दक्षिण कोरिया का 'जंग बोगो N' मिशन: परमाणु शक्ति से लैस सबमरीन तकनीक का नया अध्याय
दक्षिण कोरिया ने 2027 से अपनी पहली स्वदेशी परमाणु-संचालित सबमरीन बनाने की योजना को मंजूरी दी है, जो समुद्र में उसकी रणनीतिक क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देगी।

दक्षिण कोरिया की रक्षा क्षमता में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। देश की स्टेट आर्म्स एजेंसी की समीक्षा समिति ने दक्षिण कोरिया के पहले परमाणु-संचालित पनडुब्बी (nuclear-powered submarine) कार्यक्रम के लिए मूल योजना को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट को 'जंग बोगो N' (Jang Bogo N) नाम दिया गया है, जो दक्षिण कोरिया की नौसेना की शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा। यह निर्णय रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम एडमिनिस्ट्रेशन (DAPA) द्वारा लिया गया है, जो 2027 से आधिकारिक रूप से कार्यरत होगा।

परमाणु-संचालित पनडुब्बी ऐसी पनडुब्बी है जो परमाणु रिएक्टर (nuclear reactor) द्वारा संचालित होती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वह परमाणु हथियारों से लैस है, बल्कि उसकी ऊर्जा का स्रोत परमाणु विखंडन है। पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में इस तकनीक के फायदे अनगिनत हैं। डीजल पनडुब्बी को अपनी बैटरी रिचार्ज करने के लिए बार-बार समुद्र की सतह पर आना पड़ता है क्योंकि उसे ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। जबकि परमाणु ऊर्जा हवा पर निर्भर नहीं है, जो पनडुब्बी को महीनों तक पानी के अंदर रहने की क्षमता देती है।
दक्षिण कोरिया की इस योजना के अनुसार, पहली पनडुब्बी 2030 के दशक के मध्य में लॉन्च की जाएगी और 2030 के दशक के अंत तक इसे नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन (preliminary feasibility study) से छूट दी गई है, जो सामान्यतः हथियारों के अधिग्रहण के लिए आवश्यक होता है। इस छूट के कारण सरकार निर्माण की प्रक्रिया को तेज कर सकेगी। DAPA के अधिकारियों के अनुसार, अत्यंत गुप्त प्रोजेक्ट्स के लिए रक्षा मंत्री या DAPA प्रमुख ऐसी छूट का अनुरोध कर सकते हैं।
- परमाणु विखंडनसबमरीन के अंदर स्थित परमाणु रिएक्टर यूरेनियम के विखंडन द्वारा अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करता है।
- भाप का उत्पादनइस गर्मी का उपयोग पानी को गर्म करके उच्च दबाव वाली भाप बनाने के लिए किया जाता है।
- टर्बाइन का घूमनाउच्च दबाव वाली भाप स्टीम टर्बाइन को घुमाती है, जो यांत्रिक ऊर्जा उत्पन्न करती है।
- प्रोपल्शन और बिजलीटर्बाइन सबमरीन के प्रोपेलर को घुमाती है और साथ ही जहाज की अन्य प्रणालियों के लिए बिजली भी बनाती है।
इस पनडुब्बी की कार्यपद्धति समझना दिलचस्प है। इसमें एक छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactor - SMR) स्थापित किया जाएगा। यह रिएक्टर गर्मी उत्पन्न करता है, जिसका उपयोग भाप बनाने के लिए किया जाता है। यह भाप स्टीम टर्बाइन (steam turbine) को घुमाती है, जो पनडुब्बी के प्रोपेलर को गति देती है या बिजली उत्पन्न करती है। परमाणु रिएक्टर इतनी अधिक ऊर्जा पैदा करता है कि पनडुब्बी लंबे समय तक उच्च गति से यात्रा कर सकती है। इसकी रेंज व्यावहारिक रूप से असीमित होती है, क्योंकि इसे दशकों तक ईंधन भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
- ऊर्जा उत्पादनछोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) में परमाणु विखंडन द्वारा गर्मी उत्पन्न होती है।
- भाप निर्माणइस गर्मी का उपयोग करके पानी से भाप बनाई जाती है।
- गति और बिजलीभाप स्टीम टर्बाइन को घुमाती है, जो प्रोपेलर को गति देती है और सबमरीन के लिए बिजली पैदा करती है।
दक्षिण कोरिया ने इस पनडुब्बी के लिए अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है। सियोल ने 20 प्रतिशत से कम संवर्धन वाले लो-एनरिच्ड यूरेनियम (Low-Enriched Uranium - LEU) द्वारा संचालित पनडुब्बी बनाने के लिए अमेरिका की सहमति प्राप्त की है। यूरेनियम का संवर्धन (enrichment) वह प्रक्रिया है जिसमें यूरेनियम-235 के आइसोटोप की मात्रा बढ़ाई जाती है ताकि वह ईंधन के रूप में काम कर सके। अधिकांश नागरिक परमाणु भट्टियों में LEU का उपयोग होता है, जो परमाणु प्रसार (nuclear proliferation) की चिंताओं को कम करता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रोजेक्ट का नाम | Jang Bogo N |
