मंगल पर जीवन की खोज: पर्सिवरेंस रोवर की अत्याधुनिक संरचना और उसके वैज्ञानिक उपकरण
लाल ग्रह के जेज़ेरो क्रेटर में चट्टानों को खोदकर प्राचीन जीवन के प्रमाण तलाश रहे नासा के सबसे शक्तिशाली रोवर की आंतरिक तकनीक और कार्यप्रणाली का गहन विश्लेषण।

अंतरिक्ष अनुसंधान के इतिहास में मंगल ग्रह हमेशा से मानव जाति के लिए सबसे बड़ा रहस्य रहा है। 18 फरवरी 2021 को जब नासा का पर्सिवरेंस (Perseverance) रोवर मंगल के जेजेरो क्रेटर (Jezero Crater) नामक विशाल गड्ढे में सफलतापूर्वक उतरा, तब लाल ग्रह के अन्वेषण में एक नए युग का आरंभ हुआ था। यह रोवर केवल एक वाहन नहीं है, बल्कि एक पूर्णतः स्वचालित, चलती-फिरती प्रयोगशाला है जिसे जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) द्वारा डिजाइन किया गया है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि क्या मंगल पर अतीत में कभी सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व था या नहीं, और भविष्य में पृथ्वी पर वापस लाए जा सकने वाले चट्टानों के नमूने एकत्र करना है।
स्थिर लैंडर की तुलना में रोवर वाले मिशन अधिक उपयोगी साबित होते हैं क्योंकि वे सतह पर हजारों मीटर घूम सकते हैं, वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प भौगोलिक संरचनाओं तक पहुंच सकते हैं और सर्दियों के मौसम में सूर्य का प्रकाश प्राप्त करने के लिए उपयुक्त ढलानों पर खड़े हो सकते हैं। पर्सिवरेंस नासा का पांचवां मंगल रोवर है, जो अपने सफल पूर्ववर्ती क्यूरियोसिटी (Curiosity) रोवर की डिजाइन पर आधारित है। लगभग एक कार के आकार का यह रोवर अत्यंत प्रतिकूल वातावरण, अत्यधिक ठंड और रेत के तूफानों के बीच भी निरंतर कार्य कर रहा है।
पूर्ववर्ती मिशन और पर्सिवरेंस का आगमन
मंगल ग्रह पर रोवर भेजने की शुरुआत 1997 में नासा के सोजर्नर (Sojourner) रोवर से हुई थी, जिसने केवल 100 मीटर से थोड़ा अधिक दूरी तय की थी। इसके बाद 2004 में स्पिरिट (Spirit) और अपॉर्चुनिटी (Opportunity) रोवर उतरे, जिसमें अपॉर्चुनिटी रोवर ने अविश्वसनीय रूप से 15 पृथ्वी वर्षों तक कार्य करके 45.16 किलोमीटर की यात्रा पूरी की थी। 2012 में उतरा क्यूरियोसिटी रोवर आज भी सक्रिय है। पर्सिवरेंस इन सभी अनुभवों का निचोड़ है। यूएस नेशनल एकेडमीज के साइंस डिकेडल सर्वे की सिफारिश के अनुसार भविष्य के 'मार्स सैंपल रिटर्न' मिशन के लिए नमूने सुरक्षित रखने में सक्षम रोवर बनाने का निर्णय लिया गया था, जिसका खर्च 2.5 अरब डॉलर की सीमा में रखने का लक्ष्य था।
पर्सिवरेंस रोवर का वजन 1,025 किलोग्राम है, जो क्यूरियोसिटी के 899 किलोग्राम वजन से 14 प्रतिशत अधिक है। अतिरिक्त भारी वैज्ञानिक उपकरणों और नमूना संग्रह करने वाली नई प्रणाली के कारण इसका वजन बढ़ा है। वायुमंडल में प्रवेश करते समय उत्पन्न होने वाली प्रचंड गर्मी से सुरक्षा के लिए इसके हीट शील्ड में फेनोलिक-इम्प्रेग्नेटेड कार्बन एब्लेटर (PICA) सामग्री का उपयोग किया गया था, जो 1,320 डिग्री सेल्सियस (2,400 डिग्री फारेनहाइट) तक का तापमान सहन कर सकती है।
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रोवर का ढांचा, पहिए और परमाणु ऊर्जा का स्रोत
क्यूरियोसिटी मिशन के दौरान यह अनुभव किया गया था कि मंगल के तीक्ष्ण चट्टानें रोवर के एल्युमिनियम के पहियों को तेजी से नुकसान पहुँचाती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए इंजीनियरों ने परसेवरेंस के पहियों को अधिक मजबूत और मोटा बनाया है। नए पहियों का व्यास 52.5 सेंटीमीटर है, जो क्यूरियोसिटी के 50 सेंटीमीटर से बड़ा है, लेकिन इसकी चौड़ाई थोड़ी कम की गई है। इन पहियों पर विशेष प्रकार के क्लीट्स (cleats) यानी पकड़ बनाए रखने वाली खांचे और घुमावदार टाइटेनियम स्पोक्स लगाए गए हैं, जो स्प्रिंग जैसी लचीलापन और सहारा प्रदान करते हैं।
