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एमआरआई तकनीक: चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों द्वारा मानव शरीर की आंतरिक संरचना की मैपिंग

क्वांटम भौतिकी और चिकित्सा विज्ञान का अनूठा संगम है एमआरआई। बिना किसी हानिकारक विकिरण के शरीर के कोमल अंगों की अत्यंत स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त करने वाली इस तकनीक की विस्तृत व्याख्या।

आवतीकाल AI डेस्क31 अक्टूबर 2026 · 5 मिनट का पाठ
बाहर पार्क किए गए एक सफेद ट्रेलर में स्थापित मोबाइल एमआरआई यूनिट, जो दूरदराज के इलाकों तक आधुनिक चिकित्सा निदान पहुंचाती है।
बाहर पार्क किए गए एक सफेद ट्रेलर में स्थापित मोबाइल एमआरआई यूनिट, जो दूरदराज के इलाकों तक आधुनिक चिकित्सा निदान पहुंचाती है।
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मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging - MRI) रेडियोलॉजी के क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली एक अत्याधुनिक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है, जो शरीर के आंतरिक अंगों और शारीरिक प्रक्रियाओं की अत्यंत स्पष्ट छवियां उत्पन्न करती है। यह सिस्टम शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field), मैग्नेटिक फील्ड ग्रेडिएंट और रेडियो तरंगों का उपयोग करके मानव शरीर के अंगों के चित्र तैयार करता है।

एमआरआई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक्स-रे या हानिकारक आयनाइजिंग विकिरणों (ionizing radiation) का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता है। यह बात इसे कंप्यूटेड टोमोग्राफी (Computed Tomography - CT) और पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (Positron Emission Tomography - PET) स्कैन से पूरी तरह अलग करती है। मूल रूप से एमआरआई, न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (Nuclear Magnetic Resonance - NMR) का एक मेडिकल एप्लीकेशन है।

1970 के दशक की शुरुआत में आर. दमाडियन, सी.एफ. हेज़लवुड और डी.सी. चांग नामक वैज्ञानिकों ने साबित किया कि एनएमआर रिलैक्सेशन टाइम का उपयोग करके शरीर में कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है। उसके कुछ समय बाद ही पी.सी. लाउटरबर ने 2D समतल में इमेज बनाने के लिए मैग्नेटिक फील्ड ग्रेडिएंट का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा था।

शुरुआत में इस तकनीक को न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (NMRI) कहा जाता था। लेकिन 'न्यूक्लियर' शब्द से आम लोगों में परमाणु बम या विकिरण का डर न फैले, इसलिए बाद में उस शब्द को हटाकर केवल 'एमआरआई' नाम रखा गया। आज के समय में दुनिया भर के अस्पतालों में लगभग 50,000 एमआरआई स्कैनर उपयोग में हैं।

एमआरआई का मूल सिद्धांत मानव शरीर में मौजूद पानी और वसा के अणुओं पर आधारित है। मानव शरीर में हाइड्रोजन परमाणु प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिनमें केवल एक प्रोटॉन (proton) होता है। ये प्रोटॉन एक छोटे चुंबक की तरह व्यवहार करते हैं। जब मरीज को एमआरआई स्कैनर में रखा जाता है, तब स्कैनर का मुख्य चुंबक एक मजबूत और एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (B0) बनाता है, जिससे प्रोटॉन चुंबकीय रेखा के साथ एक ही दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं।

एमआरआई के भौतिकी और सिद्धांतों को समझाने वाला शैक्षिक इन्फोग्राफिक।
एमआरआई के भौतिकी और सिद्धांतों को समझाने वाला शैक्षिक इन्फोग्राफिक। (Shivani Mattikalli/The Quantum Atlas, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

इसके बाद, उपयुक्त रेजोनेंस फ्रीक्वेंसी पर रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency - RF) पल्स देते समय ये प्रोटॉन ऊर्जा सोख लेते हैं और उनकी चुंबकीय दिशा 90 डिग्री तक झुक जाती है। आरएफ पल्स बंद होते ही प्रोटॉन अपनी मूल संतुलन स्थिति में वापस लौटने लगते हैं और इस प्रक्रिया के दौरान वे रेडियो तरंगों के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। पास में रखे एंटीना या रिसीविंग कॉइल्स द्वारा इन सिग्नलों को पकड़ लिया जाता है।

