फिजिकल AI: जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट के शरीर में प्रवेश करेगा तब क्या बदलेगा?
डिजिटल मस्तिष्क और भौतिक शरीर का मिलन यानी फिजिकल AI, जो कृषि से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक के क्षेत्रों में क्रांति लाने के लिए तैयार है।

आज के समय में हम ChatGPT या अन्य भाषाई मॉडेल्स से परिचित हैं, परंतु यह बुद्धि अब तक केवल स्क्रीन तक सीमित थी। जब इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एक भौतिक शरीर मिलता है, तब इसे 'फिजिकल AI' कहा जाता है। यह तकनीक रोबोटिक्स और स्वायत्त प्रणालियों के समन्वय से बनी है, जो वास्तविक दुनिया में हलचल कर सकती है और कार्य कर सकती है। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रोबोटिक्स रोबोट्स की डिज़ाइन, निर्माण, संचालन और उपयोग का अंतरविषयी अध्ययन है। एक रोबोटिकिस्ट (roboticist) वह व्यक्ति है जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञ होता है और वह मशीनों को मानवीय कार्यों में मददगार बनाने के लिए कार्य करता है।
रोबोटिक्स में सामान्यतः डिज़ाइन के चार मुख्य पहलुओं का समावेश होता है: पावर स्रोत, यांत्रिक संरचना, नियंत्रण प्रणाली और सॉफ्टवेयर। पावर स्रोत के रूप में बैटरी या बिजली का उपयोग होता है, जबकि यांत्रिक संरचना में उसके शरीर के अंगों का समावेश होता है। नियंत्रण प्रणाली (control system) इलेक्ट्रिकल सर्किट के माध्यम से सॉफ्टवेयर चलाती है और मोटर की गति को नियंत्रित करती है। सॉफ्टवेयर रोबोट का मस्तिष्क है, जो तय करता है कि कब और कैसे कार्य करना है। यह सॉफ्टवेयर रिमोट कंट्रोल द्वारा या पूरी तरह से AI द्वारा संचालित हो सकता है। फिजिकल AI का मुख्य उद्देश्य ऐसी मशीनें बनाना है जो मनुष्यों के साथ प्राकृतिक रूप से संपर्क कर सकें और जटिल वातावरण में काम कर सकें।
- सेंसिंग (Sensing)रोबोट उसके सेंसर्स द्वारा आसपास के वातावरण की जानकारी एकत्र करता है।
- प्रोसेसिंग (Processing)एकत्र की गई जानकारी को AI सॉफ्टवेयर द्वारा विश्लेषित किया जाता है और निर्णय लिया जाता है।
- एक्ट्यूएशन (Actuation)नियंत्रण प्रणाली मोटर्स और एक्ट्यूएटर्स को आदेश देती है ताकि रोबोट हलचल कर सके।
किसी भी भौतिक AI सिस्टम के लिए ऊर्जा का स्रोत सबसे महत्वपूर्ण है। अधिकांश रोबोट्स में लेड-एसिड बैटरी का उपयोग होता है, जो सुरक्षित है और लंबा आयुष्य रखती है, परंतु वह सिल्वर-कैडमियम बैटरी की तुलना में वजन में भारी होती है। सिल्वर-कैडमियम बैटरी आकार में छोटी होती है परंतु बहुत महंगी होती है। रोबोट की डिज़ाइन करते समय उसकी सुरक्षा, साइकिल लाइफटाइम और वजन जैसे कारकों को ध्यान में रखना पड़ता है। इसके अलावा जनरेटर, फ्लाईव्हील एनर्जी स्टोरेज, हाइड्रोलिक्स और सोलर पावर का भी उपयोग हो सकता है। कुछ प्रयोगात्मक रोबोट्स तो ऑर्गेनिक कचरे के पाचन द्वारा भी ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।
रोबोट की हलचल के लिए एक्चुएटर्स (actuators) उत्तरदायी होते हैं, जो संग्रहित ऊर्जा को गति में बदलते हैं। सबसे लोकप्रिय एक्चुएटर्स इलेक्ट्रिक मोटर्स हैं, जिनमें पोर्टेबल रोबोट्स के लिए डीसी (DC) मोटर्स और औद्योगिक रोबोट्स के लिए एसी (AC) मोटर्स का उपयोग होता है। हाल ही में पीजोइलेक्ट्रिक मोटर्स (piezoelectric motors) का उपयोग बढ़ा है, जिनमें छोटे सिरेमिक तत्व सेकंड में हजारों बार कंपन पैदा करके गति देते हैं। ये मोटर्स नेनोमीटर जितनी सटीकता और अधिक ताकत प्रदान करती हैं। इसके अलावा, सीरीज इलास्टिक एक्चुएशन (series elastic actuation) नामक पद्धति मोटर और लोड के बीच लोचशीलता जोड़ती है, जो टक्कर के समय सुरक्षा बढ़ाती है।
| प्रकार | कार्यपद्धति | मुख्य फायदा |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रिक मोटर | बिजली से चक्र या गियर घुमाता है | सरल और बहुमुखी उपयोग |
| पीजोइलेक्ट्रिक | सेरेमिक तत्वों का कंपन | नैनोमीटर सटीकता और गति |
| न्यूमैटिक मसल्स | हवा भरी जाने वाली ट्यूब का विस्तार | ४२% तक का विस्तार |
| लीनियर एक्ट्यूएटर | सीधी रेखा में अंदर-बाहर गति | औद्योगिक भारी काम के लिए उत्तम |
मानव मांसपेशियों की नकल करने के लिए कृत्रिम मांसपेशियां (artificial muscles) विकसित की गई हैं। न्यूमैटिक आर्टिफिशियल मसल्स (pneumatic artificial muscles) ऐसी ट्यूब हैं जो हवा भरने पर ४२% तक फूल सकती हैं। शेप मेमोरी अलाॅय (shape memory alloy) ऐसा मटीरियल है जो बिजली देने पर ५% जितना सिकुड़ जाता है। इलेक्ट्रोएक्टिव पॉलिमर्स (electroactive polymers) तो ३८०% तक सिकुड़ सकते हैं, जिनका उपयोग ह्यूमनॉइड रोबोट्स के चेहरे की मांसपेशियां बनाने के लिए किया जाता है। भविष्य में कार्बन नैनोट्यूब्स का उपयोग हो सकता है, जो १० J/cm3 जितनी ऊर्जा संग्रहित करने की क्षमता रखते हैं। यदि ८ मिलीमीटर व्यास के कार्बन नैनोट्यूब वायर का उपयोग किया जाए, तो वह मानव बाइसेप्स से भी अधिक शक्तिशाली बन सकता है।
रोबोट्स की हलचल या लोकोमोशन (locomotion) के लिए विभिन्न पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। एक पहिये वाले रोबोट्स बॉल पर संतुलन बनाए रखते हैं, जैसे कि कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी का Ballbot जो आदमी जितनी ऊंचाई रखता है। दो पहियों वाले रोबोट्स गायरोस्कोप (gyroscope) का उपयोग करके अपना संतुलन बनाए रखते हैं। चार या छह पहियों वाले रोबोट्स बाहर के उबड़-खाबड़ रास्तों पर बेहतर पकड़ देते हैं। हालांकि, दो पैरों पर चलने वाले रोबोट्स बनाना सबसे चुनौतीपूर्ण है। होंडा का ASIMO रोबोट जीरो मोमेंट पॉइंट (zero moment point) एल्गोरिदम का उपयोग करता है, जो गुरुत्वाकर्षण और चलने की गति के बीच संतुलन बनाए रखता है। हालांकि, मानव निरीक्षकों के अनुसार यह चाल प्राकृतिक नहीं लगती है।

