मंगल की मिट्टी के रहस्यों को सहेजने वाली पर्सिवियरेंस रोवर की सैंपल कैचिंग सिस्टम की आंतरिक संरचना
नासा के पर्सिवियरेंस रोवर की सैंपल कैचिंग सिस्टम मंगल से चट्टानों और मिट्टी के नमूने एकत्र कर भविष्य के मिशन के लिए सुरक्षित करने की नींव रखती है।

नासा (NASA) द्वारा संचालित मार्स २०२० (Mars 2020) मिशन के अंतर्गत पर्सेवरेन्स (Perseverance) रोवर और इंजिन्यूइटी (Ingenuity) हेलीकॉप्टर को मंगल ग्रह के अध्ययन के लिए भेजा गया था। यह मिशन ३० जुलाई २०२० के दिन एटलस वी-५४१ (Atlas V-541) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था और १८ फरवरी २०२१ के दिन मंगल के जेजेरो क्रेटर (Jezero Crater) में सफलतापूर्वक लैंड हुआ था। मंगल पर उतरने के इस स्थान को बाद में ५ मार्च २०२१ के दिन ऑक्टेविया ई. बटलर लैंडिंग (Octavia E. Butler Landing) नाम दिया गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य मंगल के प्राचीन वातावरण और भौगोलिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करना तथा भूतकाल में वहाँ माइक्रोबायल जीवन (microbial life) होने के संकेत या बायोसिग्नेचर (biosignatures) खोजना है।
इस अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रोवर की सैंपल कैचिंग सिस्टम (Sample Caching System: नमूने एकत्र कर सुरक्षित सहेजने वाली रोबोटिक सिस्टम) निभाती है। यह सिस्टम मंगल की सतह से चट्टानों के कोर (कोर ड्रिल से प्राप्त बेलनाकार टुकड़े) और मिट्टी के नमूनों को ट्यूब में सुरक्षित रूप से पैक करती है। नासा की साइंस डेफिनेशन टीम ने सबसे पहले ३१ नमूने एकत्र करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे २०१५ में विस्तृत करके मंगल की सतह पर अलग-अलग जगह पर नमूनों की ट्यूब रखने की योजना बनाई गई थी। इन नमूनों को भविष्य के मार्स सैंपल रिटर्न (Mars Sample Return - MSR) मिशन द्वारा पृथ्वी पर वापस लाया जाएगा।
| घटक (Component) | माप / वजन (Mass / Size) |
|---|---|
| पर्सेवरेंस रोवर वजन | १,०२५ kg |
| क्युरियोसिटी रोवर वजन | ८९९ kg |
| क्रूज़ स्टेज वजन | ५३९ kg |
| एरोशेल डिसेंट व्हीकल | ५७५ kg |
| हीट शील्ड वजन | ४४० kg |
| डिसेंट स्टेज (फ्यूल साथ) | १,०७० kg |
| पैराशूट व्यास | २१.५ m |
| रोबोटिक आर्म लंबाई | २.१ m |
| व्हील्स व्यास | ५२.५ cm |
| MMRTG प्लूटोनियम डाइऑक्साइड | ४.८ kg |
पर्सेवरेन्स रोवर की डिज़ाइन उसके पूर्ववर्ती क्यूरियसिटी (Curiosity) रोवर से प्रेरित है, लेकिन उसमें विज्ञान के नए उपकरण और एक अत्याधुनिक कोर ड्रिल जोड़े गए हैं। मिशन की विभिन्न प्रणालियों के वजन की बात करें तो, पृथ्वी से मंगल तक की यात्रा के लिए क्रूज़ स्टेज (cruise stage) ५३९ किलोग्राम का था। मंगल के वातावरण में प्रवेश कर सुरक्षित लैंडिंग कराने वाली एंट्री, डिसेंट और लैंडिंग सिस्टम (EDLS) में ५७५ किलोग्राम का एयरोशेल और ४४० किलोग्राम की हीट शील्ड शामिल थी। रोवर को मंगल की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाले डिसेंट स्टेज (descent stage) का ईंधन सहित वजन १,०७० किलोग्राम था, जिसमें ४०० किलोग्राम लैंडिंग प्रोपेलेंट शामिल था। अंतिम लैंडिंग के दौरान गति धीमी करने के लिए २१.५ मीटर चौड़े और ८१ किलोग्राम वजन वाले विशाल पैराशूट का उपयोग किया गया था।
पर्सेवरेन्स रोवर का कुल वजन 1,025 किलोग्राम है, जो क्यूरियसिटी रोवर के 899 किलोग्राम वजन से 14 प्रतिशत अधिक है। रोवर में नए तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिसमें इसके पहियों (wheels) को अधिक मजबूत बनाया गया है। क्यूरियसिटी के चलकर घिसे हुए व्हील्स के अनुभव के आधार पर, पर्सेवरेन्स में 52.5 सेंटीमीटर व्यास वाले अधिक मोटे और टिकाऊ एल्युमिनियम व्हील्स लगाए गए हैं, जिनमें ट्रैक्शन के लिए क्लीट्स और स्प्रिंग जैसे सपोर्ट के लिए मुड़े हुए टाइटेनियम स्पोक्स हैं। इसके अलावा रोवर में 19 कैमरे और 2 माइक्रोफोन हैं। इस रोवर पर मल्टी-मिशन रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (MMRTG) लगाया गया है। 45 किलोग्राम वजन वाले इस जनरेटर में 4.8 किलोग्राम प्लूटोनियम डाइऑक्साइड (plutonium dioxide) का उपयोग होता है, जो लॉन्च के समय लगभग 110 वॉट बिजली उत्पन्न करता है और इसकी कार्यशील लाइफ 14 वर्ष की है। पीक पावर डिमांड के लिए इसमें लिथियम-आयन बैटरियां भी जोड़ी गई हैं।
- १. नमूना ड्रिलिंग (Drilling Sample)२.१ मीटर लंबे रोबोटिक आर्म द्वारा मंगल चट्टानों में ड्रिल करके कोर सैंपल प्राप्त किया जाता है।
- २. ट्यूब सीलिंग (Tube Sealing)लिए गए सैंपल को विशेष आंतरिक अल्ट्रा-क्लीन ट्यूब में हवाचूस्त (hermetically) तरह सील किया जाता है।
- ३. आंतरिक रिकॉर्डिंग (Internal Caching)रोवर आंतरिक कैचिंग सबसिस्टम में ट्यूब वजन करके २D बारकोड साथ उसका निरीक्षण रिकॉर्ड किया जाता है।
- ४. मंगल सतह पर संग्रह (Surface Caching)भविष्य Mars Sample Return (MSR) मिशन के लिए ट्यूब को मंगल सतह पर निश्चित स्थान पर छोड़ा जाता है।
रोवर पर 5 जॉइंट वाला 2.1 मीटर (6 फीट 11 इंच) लंबा रोबोटिक आर्म (robotic arm) लगाया गया है। इस आर्म की मदद से मंगल की चट्टानों में ड्रिलिंग करके नमूने प्राप्त किए जाते हैं। सैंपल कैचिंग सिस्टम अत्यंत सटीकता से काम करता है। सबसे पहले रोबोटिक आर्म पर मौजूद ड्रिल चट्टान से सैंपल कोर लेती है। इस नमूने को रोवर की आंतरिक कैचिंग असेंबली में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ इसे अल्ट्रा-क्लीन सैंपल ट्यूब में सुरक्षित पैक करके सील कर दिया जाता है। प्रत्येक ट्यूब पर 2D बारकोड प्रिंट होता है ताकि भविष्य के मिशन के दौरान इसकी सही पहचान हो सके।


