मंगल पर प्राचीन जीवन की खोज: Perseverance रोवर के SuperCam उपकरण का विज्ञान और कार्यप्रणाली
नासा के Perseverance रोवर पर स्थित SuperCam दो लेजर और चार स्पेक्ट्रोमीटर की मदद से दूर से ही चट्टानों का विश्लेषण करता है। समझिए कि यह मंगल की चट्टानों, जल के इतिहास और जैविक संकेतों को खोजने के लिए किस प्रकार कार्य करता है।

मंगल ग्रह पर प्राचीन सूक्ष्मजीवों के जीवन के संभावित प्रमाण या बायोसिग्नेचर (biosignatures) की खोज करना विज्ञान जगत के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस जटिल कार्य को पूरा करने के लिए नासा (NASA) के Mars 2020 Perseverance रोवर मिशन पर एक विशेष रिमोट-सेंसिंग टूलकिट तैनात की गई है, जिसे SuperCam के रूप में जाना जाता है। SuperCam एक साथ कई उपकरणों का समूह है, जिसमें एक ऑप्टिकल कैमरा, दो विभिन्न लेजर, चार स्पेक्ट्रोमीटर और एक माइक्रोफोन शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से रोवर मंगल की सतह पर मौजूद चट्टानों और मिट्टी का दूर से ही गहराई से रासायनिक और खनिज विश्लेषण कर सकता है।
जब भी रोवर मंगल पर किसी चट्टान या नमूने की ओर ध्यान केंद्रित करता है, तो SuperCam अपने स्पेक्ट्रोमीटर और लेजर के माध्यम से एक साथ संबंधित माप एकत्र करता है। इस एकत्र किए गए डेटा के आधार पर वैज्ञानिक नमूनों के भू-रसायन विज्ञान (geochemistry) और खनिज विज्ञान (mineralogy) को सीधे निर्धारित कर सकते हैं। उपकरणों के इस समूह में रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी (Raman spectroscopy), टाइम-रिजॉल्व्ड फ्लोरेसेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (time-resolved fluorescence spectroscopy - TRF), और विजिबल एंड इन्फ्रारेड रिफ्लेक्टेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (Visible and InfraRed reflectance spectroscopy - VISIR) शामिल हैं। ये स्पेक्ट्रोमीटर प्राथमिक जानकारी प्रदान करते हैं और अणुओं की संरचना के साथ कार्बनिक यौगिकों (organic compounds) को सीधे माप सकते हैं।
- लेज़र बीम उत्सर्जनSuperCam 1064 nm तरंग दैर्ध्य वाली अति तीव्र लेज़र बीम 7 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित चट्टान पर छोड़ता है।
- धूल की सफाई और वाष्पीकरणलेज़र चट्टान की सतह से धूल साफ करता है और चट्टान की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा का वाष्पीकरण कर गर्म प्लाज्मा बनाता है।
- प्रकाश का विश्लेषणप्लाज्मा से निकलने वाले प्रकाश के रंगों को स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा मापा जाता है, जिससे चट्टान के तत्वों की संरचना निर्धारित होती है।
सुपरकैम का विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
SuperCam पिछले Curiosity रोवर में सफलतापूर्वक काम कर चुके ChemCam उपकरण का एक अत्याधुनिक और उन्नत संस्करण है। ChemCam की तुलना में SuperCam में दो अलग-अलग लेजर और नए डिटेक्टर जोड़कर इसकी क्षमता में बड़ी वृद्धि की गई है। इस उन्नत उपकरण की रचना अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसे फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ तुलुस की रिसर्च इंस्टीट्यूट इन एस्ट्रोफिजिक्स एंड प्लैनेटोलॉजी (IRAP), फ्रेंच स्पेस एजेंसी (CNES), लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी (Los Alamos National Laboratory), यूनिवर्सिटी ऑफ वालाडोलिड (स्पेन), यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई, और स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बास्क कंट्री तथा मलागा यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
