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परमाणु विखंडन: परमाणु के हृदय को तोड़कर बिजली बनाने वाला अद्भुत भौतिक विज्ञान

न्यूक्लियर फिशन की वैज्ञानिक प्रक्रिया, तरल बूंद जैसा परमाणु केंद्र और पावर प्लांट्स में नियंत्रित की जाने वाली श्रृंखला अभिक्रिया की संपूर्ण गाथा।

आवतीकाल AI डेस्क31 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट का पाठ
पूर्ण चंद्रप्रकाश के नीचे रात में रोशन एक परमाणु पावर प्लांट, जो निरंतर स्वच्छ बिजली का उत्पादन दर्शाता है।
पूर्ण चंद्रप्रकाश के नीचे रात में रोशन एक परमाणु पावर प्लांट, जो निरंतर स्वच्छ बिजली का उत्पादन दर्शाता है।
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आधुनिक ऊर्जा जगत में सबसे शक्तिशाली प्रक्रियाओं में से एक यानी परमाणु विखंडन (nuclear fission)। रसायन विज्ञान या पारंपरिक ईंधन की तुलना में यह प्रक्रिया इतनी प्रचंड है कि यूरेनियम-235 (Uranium-235) के मात्र एक परमाणु के विखंडन से मुक्त होने वाली ऊर्जा, हवा में कार्बन के एक परमाणु को जलाकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाने की तुलना में लगभग 10 करोड़ गुना अधिक होती है। जब किसी भारी अस्थिर परमाणु का नाभिक (nucleus) दो या उससे अधिक छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाता है, तब द्रव्यमान का एक छोटा सा अंश प्रचंड ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। मानव जाति ने इस अद्भुत प्रक्रिया का उपयोग करके अंधकारमय रात्रियों को रोशन किया है, हालांकि इससे जुड़े जोखिम और चुनौतियां भी उतनी ही गंभीर रही हैं।

इस वैज्ञानिक क्रांति की शुरुआत 1938 के दिसंबर में हुई थी। जर्मन रसायनज्ञों ओटो हान (Otto Hahn) और फ्रिट्ज स्ट्रैसमेन (Fritz Strassmann) ने 19 दिसंबर 1938 को प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किए कि यूरेनियम पर न्यूट्रॉन की बमबारी करने से वह टूटकर हल्के तत्वों में परिवर्तित हो गया था। इस घटना की सैद्धांतिक व्याख्या जनवरी 1939 में भौतिक विज्ञानी लिज़ मीटनर (Lise Meitner) और उनके भतीजे ओटो रॉबर्ट फ्रिश (Otto Robert Frisch) द्वारा दी गई। जीव विज्ञान में कोशिका के विभाजन को जिस तरह 'फिशन' कहा जाता है, उसी के आधार पर फ्रिश ने इस परमाणु प्रक्रिया का नाम 'फिशन' रखा। फरवरी 1939 में हान ने अनुमान लगाया कि इस प्रक्रिया में अतिरिक्त न्यूट्रॉन मुक्त होते हैं, जिसने भविष्य की स्व-संचालित श्रृंखला प्रक्रिया (nuclear chain reaction) के द्वार खोल दिए।

ऑटो हान और लिज़ मीटनर: जिन्होंने परमाणु विखंडन की खोज और सैद्धांतिक व्याख्या दी
ऑटो हान और लिज़ मीटनर: जिन्होंने परमाणु विखंडन की खोज और सैद्धांतिक व्याख्या दी (Unknown authorUnknown author, Public domain, Wikimedia Commons)

विखंडन की भौतिक कार्यप्रणाली: द्रव की बूंद और ऊर्जा का स्रोत

परमाणु केंद्र का विभाजन कैसे होता है, यह समझने के लिए नील्स बोहर और जॉन व्हीलर ने लिक्विड ड्रॉप मॉडल (liquid drop model) प्रस्तुत किया था। कल्पना करें कि पानी की एक अस्थिर बूंद सतह के तनाव से लड़ रही है। परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन के बीच का धनात्मक आवेश एक-दूसरे को दूर धकेलता है (Coulomb force), जबकि प्रबल परमाणु बल (strong force) उन्हें साथ पकड़ कर रखता है। जब कोई धीमा न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के नाभिक में प्रवेश करता है, तब वह एक संयुक्त नाभिक (compound nucleus) बनाता है। यह अतिरिक्त ऊर्जा बूंद में कंपन पैदा करती है, जिसके कारण वह खिंचकर डंबल्स जैसा आकार धारण कर लेती है।