सेंपल कैचिंग सिस्टम की आंतरिक यांत्रिक संरचना अत्यंत जटिल है। रोवर के पेट में स्थित यह छोटी रोबोटिक सिस्टम सैंपल ट्यूब को संभालती है, उसका वजन मापती है, उसका फोटोग्राफ लेती है और उसे Hermetically (हवाचूस्त तरीके से) सील करती है। ट्यूब सील होने के बाद इसे रोवर के अंदर संग्रहित किया जा सकता है या मंगल की सतह पर एक निश्चित डेपो (cache) में रखा जा सकता है। पर्सेवरेन्स मिशन के दौरान जमीन पर 20 से 30 सैंपल ट्यूब रखने की योजना है।

नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के संयुक्त मार्ड सैंपल रिटर्न (MSR) अभियान के लिए ये नमूने निर्णायक हैं। भविष्य में भेजे जाने वाले मिशन में एक फेच रोवर (fetch rover) इन ट्यूब्स को एकत्रित करेगा और इसे 2-स्टेज वाले सॉलिड-फ्यूल मार्स एसेंट व्हीकल (Mars Ascent Vehicle - MAV) तक पहुँचाएगा। MAV मंगल की सतह से उड़ान भरकर 500 किलोमीटर की ऑर्बिट में पहुँचेगा। वहाँ सैंपल कंटेनर को अर्थ रिटर्न ऑर्बिटर (Earth Return Orbiter) में ट्रांसफर किया जाएगा और अंत में अर्थ एंट्री व्हीकल (EEV) द्वारा ये सैंपल्स पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से उतारे जाएंगे।

पर्सेवरेन्स रोवर ने अपने उतरने के समय टेरेन रिलेटिव नेविगेशन (Terrain Relative Navigation - TRN) तकनीक का उपयोग किया था, जिससे ७.७ किमी × ६.६ किमी के क्षेत्र में ४० मीटर की त्रुटि के बिना सटीक लैंडिंग संभव हुई थी। रोवर ने मंगल पर इनजेन्यूइटी हेलीकॉप्टर के साथ सफलतापूर्वक काम किया था। इनजेन्यूइटी ने २५ जनवरी २०२४ को सेवानिवृत्त होने से पहले १०४२ सोल (१०७१ दिन) तक सेवा दी थी। पर्सेवरेन्स रोवर आज भी मंगल के पेचीदा भूभागों को पार करके मानवता के लिए ब्रह्मांड के नए रहस्यों से पर्दा उठा रहा है।


