राज्यपाल ने भरूच के किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए मार्गदर्शन दिया
जूना बोरभाठा में आयोजित परिसंवाद में किसानों के अनुभव प्रस्तुत किए गए और सफल किसानों का सम्मान किया गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
20 अक्टूबर 2026, रात 8:30 · अपडेट दोपहर 12:23 · 4 मिनट का पाठ
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भरूच जिले के जूना बोरभाठा गांव में आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद में राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रतजी ने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में मार्गदर्शन दिया। भरूच जिला प्रशासन के इस कार्यक्रम में प्राकृतिक कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल लगाए गए थे। राज्यपाल ने स्टॉल का दौरा किया और किसानों के साथ संवाद किया। सफल प्राकृतिक खेती से दूसरों को प्रेरणा देने वाले किसानों का सम्मान किया गया, जबकि प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव प्रस्तुत किए।
राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खेती के प्रसार के कारण जानलेवा बीमारियां बढ़ रही हैं और रासायनिक उर्वरकों तथा जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से धरती बंजर हो गई है। उन्होंने कहा कि कम खर्च में अधिक उत्पादन और स्वस्थ समाज के लिए प्राकृतिक कृषि समय की मांग है। उन्होंने एक शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि 105 माताओं के दूध के परीक्षण में सभी के दूध में यूरिया और कीटनाशकों के अंश पाए गए थे। उनके अनुसार, खेतों में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरकों का जहर अनाज और फलों के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करता है और 10 साल के बच्चे भी कैंसर तथा मधुमेह जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
उत्पादन घटने की धारणा को गलत बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि गुजरात में 8 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर मुड़े हैं और उत्पादन घटने का डर एक अफवाह है। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में 180 एकड़ जमीन में एक बूंद भी यूरिया या डीएपी का उपयोग किए बिना प्राकृतिक खेती की जा रही है। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि भरूच जिले में 22 हजार से अधिक किसान इस खेती को अपना रहे हैं।
राज्यपाल ने किसानों से अपने गांव के अन्य किसानों को भी इस अभियान से जोड़ने और देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, ऐसी खेती से धरती के जलस्तर को सुधारने, पशु-पक्षियों को बचाने और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी द्वारा देश भर में शुरू किए गए प्राकृतिक कृषि अभियान के साथ मिलकर काम कर भारत को जहरमुक्त, स्वस्थ और समृद्ध बनाने की अपील की।
राज्य के जल आपूर्ति राज्यमंत्री श्री ईश्वरसिंह पटेल ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से कैंसर, हृदय रोग और किडनी की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए राज्यपाल ने प्राकृतिक खेती का महायज्ञ शुरू किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रभाई मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए कटिबद्ध है।
जिला कलेक्टर डॉ. नवनाथ गव्हाणे ने बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती के लिए 180 क्लस्टर तैयार किए गए हैं और 360 कृषि सखी/किसान मित्रों की नियुक्ति की गई है। वर्तमान में 22,500 किसान प्राकृतिक खेती के लिए तैयार हुए हैं। पिछले वर्ष 55 बायो रिसोर्स सेंटर और 323 मॉडल फार्म तैयार किए गए थे; चालू वर्ष में 13 और सेंटर और 73 नए मॉडल फार्म बनाने की योजना है। अब तक 1 लाख से अधिक किसानों को मार्गदर्शन दिया गया है और 23,653 हेक्टेयर जमीन प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाई गई है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कृषि सखी और किसान मित्र-CRP के साथ संवाद कर प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में विधायक श्री रमेशभाई मिस्त्री, श्री रितेशभाई वसावा, अंकलेश्वर तालुका पंचायत अध्यक्ष श्री विवेकभाई फरीदीवाला, जिला विकास अधिकारी श्री योगेश कापसे सहित अग्रणी, अधिकारी, किसान और नागरिक शामिल हुए।
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