अंतरिक्ष के अंधकार में जन्म लेते तारों और ग्रहों की तस्वीर कैद करता रेडियो नेटवर्क ALMA
चिली के अटाकामा मरुस्थल में 5,000 मीटर की ऊँचाई पर स्थापित 66 एंटेना वाली ALMA वेधशाला इंटरफेरोमेट्री तकनीक की मदद से शुरुआती ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझा रही है।

दूर के अंतरिक्ष से आने वाले अत्यंत सूक्ष्म संकेतों को पकड़ने के लिए मानवता द्वारा बनाया गया सबसे जटिल और महंगा जमीनी खगोलीय उपकरण यानी ALMA (Atacama Large Millimeter/submillimeter Array) है। दक्षिण अमेरिका के चिली देश में स्थित उत्तरी अटाकामा मरुस्थल में ५,००० मीटर (१६,००० फीट) की ऊँचाई पर चाजनांतोर पठार (Chajnantor plateau) पर यह अंतरराष्ट्रीय वेधशाला स्थापित है। यहाँ ६६ विशाल रेडियो टेलिस्कोप एंटेना एक साथ काम करके मिलीमीटर और सबमिलीमीटर तरंगदैर्ध्य (millimeter and submillimeter wavelengths) पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (electromagnetic radiation) ग्रहण करते हैं। यह भव्य सुविधा यूरोप, यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और चिली के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से तैयार की गई है, जिसका कुल खर्च लगभग $१.४ से $१.५ अरब (US$ 1.4 to 1.5 billion) हुआ है।
ब्रह्मांड के प्रारंभिक स्टेलिफेरस युग (Stelliferous era) में तारों के जन्म से लेकर स्थानीय तारा और ग्रहों के निर्माण की प्रक्रिया का सूक्ष्म चित्रण प्राप्त करने में ALMA अभूतपूर्व साबित हुआ है। इस रेडियो नेटवर्क का वैज्ञानिक निरीक्षण कार्य २०११ के उत्तरार्ध में शुरू हुआ था और ३ अक्टूबर २०११ के रोज़ इसकी पहली तस्वीरें जारी की गईं। मार्च २०१३ से यह विशाल टेलीस्कोप अरे पूरी तरह से कार्यरत है। सिंगल-डिश टेलीस्कोप जैसे कि James Clerk Maxwell Telescope या पुराने इंटरफेरोमीटर नेटवर्क जैसे कि Submillimeter Array या IRAM Plateau de Bure सुविधा की तुलना में ALMA श्रेष्ठ संवेदनशीलता और उच्च रिज़ॉल्यूशन (resolution) प्रदान करता है।
એન્ટેનાની સંખ્યા
चाज्नांतरो प्लेटो: क्यों यह विषम स्थल चुना गया?
रेडियो खगोलीय विज्ञान में मिलीमीटर और सबमिलीमीटर तरंगें अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, परंतु पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद नमी और वाष्प इन संकेतों को सोख लेती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए ALMA को पृथ्वी पर सबसे शुष्क और ऊंचे स्थानों में से एक ऐसे चाजनांतोर पठार पर स्थापित किया गया है। यह स्थान Llano de Chajnantor ऑब्जर्वेटरी और APEX (Atacama Pathfinder Experiment) के नज़दीक स्थित है। ऊंचाई और अत्यंत कम नमी के कारण वायुमंडल द्वारा होने वाला संकेत का कमज़ोर पड़ना यानी सिग्नल एटेन्यूएशन (signal attenuation) घट जाता है और नॉइज़ (noise) कम होता है।
ALMA के आसपास का क्षेत्र अत्यंत निर्जन और पहाड़ी है। यह विषम स्थान खगोलविदों को पृथ्वी के वायुमंडल के काले पक्ष से दूर रखकर ब्रह्मांड की गहराइयों से आने वाली 0.32 से 3.6 मिलीमीटर (31 से 1000 GHz फ्रीक्वेंसी) की तरंगदैर्ध्य वाली तरंगों को स्पष्ट रूप से पकड़ने का अवसर देता है।
- १. तरंगों का ग्रहणविश्वभर के एंटेना डिश अंतरिक्ष से आने वाले मिलीमीटर और सबमिलीमीटर तरंगों को एकत्र करते हैं।
- २. ट्रांसपोर्टर पोजीशनिंगविशेष २८-व्हील ट्रांसपोर्टर वाहन एंटेना को १५० मीटर से १६ किमी के बीच के अंतर पर व्यवस्थित करते हैं।
- ३. सिग्नल लिंकिंगतीन या उससे अधिक एंटेना से मिलने वाले डेटा को एकसाथ जोड़कर सिंगल डिश की कमियों को दूर किया जाता है।