एमआरआई स्कैनिंग प्रक्रिया के चरण-दर-चरण चरण
  1. 1. स्थिर चुंबकीय क्षेत्ररोगी को शक्तिशाली मुख्य चुंबक में रखने पर शरीर के हाइड्रोजन प्रोटॉन चुंबकीय अक्ष के साथ संरेखित हो जाते हैं।
  2. 2. आरएफ पल्स प्रसारणविशिष्ट रेजोनेंस फ्रीक्वेंसी पर रेडियो तरंगें देने पर प्रोटॉन ऊर्जा अवशोषित करके अपनी दिशा बदल लेते हैं।
  3. 3. ग्रेडिएंट लोकलाइजेशनग्रेडिएंट कॉइल्स चालू करके विशिष्ट क्षेत्र के 3D स्थान का निर्धारण किया जाता है।
  4. 4. रिलैक्सेशन और सिग्नल ग्रहणआरएफ पल्स बंद होने पर प्रोटॉन मूल स्थिति में वापस आते हैं और उत्सर्जित आरएफ सिग्नल एंटीना द्वारा पकड़े जाते हैं।
  5. 5. कंप्यूटर इमेजिंगकंप्यूटर इन सिग्नलों और फेज परिवर्तनों का विश्लेषण करके शरीर के अंगों की स्पष्ट छवि तैयार करता है।

आरएफ पल्स बंद होने के बाद प्रोटॉन का अपनी संतुलन स्थिति में वापस आना रिलैक्सेशन (relaxation) कहलाता है। यह रिलैक्सेशन दो स्वतंत्र प्रक्रियाओं द्वारा होता है: T1 (T1 - स्पिन-लैटिस) और T2 (T2 - स्पिन-स्पिन)। T1 लोंगिट्यूडिनल दिशा में स्थिरता प्राप्त करने का समय है, जबकि T2 ट्रांसवर्स समतल में सिग्नल के शून्य होने का समय है। इन दोनों दरों को R1 = 1/T1 और R2 = 1/T2 के रूप में परिभाषित किया जाता है और इनका व्यवहार ब्लोच समीकरणों (Bloch equations) द्वारा निर्धारित होता है।

विभिन्न ऊतकों (tissues) में हाइड्रोजन के रासायनिक वातावरण के अनुसार T1 और T2 समय अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, मस्तिष्क का कॉर्टेक्स या वसायुक्त भाग T1-वेटेड इमेज में स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि सूजन, जलन या तरल पदार्थ T2-वेटेड इमेज में अधिक सटीक दिखाई देते हैं। स्कैनर के समय मापदंडों (TR और TE) में बदलाव करके डॉक्टर आवश्यकतानुसार इमेज कॉन्ट्रास्ट प्राप्त करते हैं।

एमआरआई स्कैनिंग में T1 और T2 वेटेड इमेज के बीच तुलना
विशेषताT1-वेटेड इमेजT2-वेटेड इमेज
मुख्य समय मापदंडरिपिटिशन टाइम (TR)इको टाइम (TE)
रिलैक्सेशन प्रकारस्पिन-लैटिस (लॉन्जिट्यूडिनल)स्पिन-स्पिन (ट्रांसवर्स)
वसा और तरल का स्वरूपवसा चमकदार, तरल अंधेरातरल/पानी चमकदार दिखाई देता है
मुख्य चिकित्सा उपयोगमस्तिष्क का कॉर्टेक्स और वसायुक्त ऊतकसूजन, जलन और व्हाइट मैटर की क्षति

एमआरआई स्कैनर के मुख्य भागों में मुख्य चुंबक (Main magnet), शिम कॉइल्स (Shim coils), ग्रेडिएंट सिस्टम (Gradient coils) और आरएफ सिस्टम शामिल हैं। ग्रेडिएंट कॉइल्स तीनों आयामों में स्थान निर्धारित करने का काम करते हैं। स्कैनिंग के दौरान ये कॉइल्स अत्यंत तेजी से चालू-बंद होते हैं, जिसके कारण मैग्नेटोस्ट्रिक्शन (magnetostriction) की वजह से एमआरआई मशीन से एक तेज विशिष्ट ध्वनि उत्पन्न होती है।

