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चीन का शेनझोउ-24 मिशन: पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री पहली बार तियांगोंग स्पेस स्टेशन का दौरा करेंगे

चीन अपने स्पेस स्टेशन के दरवाजे पहली बार विदेशियों के लिए खोल रहा है, जिसमें पाकिस्तान पहला साझीदार बनकर इतिहास रचने जा रहा है।

आवतीकाल AI डेस्क7 नवंबर 2026 · 6 मिनट का पाठ
लॉन्च पैड पर खड़ा चीन का लॉन्ग मार्च रॉकेट, जो शेनझोउ अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा में ले जाने के लिए तैयार है।
लॉन्च पैड पर खड़ा चीन का लॉन्ग मार्च रॉकेट, जो शेनझोउ अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा में ले जाने के लिए तैयार है।
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चीन के महत्त्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। चीन अपने खुद के स्पेस स्टेशन, टियांगोंग (Tiangong) पर पहली बार किसी विदेशी अंतरिक्ष यात्री को भेजने की तैयारी कर रहा है। एनडीटीवी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी शेनझोउ-24 (Shenzhou-24) मिशन में एक पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री को शामिल किया जाएगा। यह कदम न केवल चीन और पाकिस्तान के बीच गाढ़े अंतरिक्ष सहयोग का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान में चीन के बढ़ते वर्चस्व को भी दर्शाता है। अब तक चीन ने अपने स्पेस स्टेशन पर केवल अपने ही अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा है, जिन्हें वे 'ताइकोनॉट्स' (taikonauts) के रूप में जानते-पहचानते हैं।

शेनझोउ अंतरिक्षयान चीन के मानवसहित अंतरिक्ष कार्यक्रम का मुख्य आधारस्तंभ रहा है। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, 'शेनझोउ' (Shenzhou) नाम का अर्थ 'दैवीय जहाज' (divine vessel) होता है, जो आकाश में बहने वाली पवित्र नदी या आकाशगंगा में यात्रा करने वाले वाहन का संकेत करता है। यह नाम 1994 में चुना गया था। शेनझोउ की डिज़ाइन रूस के प्रसिद्ध सोयुज (Soyuz) अंतरिक्षयान पर आधारित है, लेकिन यह आकार में बड़ा है और इसमें अत्याधुनिक प्रणालियों (systems) का उपयोग किया गया है। चीन ने 1999 से अब तक 23 उड़ानें संचालित की हैं, जिनमें 17 मानवसहित मिशन शामिल हैं।

अंतरिक्ष यान के वजन की तुलना (किलोग्राम में)शेंझोउ रूसी सोयुज की तुलना में लगभग १०% अधिक भारी है।
सोयुज एमएस (Soyuz MS)7,290
शेंझोउ (Shenzhou)8,000

કિગ્રા

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रोजेक्ट 921

चीन के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1967 में 'शुगुआंग' (Shuguang) अंतरिक्षयान के साथ हुई थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह प्रोजेक्ट 1980 में रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 1986 में '863 प्रोग्राम' के तहत फिर से विचार शुरू हुआ। विकिपीडिया के अनुसार, चीनी समिति ने अमेरिकी स्पेस शटल जैसी प्रणाली बनाने का सोचा था, लेकिन लागत और तकनीकी कठिनाइयों के कारण उन्होंने सादे कैप्सूल (capsule) यानी शंकु आकार के अंतरिक्षयान को चुना। 21 सितंबर 1992 को 'प्रोजेक्ट 921' को मंजूरी दी गई, जो चीन के आज के आधुनिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव है।

अंतरिक्षयान की डिज़ाइन में दो मॉड्यूल रखे जाएं या तीन, इस बात पर लंबी चर्चा चली थी। अंत में रेन शिनमिन नामक वैज्ञानिक के निर्णायक मत से तीन मॉड्यूल वाली डिज़ाइन स्वीकार की गई। इस डिज़ाइन का मुख्य फायदा यह था कि उसका ऑर्बिटल मॉड्यूल (orbital module) मुख्य यान से अलग होने के बाद भी अंतरिक्ष में रहकर प्रयोग कर सकता है। 19 नवंबर 1999 को शेनझोउ-1 का पहला मानवरहित परीक्षण किया गया था, और 15 अक्टूबर 2003 को शेनझोउ-5 मिशन के जरिए चीन ने पहली बार मनुष्य को अंतरिक्ष में भेजने में सफलता प्राप्त की थी।