- ४. रेजोल्यूशन इमेजिंगसभी एंटेना के डेटा का प्रोसेसिंग करके अत्यंत उच्च रेजोल्यूशन वाली खगोलीय तस्वीर तैयार की जाती है।
अरे आर्किटेक्चर और इंटरफेरोमेट्री सिद्धांत
ALMA की विशिष्ट शक्ति का मुख्य रहस्य इसकी इंटरफेरोमीटर (interferometer) तकनीक और एंटीना की बड़ी संख्या है। मुख्य ऐरे में 50 विशाल 12-मीटर व्यास वाले एंटीना हैं, जिनमें से 25 एंटीना उत्तरी अमेरिका के भागीदारों और 25 एंटीना यूरोपीय भागीदारों द्वारा प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा पूर्वी एशियाई देशों के योगदान से एक अतिरिक्त ऐरे बनाया गया है जिसे अटाकामा कॉम्पैक्ट ऐरे (Atacama Compact Array - ACA) कहा जाता है। ACA में चार 12-मीटर व्यास के और बारह 7-मीटर व्यास के एंटीना शामिल हैं।
छोटे एंटीना का उपयोग करके ACA दी गई फ्रीक्वेंसी (frequency) पर बड़ा फील्ड ऑफ व्यू (field of view) कैप्चर कर सकता है। जब एंटीना को एक-दूसरे के करीब व्यवस्थित किया जाता है, तब वे विशाल कोणीय क्षेत्र वाले आकाशीय स्रोतों की तस्वीर लेने में सक्षम बनते हैं। ACA मुख्य ऐरे के साथ मिलकर काम करता है और नेटवर्क की वाइड-फील्ड इमेजिंग क्षमता में भारी वृद्धि करता है। इन एंटीना को रेगिस्तान की प्लेटों पर 150 मीटर से लेकर 16 किलोमीटर तक की दूरी तक ले जाया जा सकता है, जिससे ALMA को एक शक्तिशाली वेरिएबल ज़ूम (variable zoom) मिलता है।
| पैरामीटर (Parameter) | विवरण (Detail) |
|---|---|
| स्थान और ऊंचाई | चाजनांतोर प्लेटो, अटाकामा रेगिस्तान, चिली (५,००० मीटर ऊंचाई) |
| कुल एंटेना संख्या | ६६ एंटेना (५० मुख्य १२-मीटर डिश, १६ ACA एंटेना) |
| ऑपरेटिंग तरंगदैर्ध्य | ३.६ से ०.३२ मिलीमीटर (३१ से १००० GHz फ्रिक्वेंसी) |
| अरे ज़ूम क्षेत्र | १५० मीटर से १६ किलोमीटर तक |
| कुल प्रोजेक्ट लागत | US$ १.४ से १.५ अरब (डिज़ाइन और निर्माण) |
इंटरफेरोमेट्री प्रक्रिया में कई टेलीस्कोप से आने वाले संकेतों को एक साथ प्राप्त करके इस तरह प्रोसेस किया जाता है मानो वे किलोमीटरों बड़े एक ही विशालकाय डिश हों। खगोलशास्त्रियों और इंजीनियरों ने 2009 के अंत में 5,000 मीटर की ऊंचाई पर पहली बार तीन एंटीना को सफलतापूर्वक एक-दूसरे के साथ जोड़ा था। केवल दो एंटीना के उपयोग से होने वाली त्रुटियों को तीन एंटीना संयोजन द्वारा सुधारा जा सका था, जिसने उच्च रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग का मार्ग प्रशस्त किया था।

28-पहियों वाले विशालकाय ट्रांसपोर्टर और निर्माण का साहस
ALMA का इतिहास तीन बड़े खगोलीय प्रोजेक्ट्स में निहित है: संयुक्त राज्य अमेरिका का मिलीमीटर ऐरे (MMA), यूरोप का लार्ज सदर्न ऐरे (LSA) और जापान का लार्ज मिलीमीटर ऐरे (LMA)। 1997 में NRAO और ESO ने MMA और LSA को मर्ज करके संयुक्त प्रोजेक्ट बनाने की सहमति दी। मार्च 1999 में इस प्रोजेक्ट का नाम 'अटाकामा लार्ज मिलीमीटर ऐरे' (ALMA) रखा गया। स्पेनिश भाषा में आल्मा का अर्थ 'आत्मा' और अरबी भाषा में 'ज्ञानी' होता है। 25 फरवरी 2003 को यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच अंतिम समझौता हुआ, और 14 सितंबर 2004 को जापान के NAOJ के साथ समझौता करके एन्हांस्ड ALMA की स्थापना हुई।
115 टन वजन वाले विशाल एंटीना को 2,900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ऑपरेशंस सपोर्ट फैसिलिटी (OSF) से 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित स्थल तक पहुँचाना एक भगीरथ कार्य था। इसके लिए जर्मनी की Scheuerle Fahrzeugfabrik कंपनी द्वारा विशेष रूप से बनाए गए दो 28-पहियों वाले सेल्फ-लोडिंग हैवी ट्रांसपोर्टर वाहनों का उपयोग किया गया था। ये वाहन 10 मीटर चौड़े, 20 मीटर लंबे और 6 मीटर ऊंचे हैं, और उनका वजन 130 टन है। इनमें पावर के लिए 500 किलोवाट के ट्विन टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन लगे हैं।