चुंबक की क्षमता टेस्ला (Tesla - T) इकाई में मापी जाती है। अधिकांश क्लिनिकल स्कैनर 1.5T क्षमता रखते हैं, लेकिन अधिक स्पष्ट इमेज के लिए 3T सिस्टम को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अनुसंधान के क्षेत्र में 9.4T, 10.5T और 11.7T तक की मशीनों का उपयोग किया जाता है, जबकि 14T की योजनाएं डिजाइन के चरण में हैं। अधिकांश चुंबक सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट होते हैं जिन्हें अत्यधिक कम तापमान पर ठंडा रखने के लिए तरल हीलियम (liquid helium) का उपयोग किया जाता है।

विभिन्न एमआरआई मशीनों में चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (टेस्ला में)अधिक टेस्ला यानी अधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र और अधिक स्पष्ट छवि
पोर्टेबल / ओपन एमआरआई0.2T
स्टैंडर्ड क्लिनिकल एमआरआई1.5T
एडवांस्ड क्लिनिकल 3T एमआरआई3T
हाई-फील्ड रिसर्च एमआरआई7T
एडवांस्ड रिसर्च एमआरआई11.7T

जिन रोगियों को बंद जगह का डर (claustrophobia) होता है, उनके लिए परमानेंट मैग्नेट वाले "ओपन" एमआरआई डिजाइन किए गए हैं। इसके अलावा, 2020 में एफडीए (FDA) द्वारा पोर्टेबल एमआरआई स्कैनर को भी मंजूरी दी गई है। हाल ही में माइक्रोटेस्ला से मिलिटेस्ला रेंज के अति-निम्न क्षेत्र में SQUID (Superconducting Quantum Interference Devices) तकनीक का उपयोग करके भी एमआरआई संभव हो पाया है।

सीटी स्कैन की तुलना में एमआरआई मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी जैसे नरम ऊतकों (soft tissues) के उत्कृष्ट चित्र प्रदान करता है। न्यूरोलॉजी में मल्टीपल स्केलेरोसिस, मेनिनजाइटिस, अल्जाइमर, मस्तिष्क के ट्यूमर और मिर्गी (epilepsy) के निदान के लिए एमआरआई पहली पसंद है। रेक्टल और प्रोस्टेट कैंसर की स्टेजिंग के लिए भी यह अत्यंत उपयोगी है।

मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन में दिखाई देने वाले मल्टीपल स्केलेरोसिस के क्षतिग्रस्त क्षेत्र (लेशन्स)।
मस्तिष्क के एमआरआई स्कैन में दिखाई देने वाले मल्टीपल स्केलेरोसिस के क्षतिग्रस्त क्षेत्र (लेशन्स)। (Article authors: Alice Favaretto, Davide Poggiali, Andrea Lazzarotto, Giuseppe R, CC BY 4.0, Wikimedia Commons)

मैग्नेटिक रेजोनेंस एंजियोग्राफी (Magnetic Resonance Angiography - MRA) का उपयोग करके शरीर और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं का अध्ययन किया जाता है, जबकि फंक्शनल एमआरआई (fMRI) द्वारा मस्तिष्क की रक्त परिसंचरण आधारित सक्रियता को जाना जा सकता है। ममी जैसे निर्जीव पदार्थों की स्कैनिंग के लिए भी इस तकनीक का उपयोग किया जाता है।

मैग्नेटिक रेजोनेंस एंजियोग्राफी (MRA) स्कैन, जो मस्तिष्क और गर्दन की रक्त वाहिकाओं को दर्शाता है।
मैग्नेटिक रेजोनेंस एंजियोग्राफी (MRA) स्कैन, जो मस्तिष्क और गर्दन की रक्त वाहिकाओं को दर्शाता है। (UCSF Health, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

आधुनिक समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप लर्निंग के कारण एमआरआई (MRI) की गति में बड़ा सुधार हुआ है। 2018 में Meta AI Research (FAIR) और NYU Langone Health के बीच शुरू हुए fastMRI प्रोजेक्ट ने यह दर्शाया है कि एआई-आधारित इमेज रिकंस्ट्रक्शन की मदद से घुटने और मस्तिष्क के स्कैनिंग समय में 4 गुना गति प्राप्त की जा सकती है।

स्रोत

  1. Wikipedia

विज्ञान

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