक्स नीति 2026 को अंतिम रूप दे रहा है, जिसमें 2030 तक 1 GW का लक्ष्य है। प्रस्तावित नीति के अनुसार प्रोजेक्ट स्थल की कम से कम 90% जमीन खेती योग्य रखना, किसानों की सहमति और फसल बीमा का संरक्षण करना तथा किसानों को प्रोजेक्ट की मालिकाना हक रखने या खेती जारी रखकर जमीन लीज पर देने का विकल्प देना जरूरी होगा। GRIDCO के माध्यम से 25-वर्षीय पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPA), ग्रिड कनेक्टिविटी और निवेश प्रोत्साहन देने की योजना भी उन्होंने बताई।
नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) के ‘एग्रीवोल्टेइक्स पिच-हब’ में प्रारंभिक चरण के शोधकर्ताओं और स्टार्ट-अप्स ने विशेषज्ञ जूरी के समक्ष बैंकेबल, द्वि-उपयोगी समाधान प्रस्तुत किए। जूरी में NISE, NIBE, वेंचर कैपिटलिस्ट्स और उद्योग के अग्रणी लोग शामिल थे। फ्रानहोफर ISE और सनसीड APV ने उन्नत सोलर ट्रैकिंग, डायनेमिक पैनल टिल्टिंग, सेमी-ट्रांसपेरेंट फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल्स और उष्णकटिबंधीय तथा शुष्क परिस्थितियों के लिए माइक्रो-क्लाइमेट सॉइल सेंसर्स प्रदर्शित किए।
इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के संवाद में NTPC ग्रीन एनर्जी, फर्स्ट सोलर और यूरोपीय कंपनियों सहित डेवलपर्स ने सप्लाई चेन के स्थानीयकरण, मानकों और बाजार की निश्चितता पर चर्चा की। एग्जीक्यूटिव राउंडटेबल में विश्व बैंक, KfW, यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और IREDA सहित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जोखिम घटाने के साधनों, राहत दर पर वित्तपोषण और बड़े पैमाने पर निजी निवेश के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस ढांचे की चर्चा की।
अभिनेत्री और UNDP इंडिया यूथ चैंपियन संजना सांघी ने फायरसाइड चैट में युवाओं के नेतृत्व वाली सामुदायिक रणनीतियों तथा खाद्य सुरक्षा, अक्षय ऊर्जा और युवाओं के एकत्रीकरण के बीच संबंध पर जोर दिया। एग्रीवोल्टेइक्स यूएन सतत विकास लक्ष्यों में योगदान देने के साथ ग्रामीण युवाओं को सशक्त कर आजीविका सुरक्षित कर सकते हैं, ऐसा उन्होंने बताया। दिन का अंत इंटरएक्टिव डिजिटल पोस्टर गैलरी से हुआ, जिसमें कार्यरत प्रोजेक्ट्स और वैश्विक केस स्टडीज से मिले सबक प्रस्तुत किए गए थे।
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