परमाणु विखंडन की प्रक्रिया के चरण
  1. न्यूट्रॉन अवशोषणएक धीमा न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 के नाभिक में प्रवेश करके संयुक्त नाभिक बनाता है।
  2. नाभिक में कंपनअतिरिक्त ऊर्जा के कारण नाभिक में कंपन पैदा होता है और वह डंबल्स जैसा आकार धारण करता है।
  3. विखंडननाभिक फिशन बैरियर पार करके दो हल्के केंद्रों में टूट जाता है और ऊर्जा मुक्त करता है।

इस खिंचाव के कारण नाभिक 'सैडल शेप' (saddle shape) प्राप्त करता है और उसके दोनों सिरों के बीच का विद्युत प्रतिकर्षण बल प्रबल हो जाता है। विभाजन होने के लिए नाभिक को एक ऊर्जा अवरोध पार करना पड़ता है, जिसे फिशन बैरियर (fission barrier) या सक्रियण ऊर्जा (activation energy) कहा जाता है। लगभग 240 परमाणु भार वाले तत्वों के लिए यह बैरियर लगभग 6 MeV (मेगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट) जितना होता है। यूरेनियम-235 में न्यूट्रॉन अवशोषित होने पर मुक्त होने वाली बाइंडिंग एनर्जी इस अवरोध को आसानी से पार कर लेती है, और नाभिक क्षण भर में दो हल्के केंद्रों में टूट जाता है।

विखंडन के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा का वितरण आश्चर्यजनक है। यून्स और लवलैंड के शोध के अनुसार, विखंडन में उत्पन्न कुल ऊर्जा का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विखंडित टुकड़ों की गतिज ऊर्जा (kinetic energy) के रूप में मुक्त होता है। यह गति आसपास के पदार्थ को गर्म करती है। इसके अलावा, लगभग 6 प्रतिशत ऊर्जा शुरुआती न्यूट्रॉन और गामा किरणों से, 6 प्रतिशत बीटा क्षय से और शेष 3 प्रतिशत न्यूट्रिनो द्वारा प्रवाहित हो जाती है।

परमाणु विखंडन में मुक्त होने वाली ऊर्जा का वितरणविखंडन के दौरान कुल ऊर्जा विभिन्न रूपों में विभाजित होती है।
गतिज ऊर्जा85
न्यूट्रॉन और गामा किरणें6
बीटा क्षय6
न्यूट्रिनो3

ટકા (%)

बाइनरी और टर्नरी विखंडन: परमाणु के टुकड़ों का गणित

सामान्यतः परमाणु विखंडन दो असममित टुकड़ों में परिणत होता है, जिसे बाइनरी विखंडन (binary fission) कहा जाता है। यूरेनियम-235 का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण निम्नलिखित है: ²³⁵U + n ⟶ ²³⁶U* ⟶ ⁹⁵Sr + ¹³⁹Xe + 2 n + 180 MeV

यहाँ यूरेनियम टूटकर स्ट्रोंटियम-95 और ज़ेनॉन-139 बनाता है और साथ ही दो न्यूट्रॉन तथा 180 MeV ऊर्जा मुक्त करता है। इस विखंडन में उत्पन्न होने वाले टुकड़ों का द्रव्यमान मुख्य रूप से 95±15 और 135±15 डाल्टन के आसपास केंद्रित होता है, जिसका अनुपात लगभग 3:2 होता है। कभी-कभी, प्रति 1000 विखंडन में 2 से 4 मामलों में, नाभिक तीन टुकड़ों में विभाजित होता है जिसे टर्नरी विखंडन (ternary fission) कहा जाता है। यह तीसरा कण सामान्यतः अल्फा कण (हीलियम-4) होता है, जिसकी रेंज लंबी होती है और इसमें लगभग 16 MeV ऊर्जा होती है।

फिशन प्रक्रिया में मुक्त होने वाली ऊर्जा का प्रतिशत वितरणयून्स और लवलैंड के भौतिक विश्लेषण के अनुसार
टुकड़ों की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)85%
न्यूट्रॉन और प्रारंभिक गामा किरणें6%
बीटा क्षय के बाद उत्सर्जित ऊर्जा6%
न्यूट्रिनो द्वारा ले जाई जाने वाली ऊर्जा3%
यूरेनियम परमाणु का विखंडन
यूरेनियम परमाणु का विखंडन (Shrriramsughir, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