मंगल पर सूर्य का प्रकाश बहुत कम मिलता है और धूल के बवंडर सोलर पैनल को ढंक लेते हैं, जिसके कारण अतीत में अपॉर्चुनिटी और चीन का झुरोंग (Zhurong) रोवर हमेशा के लिए बंद हो गए थे। इसलिए परसेवरेंस में मल्टी-मिशन रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (MMRTG) लगाया गया है। इस उपकरण का वजन 45 किलोग्राम है और इसमें 4.8 किलोग्राम प्लूटोनियम-238 ऑक्साइड ईंधन के रूप में उपयोग होता है। प्लूटोनियम के प्राकृतिक रेडियोधर्मी क्षय (radioactive decay) के दौरान उत्पन्न होने वाली ऊष्मा का बिजली में रूपांतरण होता है। लॉन्च के समय यह लगभग 110 वॉट बिजली देता था, जो रोवर की दो रिचार्जेबल लिथियम-आयन बैटरियों को निरंतर चार्ज करती है। इस परमाणु बैटरी के कारण परसेवरेंस रात में, ठंड में या रेत के भीषण तूफानों के बीच भी बिना किसी बाधा के कार्य कर सकता है।
रोवर का कंप्यूटर रेडिएशन-हार्डन्ड (radiation-hardened) यानी अंतरिक्ष विकिरण के विरुद्ध सुरक्षित किया गया BAE Systems RAD750 सिंगल बोर्ड कंप्यूटर है। यह 133 मेगाहर्ट्ज (MHz) की गति से चलने वाले PowerPC 750 माइक्रोप्रोसेसर पर कार्य करता है। इसमें 128 मेगाबाइट की वोलेटाइल डीरैम (DRAM) और 4 गीगाबाइट की नैंड (NAND) फ्लैश मेमोरी अलग कार्ड पर दी गई है। यह पूरी प्रणाली C भाषा में लिखे गए VxWorks ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलती है। पृथ्वी के साथ संपर्क साधने के लिए रोवर के पास तीन एंटेना हैं, जिसमें मुख्य अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) एंटेना मंगल की कक्षा में घूम रहे सैटेलाइट के माध्यम से 2 मेगाबिट प्रति सेकंड की गति से डेटा भेज सकता है।
सैंपल कैशिंग सिस्टम: अंतरिक्ष इतिहास की सबसे जटिल मैकेनिज्म
परसेवरेंस की सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसकी नमूना एकत्र करने वाली प्रणाली है। रोवर के अगले हिस्से में 2.1 मीटर (6 फुट 11 इंच) लंबा मजबूत रोबोटिक हाथ लगा हुआ है। इस हाथ के सिरे पर अत्यंत सटीक ड्रिल मशीन है, जो मंगल की चट्टानों को खोदकर चॉक जैसी पतली लंबी बेलनाकार कोर (core) बाहर निकालती है।
रोवर के निचले हिस्से में एडेप्टिव कैशिंग असेंबली (ACA) स्थित है, जिसमें एक और छोटा सेकेंडरी रोबोटिक हाथ छिपा है जिसे सैंपल हैंडलिंग असेंबली (SHA) कहा जाता है। यह छोटा हाथ ड्रिल किए गए नमूनों को अंदर खींचकर विभिन्न स्टेशनों तक ले जाता है, जहाँ उनका आकार मापा जाता है, उनकी तस्वीरें ली जाती हैं और अंत में उन्हें टाइटेनियम की कीटाणुरहित ट्यूब में वायुरोधी (हवाचूस्त) तरीके से सील कर दिया जाता है। चूंकि यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत संकरी जगह में बहुत सटीकता के साथ पूरी करनी होती है, इसलिए नासा के इंजीनियरों ने इसे अंतरिक्ष उड़ान के लिए अब तक बनाई गई सबसे जटिल और अत्याधुनिक मशीनरी माना है। इन ट्यूबों को भविष्य के संयुक्त नासा-ईएसए मिशन द्वारा पृथ्वी पर लाया जाएगा।
- ड्रिलिंगरोबोटिक हाथ मंगल के चट्टान से बेलनाकार कोर निकालता है।
- हैंडलिंगसेकेंडरी हाथ नमूने को अंदर खींचकर विभिन्न स्टेशनों पर ले जाता है।
- सीलिंगनमूने को टाइटेनियम ट्यूब में हवाचूस्त तरीके से सील किया जाता है।
सात प्राथमिक वैज्ञानिक उपकरण और इनजेन्यूइटी हेलीकॉप्टर
नासा ने पर्सिवरेंस के लिए प्राप्त लगभग 60 प्रस्तावों में से सात उन्नत उपकरणों का चयन किया था। इनमें सुपरकैम (SuperCam) और मास्टकैम-जेड (Mastcam-Z) रोवर के सिर जैसे मास्ट पर लगे हैं, जो दूर से ही चट्टानों का रासायनिक विश्लेषण करते हैं और ज़ूम करने में सक्षम त्रि-आयामी पैनोरमिक तस्वीरें लेते हैं। रोबोटिक हाथ पर दो अत्यंत संवेदनशील उपकरण लगाए गए हैं: पिक्सेल (PIXL), जो एक्स-रे फ्लोरोसेंस स्पेक्ट्रोमीटर के माध्यम से सतह पर मौजूद सूक्ष्म तत्वों की पहचान करता है; और शर्लोक (SHERLOC), जो यूवी लेज़र और रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी की मदद से खनिजों और कार्बनिक अणुओं की खोज करता है।

