मुख्य लेखों पर जाएँ
आवतीकालAIटेकविज्ञानराजनीति
आवतीकाल/ विज्ञान
कैपिटल क्रांति समाचार
आवतीकालAIटेकविज्ञानराजनीति
खोजेंकौन लिखता हैकैपिटल क्रांति समाचारसंपादक का पन्ना

रूप

ગુજરાતીEnglishहिन्दी

मानव शरीर का कंपोस्टिंग: पर्यावरण-अनुकूल अंतिम संस्कार का नया विज्ञान और तकनीक

दफन और दाह संस्कार से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के विरुद्ध विज्ञान का नया विकल्प: नेचुरल ऑर्गेनिक रिडक्शन के माध्यम से मानव शरीर का पोषक मिट्टी में रूपांतरण।

आवतीकाल AI डेस्क3 नवंबर 2026 · 7 मिनट का पाठ
मानव शरीर का कंपोस्टिंग: पर्यावरण-अनुकूल अंतिम संस्कार का नया विज्ञान और तकनीक
मानव शरीर का कंपोस्टिंग: पर्यावरण-अनुकूल अंतिम संस्कार का नया विज्ञान और तकनीक
WhatsApp पर भेजें

मानव जाति ने पृथ्वी पर अपने जीवनकाल के दौरान पर्यावरण में अनगिनत परिवर्तन और प्रदूषण उत्पन्न किए हैं, लेकिन इसका प्रभाव केवल जीवन तक ही सीमित नहीं रहता है। मृत्यु के बाद की पारंपरिक अंतिम संस्कार की पद्धतियां भी पर्यावरण पर भारी बोझ डालती हैं। पारंपरिक दफन विधि में भूमि का एक बड़ा क्षेत्र घेरा जाता है और शव को संरक्षित करने के लिए जहरीले रसायनों का उपयोग किया जाता है, जबकि दाह संस्कार (cremation) में भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) का उपयोग होता है। इस समस्या के समाधान के रूप में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने 'ह्यूमन कंपोस्टिंग' (human composting) की विज्ञान-आधारित पद्धति विकसित की है, जिसे कानूनी भाषा में 'नेचुरल ऑर्गेनिक रिडक्शन' (natural organic reduction) या 'टेरामेसन' (terramation) कहा जाता है।

ह्यूमन कंपोस्टिंग एक ऐसी जैविक प्रक्रिया है जिसमें लाखों सूक्ष्मजीवों (microbes) और वनस्पतिजन्य कार्बनिक पदार्थों की सहायता से मृत शरीर को प्राकृतिक रूप से उपजाऊ मिट्टी या कंपोस्ट में परिवर्तित किया जाता है। इक्कीसवीं सदी की शुरुआत में विकसित की गई यह तकनीक पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है। फ्रांस के वैज्ञानिकों और वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस दिशा में गहन परीक्षण किए हैं। वाशिंगटन राज्य इस पद्धति को कानूनी मान्यता देने वाला पहला क्षेत्र बना था, और उसके बाद अन्य अमेरिकी राज्यों, स्वीडन और न्यू साउथ वेल्स (ऑस्ट्रेलिया) में भी इसे कानूनी स्वीकृति मिली है।

प्रयोगशाला में बायोरेक्टर और डेटा विश्लेषण कंप्यूटर सेटअप।
प्रयोगशाला में बायोरेक्टर और डेटा विश्लेषण कंप्यूटर सेटअप। (Jba.batista, CC BY-SA 4.0, Wikimedia Commons)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आवश्यकता

अंतिम संस्कार उद्योग के इतिहास की जांच करें तो, 1963 की प्रसिद्ध पुस्तक 'द अमेरिकन वे ऑफ डेथ' (The American Way of Death) में दर्शाए अनुसार, अमेरिकी गृहयुद्ध के बाद वाणिज्यिक अंतिम संस्कार उद्योग ने अत्यंत खर्चीली और संसाधन-गहन पद्धतियों को बढ़ावा दिया था। इसमें रासायनिक प्रक्रियाएं (embalming), महंगे ताबूत (coffins) और विशाल कब्र स्थलों का समावेश था। इसके विकल्प के रूप में समय के साथ दाह संस्कार लोकप्रिय हुआ और 2015 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में दफन विधि की तुलना में दाह संस्कार का अनुपात बढ़ गया।