इस पूरे मिशन के मुख्य अन्वेषक (Principal Investigator) लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी के रोजर विएंस (Roger Wiens) हैं। इसके अलावा, SuperCam उपकरण AEGIS (Autonomous Exploration for Gathering Increased Science) नामक एक ऑटोनॉमस टारगेटिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करता है। इस AEGIS प्रोग्राम को विकसित करने में नासा की रोबोटिक्स इंजीनियर वंदी वर्मा (Vandi Verma) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उपकरणों की अंतिम असेंबली और परीक्षण का चरण अप्रैल 2018 में पूरा हुआ था। इसके बाद जून 2019 में इसका फ्लाइट मॉडल Perseverance रोवर में फिट किया गया था और यह मिशन 30 जुलाई 2020 को अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया था।

LIBS तकनीक: पत्थरों को पिघलाकर रासायनिक जांच
SuperCam में रसायनों की संरचना मापने के लिए एक विशेष लेज़र-इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोपी (laser-induced breakdown spectroscopy - LIBS) सिस्टम का उपयोग किया जाता है। यह LIBS सिस्टम 1064 नैनोमीटर (nm) की तरंगदैर्घ्य (wavelength) वाला लेज़र बीम छोड़ता है। यह लेज़र इतना सटीक है कि यह रोवर से 7 मीटर से भी अधिक दूरी पर स्थित चावल के दाने जितने छोटे लक्ष्य का भी परीक्षण कर सकता है। इस क्षमता के कारण Perseverance रोवर अपनी रोबोटिक भुजा की पहुँच से बाहर स्थित चट्टानों का भी आसानी से अध्ययन कर सकता है।
| उपकरण / घटक | लेज़र तरंग दैर्ध्य | अधिकतम दूरी | ऑपरेटिंग तापमान |
|---|---|---|---|
| LIBS स्पेक्ट्रोमीटर | 1064 nm | 7 मीटर से अधिक | 0 °C से नीचे |
| Raman स्पेक्ट्रोमीटर | 532 nm (हरा लेज़र) | 12 मीटर तक | 0 °C से नीचे |
| इन्फ्रारेड (IR) स्पेक्ट्रोमीटर | 1.3 से 2.6 माइक्रोमीटर | रोवर मास्ट के पास | -100 °C से -50 °C |
| ऑप्टिकल कैमरा & माइक्रोफोन | दृश्य प्रकाश / ध्वनि | सतह और वातावरण | 0 °C से नीचे |
जब 1064 nm का लेज़र बीम चट्टान पर पड़ता है, तो वह पत्थर की अति सूक्ष्म मात्रा को वाष्पीकृत (vaporize) कर देता है, जिससे अत्यंत गर्म प्लाज्मा (plasma: आयनाइज्ड गैस) बनता है। उसी क्षण SuperCam इस गर्म प्लाज्मा से उत्सर्जित होने वाले प्रकाश के रंगों को मापता है। इस प्रकाश के स्पेक्ट्रम से चट्टान में मौजूद मूलभूत तत्वों की संरचना का पता चलता है। इसके अतिरिक्त, यह लेज़र बीम चट्टान की सतह पर जमा धूल को हटाने की क्षमता भी रखता है, जिससे SuperCam के अन्य सभी उपकरणों को लक्ष्य का स्पष्ट और सटीक नज़ारा मिल सके। LIBS यूनिट में कुल तीन स्पेक्ट्रोमीटर होते हैं, जिनमें से दो स्पेक्ट्रोमीटर VISIR स्पेक्ट्रा के दृश्य (visible) और वायलेट भाग को हैंडल करते हैं, जबकि इन्फ्रारेड (IR) भाग रोवर के मास्ट में रिकॉर्ड होता है।

रमन और इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी: चट्टानों की आंतरिक संरचना का विश्लेषण
SuperCam उपकरण समूह में दूसरा महत्वपूर्ण उपकरण रमन स्पेक्ट्रोमीटर है, जो 532 नैनोमीटर (nm) की तरंगदैर्घ्य वाले हरे रंग के लेज़र का उपयोग करता है। यह रमन स्पेक्ट्रोमीटर रोवर से 12 मीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्यों की जाँच कर सकता है। रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक में, हरे लेज़र का अधिकांश प्रकाश उसी तरंगदैर्घ्य पर वापस परावर्तित होता है जिस पर उसे भेजा गया था। लेकिन, प्रकाश का एक बहुत छोटा हिस्सा लक्ष्य के अणुओं के साथ अंतःक्रिया करता है। इस अंतःक्रिया के कारण मॉलिक्यूलर बॉन्ड (molecular bond: अणुओं के बीच का बंधन) की वाइब्रेशनल एनर्जी (vibrational energy: कंपन ऊर्जा) के अनुपात में प्रकाश की तरंगदैर्घ्य बदल जाती है। वापस लौटते इस रमन प्रकाश का स्पेक्ट्रली निरीक्षण करके चट्टान में मौजूद खनिजों की सटीक पहचान की जा सकती है।