रोवर के निचले हिस्से में नॉर्वे के रक्षा अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित रिमफैक्स (RIMFAX) नामक ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार लगाया गया है। यह रडार जमीन में 10 मीटर (33 फीट) की गहराई तक सिग्नल भेजकर चट्टानों की आंतरिक संरचना, दबे हुए उल्कापिंडों और संभावित खारे पानी की परतों की जांच कर सकता है। मौसम की जांच के लिए मेडा (MEDA) नामक सेंसर पैकेज लगाया गया है, जो मंगल की हवा की गति, दिशा, दबाव, तापमान और धूल के कणों की निरंतर निगरानी करता है। रोवर पर 19 कैमरे और 2 माइक्रोफोन लगे हैं, जिसकी बदौलत मानवता ने पहली बार मंगल की वास्तविक हवा और वातावरण की आवाज़ सुनी है।
मानव मिशन की तैयारी के हिस्से के रूप में रोवर में मोक्सी (MOXIE) नामक एक अनूठा उपकरण भेजा गया था। मोक्सी ने मंगल के वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन बनाने का प्रयोग सफलतापूर्वक पूरा किया। उसने अपने पहले एक घंटे के परीक्षण में 5.37 ग्राम ऑक्सीजन बनाई और पूरे अभियान के दौरान कुल 122 ग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन किया। यह तकनीक भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सांस लेने और वापसी की यात्रा के रॉकेट के लिए ईंधन बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। इसके अलावा, रोवर के पेट में इनजेन्यूइटी (Ingenuity) नामक एक छोटा प्रायोगिक हेलीकॉप्टर भी ले जाया गया था, जिसने किसी अन्य ग्रह पर नियंत्रित उड़ान भरकर इतिहास रच दिया।
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अब तक की खोजें और जेज़ेरो क्रेटर का भौगोलिक सत्य
जेज़ेरो क्रेटर का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि अरबों साल पहले वहाँ एक विशाल झील और नेरेत्वा (Neretva) नदी का डेल्टा यानी मुहाने का त्रिकोणीय क्षेत्र था। वैज्ञानिकों का अनुमान था कि यहाँ केवल गाद के जमाव से बनी तलछटी चट्टानें (sedimentary rocks) ही मिलेंगी। लेकिन पर्सिवरेंस के शोधों ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि जेज़ेरो क्रेटर की सतह पर ज्वालामुखी प्रक्रिया से बनी आग्नेय चट्टानें (igneous rocks) भी प्रचुर मात्रा में हैं, जो अतीत में पानी के साथ प्रतिक्रिया कर चुकी थीं।
'वाइल्डकैट रिज' (Wildcat Ridge) नामक चट्टान के विश्लेषण के दौरान पता चला कि यह प्राचीन झील के शांत पानी में बनी गाद वाली चट्टान है, जो प्राचीन सूक्ष्मजीवों के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए सबसे आदर्श स्थिति प्रदान करती है। इसके अलावा, जुलाई 2024 में रोवर ने 'चेयावा फॉल्स' (Cheyava Falls) नामक चट्टान में संभावित जैविक संकेत (biosignatures) खोजे थे। शर्लोक उपकरण द्वारा चेयावा फॉल्स और अपोलो टेम्पल चट्टानों में कार्बन से समृद्ध मैक्रोमोलेक्यूल्स की उच्च सांद्रता देखी गई थी, हालाँकि वे जैविक प्रक्रिया से ही बने हैं या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि नमूने पृथ्वी पर आने के बाद ही हो सकेगी।
पर्सिवरेंस के माइक्रोफोन डेटा ने दर्शाया है कि मंगल के पतले वायुमंडल में ध्वनि की गति पृथ्वी की तुलना में धीमी है और ध्वनि की तीव्रता भी काफी कम सुनाई देती है। रिमफैक्स रडार के डेटा ने पुष्टि की है कि डेल्टा बनने से पहले गड्ढे की सतह का कटाव हुआ था और फिर धीमी गति वाली झील में गाद जमा हुई थी। रोवर वर्तमान में जेज़ेरो क्रेटर के उत्तरी किनारे की ओर बढ़ रहा है, जहाँ वह अरबों साल पहले उल्कापिंड की टक्कर से गहराई से बाहर फेंकी गई प्राचीन चट्टानों का अध्ययन कर रहा है। मंगल पर मानव कदम पड़ने से पहले पर्सिवरेंस वहाँ की नींव मजबूत कर रहा है।



