ब्रह्मांड के गहन रहस्यों को सुलझाता मानवजाति का सबसे बड़ा यंत्र: लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर
स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा के नीचे 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में धड़कता CERN का लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर कणों को प्रकाश की गति से टकराकर भौतिकी की नई सीमाएं अंकित कर रहा है।

लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
हमारे ब्रह्मांड की रचना कैसे हुई, द्रव्य को द्रव्यमान (mass) कहाँ से मिलता है और प्रकृति के मूलभूत नियम क्या हैं—ऐसे जटिल प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने के लिए यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (CERN) द्वारा निर्मित लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider - LHC) विश्व का सबसे बड़ा और सबसे अधिक ऊर्जा वाला पार्टिकल एक्सीलरेटर (particle accelerator) है। स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा पर जिनेवा के निकट भूमिगत 50 से 175 मीटर की गहराई में 27 किलोमीटर (26.7 किलोमीटर) की वर्तुलाकार सुरंग में यह विराट प्रयोगशाला स्थित है। 100 से अधिक देशों के 10,000 से अधिक वैज्ञानिकों, संबंधित विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं के संयुक्त सहयोग से 1998 से 2008 के दौरान इसका निर्माण किया गया था।
हैड्रॉन (hadron) यानी ऐसे सबएटॉमिक कण जो क्वार्क (quark) नामक मूलभूत कणों से बने होते हैं और मजबूत न्यूक्लियर बल द्वारा एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं, जैसे कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन। कोलाइडर (collider) ऐसा त्वरक उपकरण है जो विपरीत दिशा से आने वाले कणों के दो बीम को आमने-सामने अत्यंत तीव्र गति से टकराता है। स्थिर लक्ष्य पर कण मारकर प्रयोग करने की तुलना में आमने-सामने टक्कर कराने से सेंटर ऑफ मास एनर्जी (center of mass energy): कणों की टक्कर के दौरान प्राप्त होने वाली कुल काइनेटिक ऊर्जा काफी अधिक मिलती है। ऐसी उच्च ऊर्जा वाली टक्करों से ही क्षणभंगुर नए कण उत्पन्न होते हैं, जिनका अध्ययन करके वैज्ञानिक प्रकृति के गहन नियमों को समझ सकते हैं।
भौतिकी के अनसुलझे प्रश्न और LHC का उद्देश्य
LHC का मुख्य उद्देश्य कण भौतिकी के मूलभूत सिद्धांतों की जांच करना है। कण भौतिकी का स्टैंडर्ड मॉडल (Standard Model): पदार्थ के मूलभूत कणों और उनके बलों को समझाने वाला सिद्धांत, जो 2012 में LHC द्वारा हिग्स बोसोन (Higgs boson) नामक कण की खोज के साथ पूर्ण हुआ था। हिग्स बोसोन की खोज से साबित हुआ कि मूलभूत कणों को द्रव्यमान कैसे प्राप्त होता है। हालांकि, स्टैंडर्ड मॉडल ब्रह्मांड के सभी रहस्यों को समझा नहीं सकता है, इसलिए LHC और अधिक गहरे प्रश्नों के उत्तर खोज रहा है।
वैज्ञानिक LHC की मदद से यह जांच कर रहे हैं कि क्या स्टैंडर्ड मॉडल के सभी कणों के सुपरसिमेट्रिक भागीदार अस्तित्व रखते हैं, जिसे सुपरसिमेट्री (supersymmetry) सिद्धांत कहा जाता है। इसके अलावा स्ट्रिंग थ्योरी द्वारा भविष्यवाणी किए गए अतिरिक्त आयामों (extra dimensions) का अस्तित्व है या नहीं और उन्हें खोजा जा सकता है या नहीं, इस पर भी शोध चल रहा है। ब्रह्मांड के कुल मास-एनर्जी के 27% हिस्से को रखने वाले अदृश्य डार्क मैटर (dark matter) का वास्तविक स्वरूप क्या है, यह जानना भी LHC के प्राथमिक लक्ष्यों में से एक है।