शेंझोउ अंतरिक्ष यान के तीन मुख्य मॉड्यूलप्रत्येक विभाग विशिष्ट कार्य के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मॉड्यूल का नाममुख्य कार्य
ऑर्बिटल मॉड्यूल (Orbital Module)रहने के लिए जगह, वैज्ञानिक प्रयोग और डॉकिंग सिस्टम।
रीएंट्री मॉड्यूल (Reentry Module)अंतरिक्ष यात्रियों की बैठक और पृथ्वी पर सुरक्षित लौटने के लिए कवच।
सर्विस मॉड्यूल (Service Module)इंजन, ईंधन, बिजली (सोलर पैनल) और जीवन रक्षक प्रणाली।

शेनझोउ अंतरिक्षयान की आंतरिक संरचना

शेंझोउ अंतरिक्षयान मुख्य रूप से तीन भागों या मॉड्यूल (module) में विभाजित है। सबसे आगे 'ऑर्बिटल मॉड्यूल' (orbital module) होता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों के रहने और वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए जगह प्रदान करता है। इस खंड में डॉकिंग (docking) सिस्टम होता है, जिसकी मदद से अंतरिक्षयान स्पेस स्टेशन से जुड़ता है। डॉकिंग यानी दो अंतरिक्षयानों का अंतरिक्ष में सटीकता के साथ जुड़ना। शेंझोउ की डॉकिंग सिस्टम रूसी-अमेरिकी एंड्रोजिनस पेरिफेरल अटैच सिस्टम (APAS) पर आधारित है।

बीच का हिस्सा 'रीएंट्री मॉड्यूल' (reentry module) है, जो सबसे महत्वपूर्ण है। पृथ्वी पर वापस लौटते समय केवल यही हिस्सा सुरक्षित रूप से जमीन पर उतरता है। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सीटें और नियंत्रण पैनल होते हैं। इस मॉड्यूल का आकार ऐसा रखा गया है कि यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय हवा में उचित संतुलन बनाए रख सके। तीसरा और अंतिम भाग 'सर्विस मॉड्यूल' (service module) है। इस खंड में अंतरिक्षयान के इंजन, प्रोपल्शन (propulsion) यानी प्रनोदन प्रणाली, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सोलर पैनल (solar panels) होते हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने से पहले ऑर्बिटल और सर्विस मॉड्यूल अलग हो जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं।

शेंझोउ मिशन की प्रक्रिया: लॉन्च से डॉकिंग तक
  1. लॉन्च (Launch)लॉन्च मार्च २एफ रॉकेट द्वारा जियुक्वान सेंटर से अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में भेजा जाता है।
  2. कक्षा में प्रवेश (Orbit Entry)रॉकेट से अलग होने के बाद अंतरिक्ष यान पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होता है और सोलर पैनल खुलते हैं।
  3. डॉकिंग (Docking)अंतरिक्ष यान धीरे-धीरे टियांगोंग स्पेस स्टेशन के करीब जाता है और उससे जुड़ जाता है।
  4. वापसी आगमन (Reentry)मिशन पूरा होने के बाद रीएंट्री मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है और पैराशूट द्वारा इनर मंगोलिया में उतरता है।

