भारतीय शेयर बाज़ार की सुरक्षा के लिए सेबी तैयार कर रहा है अपना स्वदेशी AI मॉडल
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) भारतीय सिक्योरिटीज बाज़ार के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए स्वदेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल पर काम कर रहा है। बाज़ार की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

भारतीय शेयर बाज़ार में निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से देश की मुख्य वित्तीय नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Securities and Exchange Board of India - SEBI) एक स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence - AI) मॉडल विकसित करने की संभावनाएं टटोल रही है। बीएफएसआई इनसाइट समिट (BFSI Insight Summit) के दौरान २९ अक्टूबर २०२६ को सेबी के चेयरमैन तुहीन कांत पांडे ने इस संबंध में महत्वपूर्ण घोषणा की थी।
वित्तीय बाज़ारों में दिन-प्रतिदिन बढ़ती ट्रेडिंग की गति और लाखों सौदों की जटिलता को ध्यान में रखते हुए, पारंपरिक सॉफ्टवेयर से अधिक उन्नत तकनीक की आवश्यकता उत्पन्न हुई है। सेबी द्वारा विचारधीन यह स्वदेशी मॉडल भारतीय पूंजी बाज़ार के कानूनों और विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि बाज़ार में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर रीअल-टाइम में नज़र रखी जा सके।
દિવસ
पृष्ठभूमि: सेबी की स्थापना और संगठनात्मक ढांचा
भारतीय वित्तीय बाज़ार को सुव्यवस्थित करने के लिए सेबी की स्थापना १२ अप्रैल १९८८ को एक कार्यकारी संस्था के रूप में की गई थी। उससे पहले कैपिटल इश्यू कंट्रोल एक्ट, १९४७ के तहत 'कंट्रोलर ऑफ कैपिटल इश्यूज़' बाज़ार का नियमन करती थी। तत्पश्चात भारतीय संसद द्वारा सेबी एक्ट, १९९२ पारित करके ३० जनवरी १९९२ को सेबी को स्वायत्त और वैधानिक शक्तियां प्रदान की गईं।
सेबी का मुख्य मुख्यालय मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में स्थित है। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में इसके क्षेत्रीय कार्यालय स्थित हैं। सेबी का संचालन ९ सदस्यों का बोर्ड करता है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नामांकित चेयरमैन, केंद्रीय वित्त मंत्रालय के २ सदस्य, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का १ सदस्य और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अन्य ५ सदस्य शामिल हैं। सेबी कुल २० विभागों के माध्यम से देश के वित्तीय बाज़ार का पूर्ण नियंत्रण और संचालन करता है।
वर्तमान में १ मार्च २०२५ से तुहीन कांत पांडे सेबी के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने माधबी पुरी बुच का स्थान लिया था, जिनका कार्यकाल २8 फरवरी २०२५ को समाप्त हुआ था। सेबी के पास विधायी, न्यायिक और कार्यकारी इन तीनों प्रकार की शक्तियां हैं, जो उसे नियम बनाने, जांच करने और जुर्माना लगाने का अधिकार देती हैं।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| गैर-संवैधानिक स्थापना | १२ अप्रैल १९८८ |
| वैधानिक अधिकार मिलने की तिथि | ३० जनवरी १९९२ |
| वर्तमान चेयरमैन | तुहीन कांत पांडे (१ मार्च २०२५ से) |
| मुख्य मुख्यालय | बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई |
| बोर्ड के कुल सदस्य | ९ सदस्य |
| कार्यकारी विभाग | २० विभाग |
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार कार्य करेगा?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर प्रणालियों की वह क्षमता है जिसके माध्यम से वे ऐसे कार्य कर सकती हैं जिनके लिए मानवीय बुद्धि की आवश्यकता होती है, जैसे सीखना, तर्क करना और निर्णय लेना। शेयर बाज़ार के संदर्भ में, AI मुख्य रूप से लार्जेस्ट लैंग्वेज मॉडल्स (Large Language Models - LLM) और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (Natural Language Processing - NLP) क्षमताओं का उपयोग करेगा। NLP की सहायता से यह मॉडल हज़ारों कंपनियों की त्रैमासिक फाइलिंग्स, समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स का पल भर में विश्लेषण कर सकेगा।