पहाड़ी क्षेत्र की पतली हवा में वाहन चालक को सांस लेने में मदद करने के लिए ट्रांसपोर्टर की ड्राइवर सीट पर ऑक्सीजन टैंक रखने की विशेष व्यवस्था की गई थी। ये वाहन एंटीना को अति सटीकता के साथ पैड्स पर स्थापित करते हैं। जुलाई 2007 में पहले वाहन का परीक्षण हुआ था और 15 फरवरी 2008 को दोनों ट्रांसपोर्टर चिली पहुंचा दिए गए थे। 28 जुलाई 2011 को 16वां एंटीना (पहला यूरोपीय एंटीना) स्थल पर पहुंचते ही विज्ञान अवलोकन शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या पूरी हो गई थी। अक्टूबर 2012 तक 43 एंटीना स्थापित कर दिए गए थे।

मुख्य विनिर्देश और भागीदारों का योगदान
ALMA के निर्माण में विश्व की अग्रणी कंपनियों ने भाग लिया था। General Dynamics C4 Systems ने 25 एंटीना का निर्माण किया, जबकि यूरोपीय निर्माता Thales Alenia Space ने अन्य 25 मुख्य एंटीना सप्लाई किए, जो भूमि आधारित खगोल विज्ञान के इतिहास में सबसे बड़ा यूरोपीय व्यावसायिक अनुबंध था। जापान की Mitsubishi Electric कंपनी ने NAOJ के 16 एंटीना का असेंबलिंग किया था। दिसंबर 2008 से सितंबर 2013 के दौरान सभी एंटीना स्थल पर पहुंचा दिए गए थे।
अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में ALMA सबसे महंगा जमीनी टेलीस्कोप प्रोजेक्ट है, हालांकि Hubble और James Webb जैसे स्पेस टेलीस्कोप प्रोजेक्ट्स की लागत इससे कहीं अधिक थी। ALMA का संचालन ESO, NSF, NRC कनाडा, NAOJ जापान, ASIAA ताइवान और चिली गणराज्य की अंतरराष्ट्रीय साझेदारी द्वारा किया जाता है।
विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोज: तारे, ब्लैक होल और ग्रहों का निर्माण
अपने प्रारंभिक परीक्षण चरण में ही ALMA ने अपनी क्षमता साबित कर दी थी। Antennae Galaxies नामक टकराते गैलेक्सी युगल की ALMA द्वारा ली गई सबमिलीमीटर तस्वीर ने ठंडे और घने गैस के बादलों को दर्शाया था, जहां नए तारों का जन्म हो रहा है। दृश्य प्रकाश (visible light) में ये धूल भरे बादल दिखाई नहीं देते हैं।
11 अगस्त 2014 को वैज्ञानिकों ने ALMA का उपयोग करके C/2012 F6 (Lemmon) और C/2012 S1 (ISON) धूमकेतुओं के कोमा के भीतर HCN, HNC, H2CO और धूल के वितरण का विस्तृत अध्ययन जारी किया था। उसी वर्ष HL Tauri नामक युवा तारे के चारों ओर प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क (protoplanetary disc) की तस्वीर ली गई, जिसमें चमकीले रिंग्स और गैप दिखाई दे रहे थे। इस खोज ने ग्रहों के निर्माण के पुराने सिद्धांतों को चुनौती दी क्योंकि केवल 1,000,000 साल पुरानी प्रणाली में ग्रह निर्माण की अपेक्षा नहीं थी। 2022 में ALMA ने exoALMA प्रोग्राम शुरू किया, जो 15 प्रोटोप्लेनेटरी डिस्क सिस्टम का गहरा अध्ययन करके नए बन रहे बहिर्ग्रहों (exoplanets) की खोज करता है।
इसके अलावा, १२ अरब वर्ष पहले बने तीव्र गर्म गैलेक्सी क्लस्टर SPT2349-56 की खोज में ALMA ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। २०१९ में जारी की गई मानव इतिहास की पहली ब्लैक होल की सीधी तस्वीर प्राप्त करने वाले Event Horizon Telescope प्रोजेक्ट में भी ALMA ने मुख्य भूमिका निभाई थी। शुक्र ग्रह के वातावरण में जैविक संकेत माने जाने वाले फॉस्फीन (phosphine) गैस की खोज के दावे में भी ALMA का डेटा इस्तेमाल किया गया था, जो विषय फिलहाल अधिक माप का इंतजार कर रहा है। ALMA आज ब्रह्मांड के अंधकारमय क्षेत्रों को प्रकाशित करके खगोल शास्त्र में एक नई क्रांति ला रहा है।