| आधिकारिक शुरुआत | 2027 |
| पहली सबमरीन लॉन्च | 2030 के दशक के मध्य में |
| अनुमानित वजन | 8,000 टन |
| ईंधन का प्रकार | LEU (20% से कम संवर्धित) |
| कुल अनुमानित लागत | 28.9 ट्रिलियन वोन ($21.3 अरब) |
रणनीतिक दृष्टिकोण से, यह परियोजना उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल खतरों के खिलाफ सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। DAPA के अनुसार, यह पनडुब्बी देश की 'किल चेन' (Kill Chain) प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक सिस्टम का मुख्य हिस्सा बनेगी। किल चेन एक ऐसी रक्षा प्रणाली है जिसे दुश्मन के हमले से पहले ही उसके मिसाइल लॉन्चरों को खोजकर नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। समुद्र की गहराई में छिपी परमाणु पनडुब्बी दुश्मन के लिए अदृश्य रहकर कभी भी जवाबी हमला कर सकती है।
मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि दक्षिण कोरिया का लक्ष्य कम से कम तीन 8,000 टन की परमाणु संचालित पनडुब्बियां बनाने का है। इस पूरे कार्यक्रम की अनुमानित लागत 28.9 ट्रिलियन वॉन (लगभग 21.3 अरब डॉलर) मानी जा रही है। हालांकि, कुल बजट अभी तक आधिकारिक तौर पर अंतिम रूप नहीं दिया गया है। DAPA अगले साल की पहली छमाही में ओपन बिडिंग के माध्यम से पनडुब्बी निर्माता का चयन करने और 2027 के अंत तक औपचारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहा है।
परमाणु पनडुब्बी न केवल ऊर्जा, बल्कि चालक दल के लिए जीवन रक्षक सुविधाएं भी प्रदान करती है। यह समुद्र के पानी से इलेक्ट्रोलिसिस (electrolysis) द्वारा ऑक्सीजन और डिसेलिनेशन (desalination) द्वारा पीने का शुद्ध पानी बना सकती है। इसका मतलब यह है कि पनडुब्बी पानी के अंदर कितने समय तक रहेगी, इसकी सीमा केवल चालक दल के लिए भोजन की आपूर्ति पर निर्भर करती है। हालांकि, इसकी कुछ कमजोरियां भी हैं। रिएक्टर को ठंडा रखने के लिए लगातार समुद्र के पानी का उपयोग करना पड़ता है, जो गर्म पानी का एक निशान (thermal wake) छोड़ता है। इस निशान को थर्मल इमेजिंग सिस्टम द्वारा खोजा जा सकता है।
दक्षिण कोरियाई नौसेना के इतिहास को देखें तो यह एक बड़ी छलांग है। 1945 में केवल 36 पेट्रोल बोट के साथ शुरू हुई रिपब्लिक ऑफ कोरिया नेवी (ROKN) आज दुनिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं में से एक है। 1970 के दशक में 'युलगोक ऑपरेशन' (Yulgok Operation) के तहत देश ने स्वदेशी हथियारों का निर्माण शुरू किया था। 1980 के दशक में उल्सान-क्लास (Ulsan-class) फ्रिगेट और उसके बाद जर्मनी की मदद से चांग बोगो-क्लास (Chang Bogo-class) पनडुब्बी बनाकर दक्षिण कोरिया ने अपनी क्षमता साबित की है।

वैश्विक स्तर पर अभी केवल छह देशों के पास परमाणु संचालित पनडुब्बियां हैं: अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, चीन और भारत। ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया इस विशिष्ट क्लब में शामिल होने जा रहा है। यह परियोजना न केवल सैन्य शक्ति, बल्कि देश की इंजीनियरिंग और परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमता का भी प्रतीक है। विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) का उपयोग भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए भी मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

इस परियोजना के साथ समिति ने कुछ अन्य रक्षा परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इसमें कोरियन टैक्टिकल सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल-I (KTSSM-I) ब्लॉक-II शामिल है। यह मिसाइल उत्तर कोरिया की लंबी दूरी की आर्टिलरी को तेजी से निष्क्रिय करने के लिए बनाई गई है। इसके अलावा, पुराने राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर को लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के S-92A प्लस हेलीकॉप्टर से बदलने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। ये सभी कदम दक्षिण कोरिया को एक मजबूत 'ब्लू-वॉटर नेवी' (blue-water navy) बनाने की दिशा में ले जा रहे हैं।