तकनीकी विशिष्टताएँ और सुधार

शेंझोउ अंतरिक्षयान का वजन लगभग 8,000 किलोग्राम (8 टन) है, जो रूस के सोयुज एमएस (Soyuz MS) से लगभग 10% अधिक है। विकिपीडिया के डेटा के अनुसार, शेंझोउ में चार ऑर्बिटल मैन्युवरिंग इंजन होते हैं जो इसे अंतरिक्ष में दिशा बदलने में मदद करते हैं। शुरुआती मिशन में चार सोलर पैनल थे, लेकिन शेंझोउ-8 के बाद केवल सर्विस मॉड्यूल पर दो बड़े सोलर पैनल रखे जाते हैं। ये पैनल 1.8 किलोवाट से अधिक बिजली पैदा कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में चीन ने इस तकनीक में बड़े सुधार किए हैं। शेंझोउ-18 मिशन से चीन ने पुरानी निकल-कैडमियम बैटरी के स्थान पर लिथियम-आयन (lithium-ion) बैटरी का उपयोग शुरू किया है। इस बदलाव के कारण अंतरिक्षयान का कुल वजन 50 किलोग्राम जितना घट गया है। ये बैटरियां लंबा जीवन रखती हैं और अधिक कार्यक्षम हैं। इसके अलावा, शेंझोउ में आपातकाल के समय अंतरिक्ष यात्रियों के बचाव के लिए 'लॉन्च एस्कैप सिस्टम' (launch escape system) भी लगाई गई होती है, जो रॉकेट में खराबी आने पर अंतरिक्षयान को तेजी से दूर ले जा सकती है।

पृथ्वी की कक्षा में कार्यरत चीन का टियांगोंग स्पेस स्टेशन।
पृथ्वी की कक्षा में कार्यरत चीन का टियांगोंग स्पेस स्टेशन। (Shujianyang, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

टियांगोंग स्पेस स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी

चीन का टियांगोंग स्पेस स्टेशन अब पूरी तरह से कार्यरत है। चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी (CMSA) इस पूरे कार्यक्रम का संचालन करती है। सोर्स 3 के अनुसार, सीएमएसए (CMSA) ने 2016 में संयुक्त राष्ट्र के आउटर स्पेस अफेयर्स (UNOOSA) कार्यालय के साथ समझौता किया था। इस समझौते के तहत चीन ने दुनिया के अन्य देशों को भी अपने स्पेस स्टेशन पर प्रयोग करने और अंतरिक्ष यात्री भेजने का अवसर दिया है। पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री का चयन इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक हिस्सा है.

पाकिस्तान और चीन के बीच इस सहयोग से दक्षिण एशिया की अंतरिक्ष राजनीति में भी बड़े बदलाव आ सकते हैं। अब तक पाकिस्तान के पास अपना कोई मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम नहीं था, लेकिन चीन की मदद से वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो जाएगा। शेनझोउ-२४ मिशन के माध्यम से पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री टियांगोंग पर जाकर वहाँ वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे और चीनी ताइकोनोट्स के साथ समय बिताएंगे। यह मिशन लॉन्ग मार्च 2F (Long March 2F) रॉकेट द्वारा जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया जाएगा।

धुएं के गुबार के बीच आकाश की ओर प्रस्थान करता लॉन्च मार्च रॉकेट।
धुएं के गुबार के बीच आकाश की ओर प्रस्थान करता लॉन्च मार्च रॉकेट। (中新网, CC BY 4.0, Wikimedia Commons)

भविष्य की योजनाएं: मेंगझोउ की ओर प्रस्थान

भले ही शेनझोउ चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम की रीढ़ रहा है, लेकिन चीन अब इससे भी आगे बढ़ रहा है। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब 'मेंगझोउ' (Mengzhou) नामक अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष यान पर काम कर रहा है। यह नया यान दो मॉड्यूल वाला होगा और यह चंद्रमा पर मानव भेजने में सक्षम होगा। शेनझोउ केवल पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) तक सीमित है, जबकि मेंगझोउ चीन को गहरे अंतरिक्ष के अनुसंधान में मदद करेगा।

शेनझोउ-२४ मिशन केवल एक उड़ान नहीं है, बल्कि यह चीन की 'स्पेस डिप्लोमेसी' यानी अंतरिक्ष कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन है। पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्री को भेजकर चीन यह साबित करना चाहता है कि उसका स्पेस स्टेशन वास्तव में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए खुला है। आम लोगों के लिए यह समाचार इस बात का संकेत है कि अब अंतरिक्ष अनुसंधान केवल अमेरिका या रूस तक सीमित नहीं रहा है, और एशियाई देश इस क्षेत्र में नेतृत्व ले रहे हैं।

स्रोत

  1. ndtv-hi
  2. Wikipedia
  3. Wikipedia

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