हालांकि, दाह संस्कार भी पर्यावरणीय रूप से निर्दोष नहीं है। दाह संस्कार गृह के भट्ठों में बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का उपयोग होता है और वातावरण में कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके अतिरिक्त, मृतक के दांतों में मौजूद पुराने अमलगम फिलिंग्स के कारण वातावरण में जहरीला पारा (mercury) मिलने का भी जोखिम रहता है। इन्हीं कारणों से रीकंपोज (Recompose) कंपनी की संस्थापक कैटरीना स्पेड (Katrina Spade) ने पशुपालन में उपयोग की जाने वाली कंपोस्टिंग पद्धतियों को मानव शरीर पर प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान शुरू किया। 2020 में वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में इस पद्धति का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया था।

अंतिम संस्कार विधियों की अनुमानित लागत (यूएस डॉलर में)ह्यूमन कंपोस्टिंग पारंपरिक दफन विधि की तुलना में अधिक किफायती है और शवदाह की तुलना में समान लागत रखती है।
पारंपरिक दफन (अधिकतम)12,000
पारंपरिक दफन (न्यूनतम)7,000
अग्निसंस्कार / शवदाह (अधिकतम)7,000
अग्निसंस्कार / शवदाह (न्यूनतम)4,000
ह्यूमन कंपोस्टिंग (अधिकतम)7,000
ह्यूमन कंपोस्टिंग (न्यूनतम)3,000

USD ($)

प्रक्रिया कैसे काम करती है: विज्ञान और जैविक क्रांति

कंपोस्टिंग जैविक ठोस पदार्थों के पुनर्चक्रण (recycle) की एक एरोबिक (aerobic) यानी ऑक्सीजन-आधारित पद्धति है। यह प्रक्रिया जैविक सामग्री को उपजाऊ ह्यूमस (humus) में परिवर्तित करती है। कंपोस्टिंग के लिए चार मुख्य घटक अत्यंत आवश्यक हैं: कार्बन (carbon), नाइट्रोजन (nitrogen), ऑक्सीजन (oxygen) और पानी (water)।

Recompose कंपनी के पेटेंट के अनुसार, मृत शरीर को एक विशिष्ट स्टेनलेस स्टील कंटेनर में वनस्पति मिश्रण के साथ रखा जाता है। इस मिश्रण में लकड़ी के चिप्स (woodchips), पुआल (straw) और अल्फाल्फा (alfalfa) का उपयोग किया जाता है। Recompose के अनुमान के अनुसार, प्रति व्यक्ति लगभग 729 क्यूबिक फीट (20.6 क्यूबिक मीटर) वनस्पति सामग्री का उपयोग किया जाता है। इस कंटेनर में ऑक्सीजन का निरंतर प्रवाह बनाए रखा जाता है और आवश्यकतानुसार इसे घुमाया (rotate) जाता है।

इस अनुकूल वातावरण में थर्मोफाइल माइक्रोब्स (thermophile microbes - उच्च तापमान पर निरंतर सक्रिय रहने वाले सूक्ष्मजीव) तेजी से बढ़ते हैं और शरीर तथा वनस्पति मिश्रण का अपघटन शुरू कर देते हैं। इंजीनियर ओरन बर्नस्टीन (Oren Bernstein) के साथ मिलकर कैटरीना स्पेड ने एक ही परिसर में कई शरीरों की कंपोस्टिंग करने हेतु कंटेनर और फ्रेम सिस्टम डिजाइन किया है। इस प्रक्रिया के माध्यम से मात्र 1 से 2 महीने की अल्प अवधि में संपूर्ण शरीर उपजाऊ मिट्टी में परिवर्तित हो जाता है।

अंतिम संस्कार विधियों की तुलनात्मक विशेषताएंमानव कंपोस्टिंग पर्यावरणीय पदचिह्न और ऊर्जा खपत में महत्वपूर्ण बचत करता है।
विधिसमय अवधिऊर्जा खपतअनुमानित लागत ($)
पारंपरिक दफन विधिस्थायी / वर्षउच्च (संसाधन गहन)$7,000 - $12,000
अग्निसंस्कार (Cremation)कुछ घंटेपूर्ण (जीवाश्म ईंधन)$4,000 - $7,000
ह्यूमन कंपोस्टिंग (NOR)1 से 2 महीनेअग्निसंस्कार के 1/8 भाग के बराबर$3,000 - $7,000