विखंडन दो तरह से हो सकता है: प्रेरित (induced) और स्वतःस्फूर्त (spontaneous)। 1940 में जॉर्जी फ्लियोरोव, कॉन्स्टेंटिन पेट्रज़ैक और इगोर कुर्चातोव ने खोजा कि भारी आइसोटोप बाहर से किसी न्यूट्रॉन के टकराए बिना भी स्वतः टूट सकते हैं। हालाँकि, व्यावहारिक पावर प्लांटों में हम स्वतःस्फूर्त नहीं बल्कि नियंत्रित प्रेरित विखंडन का उपयोग करते हैं।

विखंडनक्षम सामग्री: U-235 और U-238 के बीच का अंतर

प्रत्येक यूरेनियम परमाणु आसानी से नहीं टूटता। प्राकृतिक यूरेनियम में अधिकांशतः यूरेनियम-238 होता है, जो केवल उच्च-ऊर्जा यानी तेज़ न्यूट्रॉन (fast neutrons) द्वारा ही विखंडित हो सकता है। इसके विपरीत यूरेनियम-235 एक 'फिसाइल' (fissile) पदार्थ है, जो धीमे या थर्मल न्यूट्रॉन (thermal neutrons) द्वारा भी आसानी से विखंडित हो जाता है। न्यूट्रॉन अवशोषण की संभावना को क्रॉस सेक्शन (fission cross section) कहा जाता है, और धीमे न्यूट्रॉन के लिए यूरेनियम-235 का क्रॉस सेक्शन यूरेनियम-238 की तुलना में दस लाख गुना अधिक होता है।

परमाणु पावर प्लांट विखंडन के बाद उत्पन्न अति तीव्र न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए मॉडरेटर (moderator) का उपयोग करते हैं, ताकि वे अन्य U-235 नाभिकों से टकराकर श्रृंखला अभिक्रिया बनाए रख सकें। विश्व में केवल तीन आइसोटोप – U-233, U-235, और Pu-239 – टिकाऊ श्रृंखला अभिक्रिया चलाने की क्षमता रखते हैं।

परमाणु श्रृंखला प्रक्रिया: विखंडन से मुक्त होने वाले न्यूट्रॉन अन्य परमाणुओं का विखंडन प्रेरित करते हैं
परमाणु श्रृंखला प्रक्रिया: विखंडन से मुक्त होने वाले न्यूट्रॉन अन्य परमाणुओं का विखंडन प्रेरित करते हैं (Nicolas Eynaud, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

प्रयोगशाला से पावर ग्रिड तक की ऐतिहासिक यात्रा

वैज्ञानिकों द्वारा विखंडन की ऊर्जा को समझने के बाद, 2 दिसंबर 1942 को शिकागो विश्वविद्यालय में एनरिको फर्मी के नेतृत्व में विश्व का सर्वप्रथम मानव-निर्मित रिएक्टर 'शिकागो पाइल-1' (Chicago Pile-1) सफलतापूर्वक चालू किया गया। हालांकि उस समय अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य मैनहट्टन प्रोजेक्ट के तहत परमाणु बम बनाना था। युद्ध के बाद, शांतिपूर्ण ऊर्जा उत्पादन की ओर ध्यान केंद्रित हुआ।

20 दिसंबर 1951 को अमेरिका के इडाहो स्थित EBR-I प्रायोगिक स्टेशन ने परमाणु ऊर्जा से पहली बार लगभग 100 किलोवाट बिजली पैदा की। इसके बाद 27 जून 1954 को सोवियत संघ का ओब्निन्स्क (Obninsk) पावर प्लांट ग्रिड से जुड़ने वाला विश्व का प्रथम न्यूक्लियर पावर प्लांट बना, जिसने लगभग 5 मेगावाट बिजली दी। वहीं 27 अगस्त 1956 को इंग्लैंड के विंडस्केल स्थित काल्डर हॉल (Calder Hall) विश्व का सर्वप्रथम व्यावसायिक न्यूक्लियर पावर स्टेशन बना, जो बिजली के साथ-साथ ब्रिटेन के हथियार कार्यक्रम के लिए प्लूटोनियम-239 भी बनाता था।