મીટર
खनिजों की विस्तृत समझ प्राप्त करने के लिए फ्रांस द्वारा प्रदान किया गया इन्फ्रारेड (IR) स्पेक्ट्रोमीटर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उपकरण नियर-इन्फ्रारेड (near-infrared) क्षेत्र में काम करता है, जिसकी तरंगदैर्ध्य 1.3 से 2.6 माइक्रोमीटर होती है। यह इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर मंगल पर मौजूद क्ले मिनरल्स (clay minerals) का अध्ययन करेगा और मंगल पर तरल पानी के इतिहास के रहस्य को सुलझाने में मदद करेगा। क्ले मिनरल्स के प्रकार और उनकी प्रचुरता से अतीत में मंगल पर मौजूद पानी के स्वरूप के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं—जैसे कि वह पानी मीठा था या खारा, उसका pH अम्लीय था या तटस्थ (neutral), वह बर्फीला था या गर्म, और क्या वह लंबे समय तक अस्तित्व में था। मंगल का वातावरण प्राचीन समय में जीवन के लिए कितना अनुकूल था, यह समझने के लिए ये सभी प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं।

ऑप्टिकल कैमरा, माइक्रोफोन और तापमान नियंत्रण
जमीन के पत्थरों के अलावा मंगल के वातावरण को समझने के लिए SuperCam में एक उच्च क्षमता वाला ऑप्टिकल कैमरा भी लगाया गया है। यह कैमरा अध्ययन किए जा रहे नमूनों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली रंगीन छवियां लेता है, जो सतह की भूगर्भीय संरचना निर्धारित करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, यह कैमरा मंगल के वातावरण में मौजूद धूल और पानी के कण सौर विकिरण (solar radiation) को कैसे अवशोषित करते हैं या परावर्तित करते हैं, इसका अध्ययन करता है, जो भविष्य में मंगल के मौसम का पूर्वानुमान लगाने में सहायक होगा।
SuperCam की एक अन्य अनूठी विशेषता यह है कि इसमें मंगल की सतह से पहला ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त करने के लिए एक विशेष माइक्रोफोन फिट किया गया है। यह माइक्रोफोन Knowles Corp EK मॉडल का है। इसी मॉडल के माइक्रोफोन पहले 1998 के Mars Polar Lander और 2007 के Phoenix lander मिशन में भी भेजे गए थे, लेकिन वे दोनों मिशन मंगल से आवाज रिकॉर्ड करने में विफल रहे थे। Perseverance मिशन द्वारा पहली बार मंगल की आवाज रिकॉर्ड करने की उपलब्धि हासिल की गई है।
| चरण / घटना | अवधि / तारीख |
|---|---|
| अंतिम असेंबली और परीक्षण चरण | अप्रैल 2018 |
| रोवर में फ्लाइट मॉडल का इंस्टॉलेशन | जून 2019 |
| रोवर मिशन की सफल लॉन्चिंग | 30 जुलाई 2020 |
ये सभी संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगल के अत्यंत विषम और ठंडे वातावरण में सही ढंग से काम कर सकें, इसके लिए इनमें थर्मोइलेक्ट्रिक कूलर (thermoelectric cooler) सिस्टम रखा गया है। SuperCam के चारों स्पेक्ट्रोमीटर के डिटेक्टर्स को थर्मोइलेक्ट्रिक कूलर द्वारा 0 °C से थोड़ा नीचे के तापमान पर ठंडा रखा जाता है। इसके अलावा, इन्फ्रारेड (IR) स्पेक्ट्रोमीटर के फोटोडायोड (photodiode) या डिटेक्टर्स हर समय -100 °C से -50 °C के बीच सही ढंग से काम करें, इसके लिए छोटे थर्मोइलेक्ट्रिक कूलर्स द्वारा उन्हें निरंतर ठंडा रखा जाता है। इस प्रकार की सटीक डिजाइन और तकनीक के कारण SuperCam मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन के संकेत खोजने के लिए अब तक का सबसे उन्नत उपकरण बना हुआ है।