सुरक्षात्मक उपाय, तापमान और स्वास्थ्य नियम

मानव शरीर की कंपोस्टिंग के लिए कड़े स्वास्थ्य और कानूनी सुरक्षा मानक निर्धारित किए गए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (EPA) के 'प्रोसेसिस टू फर्दर रिड्यूस पैथोजेन्स' (PFRP) मानकों के अनुसार, बंद कंटेनर में कंपोस्टिंग का तापमान निरंतर 3 दिनों से अधिक समय तक कम से कम 55 डिग्री सेल्सियस (131 डिग्री फारेनहाइट) तक पहुँचना अनिवार्य है। यह उच्च तापमान हानिकारक रोगजनकों (pathogens), दवाओं, एंटीबायोटिक्स और कीमोथेरेपी की दवाओं के अवशेषों को निष्क्रिय करने के लिए आवश्यक है।

कुछ विशिष्ट संक्रामक रोगों जैसे कि टीबी (tuberculosis), क्रुत्ज़फेल्ड-जैकोब रोग (Creutzfeldt–Jakob disease) और इबोला (Ebola) से पीड़ित व्यक्तियों के शरीर इस प्रक्रिया के लिए अनुपयुक्त माने जाते हैं, क्योंकि उनके रोगजनक बैक्टीरिया या वायरस कंपोस्टिंग के तापमान में भी जीवित रह सकते हैं। इसके अतिरिक्त, पेसमेकर जैसे बैटरी वाले मेडिकल इम्प्लांट्स या रेडियोएक्टिव सीड्स को प्रक्रिया शुरू करने से पहले हटाना पड़ता है। हिप रिप्लेसमेंट में उपयोग की जाने वाली धातुओं को भी मिट्टी के उपयोग से पहले अलग कर दिया जाता है।

हड्डियाँ सॉफ्ट टिश्यू (कोमल ऊतकों) की तुलना में धीमी गति से अपघटित होती हैं। इसलिए कंपोस्टिंग प्रक्रिया के मध्य चरण में हड्डियों को अलग करके, यांत्रिक उपकरणों द्वारा उनका महीन पाउडर बनाया जाता है और उन्हें पुनः मिट्टी में मिला दिया जाता है। यही पद्धति पश्चिमी देशों के श्मशान घाटों में अस्थि भस्म के लिए उपयोग की जाती है।

ह्यूमन कंपोस्टिंग (NOR) प्रक्रिया के मुख्य चरणप्राकृतिक माइक्रोबियल प्रक्रिया द्वारा मानव शरीर का उपजाऊ मिट्टी में रूपांतरण।
  1. कंटेनर में स्थापनाशरीर को लकड़ी के टुकड़ों (woodchips), पुआल (straw) और अल्फाल्फा जैसे वनस्पति मिश्रण के साथ कंटेनर में रखा जाता है।
  2. एरोबिक कंपोस्टिंग और तापमानऑक्सीजन प्रवाह के बीच थर्मोफाइल माइक्रोब्स अपघटन करते हैं; EPA मानक के अनुसार तापमान 55 °C (131 °F) से अधिक 3 दिनों तक बनाए रखा जाता है।
  3. हड्डियों की प्रक्रियामध्य प्रक्रिया में हड्डियों को अलग कर यांत्रिक रूप से चूर्ण बनाया जाता है और पुनः मिट्टी में मिला दिया जाता है।
  4. पोषक मिट्टी का निर्माण1-2 महीनों में 450 किलो पोषक मिट्टी तैयार होती है, जो परिवार को सौंपी जाती है या जंगलों में दान कर दी जाती है।

आंकड़े, क्षमता और लागत की तुलना

Recompose के आंकड़ों के अनुसार, एक मानव शरीर की कंपोस्टिंग से लगभग 27 क्यूबिक फीट (0.76 क्यूबिक मीटर) आयतन और 1,000 पाउंड (450 किलोग्राम) वजन वाली पोषक मिट्टी तैयार होती है। परिजन इस मिट्टी का उपयोग अपने बगीचे में कर सकते हैं या संरक्षण वनों (conservation forests) में दान कर सकते हैं।

ऊर्जा खपत की दृष्टि से, ह्यूमन कंपोस्टिंग फैसिलिटी चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, लेकिन यह दाह संस्कार के लिए उपयोग की जाने वाली ऊर्जा के केवल 8वें हिस्से (1/8) के बराबर ही है। आर्थिक दृष्टि से भी यह पद्धति अधिक किफायती है।

वाशिंगटन राज्य के नियमों के अनुसार, तैयार मिट्टी में आर्सेनिक (arsenic), कैडमियम (cadmium), सीसा (lead), पारा (mercury) और सेलेनियम (selenium) जैसे जहरीले तत्वों का परीक्षण करना आवश्यक है। न्यूयॉर्क और कोलोराडो जैसे राज्यों में इस मिट्टी का उपयोग खाद्य फसलें उगाने के लिए करने पर प्रतिबंध है।