इसके अलावा, अन्य मूलभूत प्रश्न जैसे कि क्या इलेक्ट्रोवीक बल और मजबूत न्यूक्लियर बल किसी एक ही सार्वत्रिक बल के विभिन्न रूप हैं? गुरुत्वाकर्षण बल अन्य तीन मूलभूत बलों की तुलना में इतना अधिक निर्बल क्यों है? द्रव्य (matter) और प्रति-द्रव्य (antimatter) के बीच की असमानता के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार हैं? साथ ही, ब्रह्मांड के प्रारंभिक समय में अस्तित्व में रहे क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा (quark-gluon plasma): क्वार्क और ग्लूऑन के अत्यंत गर्म तरल स्वरूप की विशेषता क्या है, इसका अध्ययन भी भारी आयनों की टक्कर के माध्यम से यहाँ किया जाता है।
कणों की महा-यात्रा: Linac4 से मुख्य रिंग तक
प्रोटॉन को मुख्य रिंग में प्रवेश कराने से पहले उनकी ऊर्जा को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के लिए श्रृंखलाबद्ध त्वरक प्रणालियों से गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत लीनियर एक्सीलरेटर Linac4 से होती है, जो हाइड्रोजन आयनों को 160 MeV (मेगा-इलेक्ट्रॉनवोल्ट) की ऊर्जा प्रदान करता है। इसके बाद ये आयन प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन बूस्टर (Proton Synchrotron Booster - PSB) में जाते हैं, जहाँ उनके इलेक्ट्रॉन को हटाकर केवल प्रोटॉन न्यूक्लियस को रखा जाता है और उनकी ऊर्जा 2 GeV (गीगा-इलेक्ट्रॉनवोल्ट) तक बढ़ाई जाती है।
- 1. Linac4 लिनियर एक्सीलरेटरहाइड्रोजन आयनों को 160 MeV तक त्वरित करके प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन बूस्टर में भेजा जाता है।
- 2. प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन बूस्टर (PSB)इलेक्ट्रॉन हटाकर केवल प्रोटॉन न्यूक्लियस रहने दिया जाता है और उसे 2 GeV तक गति दी जाती है।
- 3. प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन (PS)प्रोटॉन को और अधिक त्वरित करके उनकी ऊर्जा 26 GeV तक पहुंचाई जाती है।
- 4. सुपर प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन (SPS)मुख्य रिंग में प्रवेश कराने से पहले प्रोटॉन की ऊर्जा बढ़ाकर 450 GeV की जाती है।
- 5. LHC मुख्य रिंग20 मिनट की अवधि में कणों को उनकी अधिकतम 6.5 TeV ऊर्जा तक त्वरित कर 5 से 24 घंटे तक टकराया जाता है।

तत्पश्चात इन प्रोटॉन को प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन (Proton Synchrotron - PS) में भेजकर 26 GeV की ऊर्जा दी जाती है। वहाँ से सुपर प्रोटॉन सिंक्रोट्रॉन (Super Proton Synchrotron - SPS) में ये प्रोटॉन 450 GeV की ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इन सभी प्रारंभिक प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद प्रोटॉन को मुख्य LHC रिंग में प्रवेश कराया जाता है। मुख्य रिंग में प्रोटॉन समूहों को एकत्रित करके 20 मिनट की समयावधि में उनकी अधिकतम 6.5 TeV (टेरा-इलेक्ट्रॉनवोल्ट) ऊर्जा तक त्वरित किया जाता है, जहाँ वे 5 से 24 घंटे तक निरंतर चक्कर लगाते हैं और चार प्रतिच्छेदन बिंदुओं पर टकराते हैं।
इंजीनियरिंग का चमत्कार: मैग्नेट, क्रायोजेनिक्स और पावर
LHC की भूमिगत सुरंग 3.8 मीटर चौड़ी है और यह कंक्रीट से बनी है, जिसका निर्माण काल 1983 से 1988 का है और पहले इसका उपयोग लार्ज इलेक्ट्रॉन-पोसिट्रॉन कोलाइडर के लिए किया गया था। इस 26.7 किलोमीटर की रिंग में दो समानांतर बीमलाइन (या पाइप) स्थित हैं, जिनमें कण विपरीत दिशा में परिभ्रमण करते हैं। बीम को वृत्ताकार मार्ग पर बनाए रखने के लिए 1,232 डायपोल मैग्नेट (dipole magnet) लगाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक डायपोल मैग्नेट का वजन 35 टन है। बीम को केंद्रित (focus) करने के लिए अतिरिक्त 392 क्वाड्रुपोल मैग्नेट (quadrupole magnet) का उपयोग किया जाता है।
| विशेषता / मानदंड | तकनीकी विवरण |
|---|---|
| टनल की परिधि | 26.7 किलोमीटर (16.6 मील) |
| भूमिगत गहराई | 50 से 175 मीटर |
| डायपोल मैग्नेट की संख्या | 1,232 (प्रत्येक का वजन 35 टन) |
| चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता | 0.54 से 7.7 टेस्ला |
| कार्यकारी तापमान | 1.9 केल्विन (-271.25 °C) |
| सुपरफ्लुइड हीलियम-4 मात्रा | 96 टन |
| बिजली की खपत (मुख्य परिसर) | 120 मेगावाट (CERN कुल: 200 MW) |
| दैनिक डेटा उत्पादन | 140 टेराबाइट |
यह सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट: शून्य प्रतिरोध वाले चुंबकों को उनके कार्यशील तापमान 1.9 केल्विन (-271.25 °C) पर बनाए रखने के लिए 96 टन सुपरफ्लुइड हीलियम-4 (superfluid helium) का उपयोग किया जाता है। तांबे की कोटिंग वाले नाइओबियम-टाइटेनियम (Nb-Ti) के 470 टन तारों से बने इन चुंबकों के कारण LHC दुनिया की सबसे बड़ी क्रायोजेनिक सुविधा बन जाती है। जब प्रोटॉन 450 GeV से 6.5 TeV तक त्वरित होते हैं, तब चुंबकीय क्षेत्र 0.54 टेस्ला से बढ़कर 7.7 टेस्ला (teslas) हो जाता है।

6.5 TeV की ऊर्जा पर प्रोटॉन का लॉरेंट्ज़ फैक्टर (Lorentz factor): सापेक्षतावाद के अनुसार द्रव्यमान वृद्धि का अनुपात लगभग 6,930 होता है और वे प्रकाश की गति के 0.999999990 भाग जितनी गति से दौड़ते हैं, जो प्रकाश की गति से केवल 3.1 मीटर/सेकंड (11 किलोमीटर/घंटा) ही कम है! प्रोटॉन को 26.7 किलोमीटर की मुख्य रिंग का एक चक्कर पूरा करने में 90 माइक्रोसेकंड से भी कम समय लगता है, जिससे वे प्रति सेकंड 11,245 चक्कर लगाते हैं। बीम में प्रोटॉन लगातार बहने के बजाय 2,808 बंच (bunches) में विभाजित होते हैं, और प्रत्येक बंच में 115 अरब प्रोटॉन होते हैं। ये बंच हर 25 नैनोसेकंड में टकराते हैं, जिससे प्रति सेकंड 40 MHz की दर से बंच टक्कर होती है।
LHC के संचालन के लिए CERN फ्रेंच इलेक्ट्रिकल ग्रिड से लगभग 200 मेगावाट (MW) बिजली खींचता है, जो जिनेवा शहर की बिजली खपत के तीसरे हिस्से के बराबर है। इसमें से कणों के त्वरक और डिटेक्टर लगभग 120 MW बिजली का उपयोग करते हैं। इन प्रयोगों से प्रतिदिन 140 टेराबाइट (TB) डेटा उत्पन्न होता है।
टक्कर की ऊर्जा, डिटेक्टर और वैश्विक नेटवर्क
LHC की पहली टक्कर 2010 में प्रति बीम 3.5 TeV ऊर्जा के साथ प्राप्त हुई थी। 2013 से 2015 के बीच इसे बंद रखकर अपग्रेड किया गया, जिससे प्रति बीम ऊर्जा 6.5 TeV (कुल टक्कर ऊर्जा 13.0 TeV) तक पहुंच गई। 2018 के अंत में इसे रखरखाव के लिए फिर से बंद किया गया और अप्रैल 2022 में इसे फिर से खोला गया। मुख्य रूप से प्रोटॉन-प्रोटॉन टक्कर के अलावा, वर्ष में लगभग एक महीना लेड (सीसा) के भारी आयनों की टक्कर कराई जाती है, जिसमें प्रति न्यूक्लियॉन 2.3 TeV (या प्रति आयन 522 TeV) की विशाल ऊर्जा उत्पन्न होती है।
LHC के चार प्रतिच्छेदन बिंदुओं पर बड़े भूमिगत कक्षों में 9 डिटेक्टर (detector): कणों की उपस्थिति दर्ज करने वाले उपकरण स्थापित किए गए हैं। ATLAS और CMS दो बड़े सामान्य उद्देश्य वाले डिटेक्टर हैं जिन्होंने हिग्स बोसोन की खोज की थी। ALICE और LHCb विशिष्ट शोध के लिए हैं, जबकि TOTEM, MoEDAL, LHCf, SND और FASER छोटे और विशेष शोध के लिए डिटेक्टर हैं। ALICE डिटेक्टर में 2010 में पहली बार क्वार्क-ग्लूऑन प्लाज्मा और 2012 में जेट क्वेंचिंग (jet quenching) घटना की पुष्टि की गई थी।
इन प्रयोगों से प्राप्त वार्षिक 200 पेटाबाइट जितना विशाल डेटा और सिमुलेशन प्रोसेस करने के लिए 'LHC कंप्यूटिंग ग्रिड' (LHC Computing Grid) बनाई गई है। यह विश्वव्यापी नेटवर्क 35 से 40 से अधिक देशों के 170 से अधिक कंप्यूटिंग सेंटरों को हाई-स्पीड फाइबर ऑप्टिक्स से जोड़ता है। इसके अलावा, कणों के मार्ग का सिमुलेशन करने के लिए 'LHC@home' नामक एक सिटीजन साइंस प्रोजेक्ट भी चलाया जाता है, जिसमें दुनिया का कोई भी नागरिक अपने कंप्यूटर का खाली समय देकर इस महान वैज्ञानिक क्रांति में भागीदार बन सकता है।