अधिक उन्नत पद्धति डायनेमिक बैलेंसिंग (dynamic balancing) है, जिसमें रोबोट लगातार अपनी गति की निगरानी करता है और स्थिरता बनाए रखने के लिए पैर रखता है। Anybots का Dexter रोबोट इतना स्थिर है कि वह छलांग भी लगा सकता है। दूसरी एक आशाजनक पद्धति पैसिव डायनेमिक्स (passive dynamics) है, जिसमें अंगों के झूलने की गति का उपयोग चलने के लिए होता है, जो कार्यक्षमता में १० गुना वृद्धि कर सकता है। इसके अलावा उड़ने वाले रोबोट्स या अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) भी फिजिकल AI का हिस्सा हैं। आधुनिक पैसेंजर प्लेन भी एक प्रकार के उड़ने वाले रोबोट्स ही हैं, जिनमें ऑटोपायलट टेक-ऑफ से लेकर लैंडिंग तक का नियंत्रण कर सकता है।
प्रकृति से प्रेरणा लेकर बायोमिमैटिक फ्लाइंग रोबोट्स (biomimetic flying robots) बनाए जा रहे हैं। ये रोबोट्स पक्षियों, चमगादड़ों या कीड़ों की तरह पंख फड़फड़ाकर उड़ सकते हैं। पक्षियों जैसे पंख रखने वाले रोबोट्स हवा में अपने पंखों का आकार बदलकर उड़ने की कार्यक्षमता बढ़ा सकते हैं। इसी तरह, दीवार पर चढ़ने के लिए गीको (gecko) छिपकली के पैरों की नकल करने वाले रोबोट्स बनाए गए हैं, जो कांच जैसी चिकनी सतह पर भी चढ़ सकते हैं। पानी में तैरने के लिए मछलियों की नकल की जाती है, क्योंकि मछलियां ९०% से अधिक प्रोपल्सिव कार्यक्षमता रखती हैं, जो किसी भी मानव निर्मित नाव से बहुत अधिक है।
भारत में इस क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology) मुख्य भूमिका निभाता है। मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार, इसके अंतर्गत विभिन्न विभाग कार्यरत हैं जैसे कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)। ये संस्थान नेशनल क्वांटम मिशन और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर रहे हैं। भारत में रोबोटिक्स का उपयोग कृषि, विनिर्माण, चिकित्सा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न स्वायत्त संस्थानों को प्रोत्साहित कर रही है।
फिजिकल AI का प्रभाव मानव जीवन पर गहरा पड़ेगा। एक तरफ यह कामगारों को विस्थापित कर सकता है, जिसके समाधान के रूप में यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे सुझाव दिए गए हैं। दूसरी तरफ, यह उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए करियर के नए अवसर भी पैदा करता है। रोबोटिक्स एक लाभदायक व्यवसाय बनता जा रहा है। भविष्य में ऐसे रोबोटों की अपेक्षा है जो केवल कारखानों में ही नहीं, बल्कि हमारे घरों में घरेलू कामों में, अस्पतालों में सर्जरी में और अंतरिक्ष अनुसंधान में मनुष्य के साथी के रूप में काम करेंगे। यह तकनीक अभी भी सक्रिय अनुसंधान के अधीन है, जिसमें क्वांटम रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्र जुड़ रहे हैं।

निष्कर्ष में, फिजिकल AI केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि एक ऐसी बुद्धिमान प्रणाली है जो भौतिक जगत के नियमों को समझती है और उनमें अनुकूलन करती है। चाहे वह दो पैरों पर चलने वाले ह्यूमेनाइड हों या पंख फड़फड़ाते ड्रोन, यह तकनीक मानव क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संस्थान जिस तरह से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाले दशकों में फिजिकल AI हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन जाएगा।