सामाजिक, धार्मिक और भविष्य का दृष्टिकोण

ह्यूमन कंपोस्टिंग का विचार पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत आशाजनक होने के बावजूद, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं मिली हैं। कैथोलिक चर्च (Catholic Church) ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि मानव अवशेषों को पवित्रता के साथ स्वीकार किया जाना चाहिए और उन्हें खेती या मिट्टी में मिला देना पुनरुत्थान के सिद्धांत के विरुद्ध है। हालांकि, कुछ बायोएथिक्स विशेषज्ञ मानते हैं कि 'धूल से धूल में मिल जाना' बाइबिल के संदेश को अधिक प्रत्यक्ष रूप से सार्थक करता है।

यहूदी धर्म में ऑर्थोडॉक्स धाराएं कंपोस्टिंग का विरोध करती हैं, जबकि रिकंस्ट्रक्शनिस्ट दृष्टिकोण रखने वाले रब्बी इसे पर्यावरणीय मूल्यों के साथ सुसंगत मानते हैं। पर्यावरणविदों और लेखिका कैटलिन डॉटी (Caitlin Doughty) जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया मृत्यु के बाद भी पृथ्वी को पोषण देने की मानवीय इच्छा को पूरा करती है।

ह्यूमन कंपोस्टिंग अंतिम संस्कार के क्षेत्र में एक अनूठी जैविक और वैज्ञानिक क्रांति है। यह मानव शरीर को प्राकृतिक रूप से पृथ्वी के चक्र में पुन: प्रवेश कराने के लिए एक अत्याधुनिक और टिकाऊ तकनीक प्रदान करती है।

लकड़ी के कंटेनर में प्राकृतिक रूप से होने वाली कंपोस्टिंग प्रक्रिया का दृश्य।
लकड़ी के कंटेनर में प्राकृतिक रूप से होने वाली कंपोस्टिंग प्रक्रिया का दृश्य। (SuSanA Secretariat, CC BY 2.0, Wikimedia Commons)

स्रोत

  1. france24
  2. Wikipedia
  3. Wikipedia

विज्ञान

सब देखें
कॉर्नियल ट्रांसप्लांट के एक दिन बाद मानव आंख का क्लोज-अप दृश्य, जिसमें सर्जिकल टांके स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

आंख की खिड़की बदलने की चिकित्सा क्रांति: कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और दृष्टि बहाल करने का विज्ञान

जब प्राकृतिक लेंस धुंधला पड़ जाए, तो आधुनिक विज्ञान कैसे किसी और की आंख के टुकड़े या कृत्रिम तरीके से दृष्टि वापस लाता है, इसकी गहरी समझ।

आवतीकाल AI डेस्क6 नव.7 मिनट का पाठ
दक्षिण कोरिया की आधुनिक सबमरीन ROKS Dosan Ahn Changho बंदरगाह छोड़ रही है, जो देश की बढ़ती नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है।

दक्षिण कोरिया का 'जंग बोगो N' मिशन: परमाणु शक्ति से लैस सबमरीन तकनीक का नया अध्याय

दक्षिण कोरिया ने 2027 से अपनी पहली स्वदेशी परमाणु-संचालित सबमरीन बनाने की योजना को मंजूरी दी है, जो समुद्र में उसकी रणनीतिक क्षमताओं को कई गुना बढ़ा देगी।

आवतीकाल AI डेस्क6 नव.6 मिनट का पाठ
नासा लैंग्ली विंड टनल फैसिलिटी में छोटे विमान मॉडल के साथ मैरी जैक्सन। नासा के एरोनॉटिक्स अनुसंधान का इतिहास दशकों पुराना है।

नासा का नया X-70 फ्रैक्कल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एयरोस्पेस डिज़ाइन के नए युग का आरंभ

नासा ने अपने नए प्रायोगिक विमान X-70 फ्रैक्कल की घोषणा की है, जो उन्नत फ्लाइट कंट्रोल और मॉड्यूलर डिज़ाइन के माध्यम से विमान निर्माण की पद्धतियों को बदल देगा।

आवतीकाल AI डेस्क6 नव.6 मिनट का पाठ
आवतीकाल
AIटेकविज्ञानराजनीतिकैपिटल क्रांति समाचार
हमारे बारे मेंसंपादकीय नीतिहम कैसे जाँचते हैंसंपर्क
© 2026 कैपिटल क्रांति