अनियमितताओं को पकड़ने के लिए मशीन लर्निंग (Machine Learning) एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है। जब बाज़ार में किसी विशेष शेयर के भाव में कृत्रिम रूप से वृद्धि करके छोटे निवेशकों को फंसाने की 'पंप एंड डंप स्कीम' (Pump and Dump Scheme) चल रही हो, या अंदर की गैर-सार्वजनिक जानकारी के आधार पर 'इंसाइडर ट्रेडिंग' (Insider Trading) हो रही हो, तब यह AI प्रणाली असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न को तुरंत पहचान लेगी।
पारंपरिक प्रणालियों में केवल पूर्व-निर्धारित नियमों के आधार पर जांच होती थी, जबकि स्वदेशी AI मॉडल अपने अनुभव से निरंतर सीखकर नए प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी का पता लगाने में भी सक्षम बनेगा। यह संभावित वित्तीय अपराधों के लिए एक 'रिस्क स्कोर' तैयार करेगा ताकि सेबी के अधिकारी शीघ्र और सटीक कदम उठा सकें।
- १. डेटा संकलनशेयर बाज़ार के ट्रेड्स, वॉल्यूम और कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टों का रीअल-टाइम संकलन किया जाता है।
- २. नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंगAI मॉडल नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग के माध्यम से हज़ारों दस्तावेजों और घोषणाओं का त्वरित विश्लेषण करता है।
- ३. संदिग्ध पैटर्न की पहचानइंसाइडर ट्रेडिंग और पंप-एंड-डंप जैसी अनियमितताओं के संकेत और रिस्क स्कोर तय किए जाते हैं।
- ४. अलर्ट और एन्फोर्समेंटसेबी के अधिकारियों को संदिग्ध गतिविधि के संबंध में स्वचालित अलर्ट प्राप्त होता है ताकि त्वरित कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सेबी के ऐतिहासिक सुधार और तकनीकी प्रगति
सेबी का इतिहास बाज़ार के ढांचागत और तकनीकी सुधारों से परिपूर्ण है। डिपॉजिटरीज एक्ट, १९९६ के माध्यम से सेबी ने भौतिक शेयर प्रमाण पत्रों को समाप्त करके कागज रहित ट्रेडिंग की शुरुआत की थी, जिससे चोरी और फर्जी प्रमाण पत्र का भय दूर हुआ था। इसके अलावा निपटान प्रक्रिया को तीव्र बनाने के लिए सेबी ने निरंतर कदम उठाए हैं।
जुलाई २००१ में सेबी ने T+५ रोलिंग साइकिल पेश की थी, जिसे अप्रैल २००२ में घटाकर T+३ और अप्रैल २००३ में T+२ कर दिया गया था। T+२ का अर्थ यह है कि सौदा होने के २ दिनों के भीतर शेयरों और धन का निपटान हो जाता है। इसके अलावा अक्टूबर २०११ में सेबी ने खुदरा निवेशकों के लिए आवेदन सीमा ₹१,००,००० से बढ़ाकर ₹२,००,००० कर दी थी।
हाल ही में २४ सितंबर २०२६ को सेबी बोर्ड ने पोर्टफोलियो मैनेजर नियमों में बड़ा बदलाव किया था। इसके तहत 'पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट फॉर इन्वेस्टिंग इन म्यूचुअल फंड यूनिट्स' (Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund Units - PRIM) को मंजूरी दी गई, जिसके अंतर्गत म्यूचुअल फंड योजनाओं में न्यूनतम ₹२५ लाख ($२६,०००) का निवेश करने की अनुमति प्रदान की गई है।

भारतीय बाज़ार और सामान्य निवेशकों पर प्रभाव
भारतीय पूंजी बाज़ार में खुदरा निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में स्वदेशी AI मॉडल बाज़ार की वास्तुकला सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह मॉडल विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम करेगा और भारतीय कानूनी ढांचे एवं ट्रेडिंग पद्धतियों के साथ सीधे तौर पर सुसंगत होगा।
भूतकाल में सत्यम घोटाले, आइएलएंडएफएस (IL&FS) संकट या पंजाब नेशनल बैंक घोटाले जैसे मामलों में समय पर निगरानी न रखने के आरोप सेबी पर लगे थे। AI आधारित रीअल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली से अनियमितताओं को शुरुआती चरणों में ही रोका जा सकेगा, जिससे सामान्य निवेशकों की पूंजी अधिक सुरक्षित बनेगी और बाज़ार में उनका विश्वास कायम रहेगा।
चुनौतियां और अस्पष्ट बिंदु
तकनीकी प्रगति के बावजूद, वित्तीय मॉडलों में AI का उपयोग कुछ चुनौतियां भी प्रस्तुत करता है। सबसे बड़ा प्रश्न AI में पाई जाने वाली 'हेल्युसिनेशन' (Hallucinations) अर्थात गलत उत्तर या अनुमान देने की समस्या का है। यदि मॉडल गलती से किसी वैध सौदे को संदिग्ध घोषित कर देता है, तो बाज़ार में अनावश्यक घबराहट फैल सकती है।
इसके अतिरिक्त, सेबी डेटा संकलन के लिए स्टॉक एक्सचेंजों पर निर्भर रहता है, अतः यह आवश्यक है कि AI मॉडल को निरंतर सटीक और गुणवत्तापूर्ण डेटा प्राप्त होता रहे। एक मजबूत कानूनी ढांचा और AI निर्णयों के लिए जवाबदेही तय करना भी एक जटिल विषय है, जिसके संबंध में आने वाले दिनों में अधिक स्पष्टता आने की अपेक्षा है।