काल्डर हॉल: 1956 में राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ा दुनिया का पहला व्यावसायिक न्यूक्लियर पावर स्टेशन
काल्डर हॉल: 1956 में राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ा दुनिया का पहला व्यावसायिक न्यूक्लियर पावर स्टेशन (ENERGY.GOV, Public domain, Wikimedia Commons)
वैश्विक न्यूक्लियर ऊर्जा: प्रमुख आंकड़े और स्थितिनवंबर 2025 और हालिया आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार
विवरणआंकड़ा / क्षमतानोट
कार्यरत नागरिक रिएक्टर्स416कुल स्थापित क्षमता 376 GW
निर्माणाधीन रिएक्टर्स63आगामी क्षमता 66 GW (ज्यादातर एशिया में)
योजनाबद्ध रिएक्टर्स87आगामी क्षमता 84 GW
वैश्विक बिजली उत्पादन (2023)2,602 TWhविश्व के कुल बिजली उत्पादन का लगभग 9%
औसत कैपेसिटी फैक्टर89%यूएसए में सबसे अधिक 92%
न्यूक्लियर पावर प्लांट का दृश्य
न्यूक्लियर पावर प्लांट का दृश्य (Stefan Kühn, CC BY-SA 3.0, Wikimedia Commons)

वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य और सुरक्षा का मूल्यांकन

वर्ष 1960 में वैश्विक स्थापित परमाणु क्षमता 1 गीगावाट (GW) से कम थी, जो 1970 के दशक के अंत तक 100 GW और 1990 तक 300 GW पर पहुंच गई। 1980 के दशक में औसतन हर 17 दिन में एक नया रिएक्टर शुरू होता था। वर्ष 2023 में, दुनिया भर के न्यूक्लियर पावर प्लांटों ने 2,602 टेरावॉट आवर्स (TWh) बिजली प्रदान की, जो वैश्विक बिजली उत्पादन का लगभग 9% हिस्सा है और हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा लो-कार्बन स्रोत है।

नवंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 416 नागरिक फिशन रिएक्टर कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 376 GW है। इसके अलावा 63 रिएक्टर निर्माणाधीन (66 GW क्षमता) हैं और 87 नए प्लांट योजना के चरण में (84 GW क्षमता) हैं। यूनाइटेड स्टेट्स के पास सबसे बड़ा बेड़ा है, जो वार्षिक लगभग 800 TWh बिजली पैदा करता है और इसका औसत कैपेसिटी फैक्टर 92% है, जबकि वैश्विक औसत 89% है।

परमाणु ऊर्जा का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष इसका पर्यावरणीय योगदान है। एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, जीवाश्म ईंधन के प्लांटों द्वारा होने वाले वायु प्रदूषण को रोककर प्रत्येक न्यूक्लियर प्लांट ने लगभग 8,00,000 जीवन-वर्ष (life years) बचाए हैं। कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और जलविद्युत की तुलना में परमाणु ऊर्जा प्रति यूनिट उत्पादन में सबसे कम मृत्यु दर रखती है।

लेकिन यह तकनीक जोखिम-मुक्त नहीं है। 1979 की थ्री माइल आइलैंड दुर्घटना, 1986 की चर्नोबिल त्रासदी (जिसमें 56 लोगों की सीधी मृत्यु हुई और सफाई का खर्च लगभग $68 बिलियन हुआ) और 11 मार्च 2011 की जापान की फुकुशिमा दाइची आपदा ने परमाणु सुरक्षा के सामने गंभीर सवाल खड़े किए थे। फुकुशिमा के बाद जर्मनी ने 2022 तक सभी रिएक्टरों को बंद करने का निर्णय लिया था, जबकि जापान ने 2015 से सुरक्षा मानकों को कड़ा बनाकर 40 रिएक्टरों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया हाथ में ली है और 2022 में प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने 10 और संयंत्रों को फिर से खोलने की घोषणा की थी।

इस प्रकार, न्यूक्लियर फिशन मानव बुद्धि की एक ऐसी उपलब्धि है जिसने एक अदृश्य परमाणु के हृदय में निहित शक्ति को बाहर निकाल दिया है। यदि सुरक्षा के कड़े मानकों और पर्यावरणीय सजगता के साथ इसका उपयोग जारी रहे, तो यह ऊर्जा भविष्य के कार्बन-मुक्त विश्व के लिए अनिवार्य स्तंभ बनी रहेगी।

स्रोत

  1. Wikipedia
  2. Wikipedia

विज्ञान

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