RISC-V: प्रोसेसर की दुनिया में ओपन-सोर्स क्रांति और इसका हार्डवेयर डिज़ाइन पर गहरा प्रभाव
बर्कले यूनिवर्सिटी में जन्मी यह तकनीक कैसे महंगे लाइसेंस और रॉयल्टी के बंधनों को तोड़कर सेमीकंडक्टर उद्योग में नया युग ला रही है।

कोइ भी कंप्यूटर या स्मार्टफोन का हृदय उसका प्रोसेसर होता है, परंतु यह प्रोसेसर किस तरह काम करेगा, इसके निर्देश एक खास भाषा में लिखे होते हैं। इस भाषा को तकनीकी दुनिया में इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर (Instruction Set Architecture - ISA) कहा जाता है। अब तक इंटेल (Intel) और आर्म (ARM) जैसी बड़ी कंपनियाँ इस भाषा पर अपना एकाधिकार रखती थीं। यदि किसी कंपनी को अपनी चिप बनानी होती, तो उसे इन दिग्गज कंपनियों को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी (प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बदले चुकाए जाने वाला शुल्क) देनी पड़ती थी। परंतु 2010 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में एक ऐसी परियोजना शुरू हुई जिसने इस पूरे खेल को बदल कर रख दिया। उसका नाम है RISC-V (रिस्क-फाइव)।
RISC-V एक मुक्त और ओपन-सोर्स (जिसका कोड या डिज़ाइन कोई भी देख और उपयोग कर सके) आर्किटेक्चर है। यह रिड्यूस्ड इंस्ट्रक्शन सेट कंप्यूटर (Reduced Instruction Set Computer - RISC) के सिद्धांतों पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि यह जटिल निर्देशों के बजाय सरल और छोटे निर्देशों पर काम करता है, जिससे प्रोसेसर अधिक तेज़ और कार्यकुशल बनता है। विकिपीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, RISC-V बर्कले में 1981 से चल रहे शोध की पांचवीं पीढ़ी है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत क्रस्ते असानोविक (Krste Asanović) और डेविड पैटर्सन (David Patterson) जैसे दिग्गजों द्वारा की गई थी, जिन्होंने महसूस किया कि शैक्षणिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए एक ऐसा आर्किटेक्चर होना चाहिए जो किसी एक कंपनी के स्वामित्व का न हो।

इतिहास और संस्थागत ढाँचा
RISC-V का इतिहास बहुत रोचक है। १९८० के दशक में जब प्रोसेसर डिज़ाइन बहुत जटिल हो रही थी, तब डेविड पैटरसन ने साबित किया कि सरल निर्देशों वाले प्रोसेसर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। २०१० में जब बर्कले की टीम को अनुसंधान के लिए एक ओपन-सोर्स सीपीयू (CPU) कोर की आवश्यकता पड़ी, तब उन्होंने उपलब्ध विकल्पों के बजाय अपना नया आर्किटेक्चर बनाने का निर्णय लिया। यह प्रोजेक्ट केवल तीन महीने के ग्रीष्मकालीन प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन इसकी सफलता इतनी बड़ी थी कि यह वैश्विक स्तर पर फैल गया। २०१५ में इस तकनीक के संचालन के लिए 'RISC-V फाउंडेशन' की स्थापना की गई, जिसे बाद में २०१९ में अमेरिका के व्यापार नियमों की चिंता के कारण स्विट्जरलैंड में स्थानांतरित कर दिया गया और इसका नाम 'RISC-V इंटरनेशनल' रखा गया।
आज RISC-V इंटरनेशनल के पास ४,५०० से अधिक सदस्य हैं। इन सदस्यों में गूगल (Google), एनविडिया (Nvidia), क्वालकॉम (Qualcomm) और इंटेल (Intel) जैसी बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं। इस संस्था का मुख्य काम RISC-V के मानक तय करना और उन्हें बनाए रखना है। कोई भी व्यक्ति या कंपनी इस आर्किटेक्चर का इस्तेमाल करके अपनी चिप बना सकती है और इसके लिए उन्हें किसी को एक भी रुपया रॉयल्टी के तौर पर नहीं देना पड़ता है। यह बात सेमीकंडक्टर उद्योग में एक बड़ी क्रांति के समान है, क्योंकि यह छोटी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए प्रोसेसर डिज़ाइन के दरवाज़े खोल देती है।
| एक्सटेंशन | नाम | कार्य |
|---|---|---|
| I | Integer | बुनियादी पूर्णांक गणनाएं |
| M | Multiplication | गुणा और भाग की सुविधा |
| A | Atomic | मल्टी-कोर प्रोसेसिंग के लिए सिंक्रोनाइज़ेशन |
| F | Single-Precision FP | दशमलव वाली गणनाएं (32-बिट) |
| D | Double-Precision FP | अधिक सटीकता वाली गणनाएं (64-बिट) |
| C | Compressed | कोड की साइज घटाने के लिए निर्देश |
मॉडुलर डिज़ाइन: कैसे काम करता है RISC-V?
RISC-V की सबसे बड़ी खूबी इसकी मॉड्यूलर (modular): अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर बनाई जा सकने वाली डिज़ाइन है। पारंपरिक आर्किटेक्चर में सभी निर्देश एक साथ लेने पड़ते हैं, भले ही आपको उसकी ज़रूरत हो या न हो। लेकिन RISC-V में एक छोटा 'बेस' (base) आर्किटेक्चर होता है और उसके ऊपर आप अपनी ज़रूरत के मुताबिक 'एक्सटेंशन' (extension): अतिरिक्त सुविधाएँ जोड़ सकते हैं। इसे एक सादे उदाहरण से समझते हैं: जैसे आप एक सादी कार खरीदें और फिर उसमें अपनी ज़रूरत के मुताबिक एसी, म्यूज़िक सिस्टम या सनरूफ लगवाएँ, वैसे ही RISC-V में भी आप प्रोसेसर की क्षमता बढ़ा सकते हैं।
इस आर्किटेक्चर में मुख्य रूप से ३२-बिट और ६४-बिट के बेस वेरिएंट होते हैं। उदाहरण के लिए, RV32I एक ३२-बिट का बुनियादी आर्किटेक्चर है। अगर आपको गणित के जटिल काम करने हों, तो आप उसमें 'M' एक्सटेंशन जोड़ सकते हैं। अगर आपको फ्लोटिंग पॉइंट (floating point): दशमलव चिह्न वाली गणनाएँ करनी हों, तो 'F' या 'D' एक्सटेंशन जोड़ा जा सकता है। जब ये सभी मुख्य एक्सटेंशन (I, M, A, F, D) मिलते हैं, तो इसे संक्षेप में 'G' (General-purpose) कहा जाता है। इस मॉड्यूलर दृष्टिकोण के कारण प्रोसेसर का साइज़ छोटा रहता है और वह कम बिजली की खपत करता है, जो विशेष रूप से स्मार्टवॉच या सेंसर जैसे उपकरणों के लिए वरदान साबित होता है।
सांख्यिकीय तुलना और सॉफ़्टवेयर इकोसिस्टम
RISC-V की लोकप्रियता इसके आँकड़ों से समझी जा सकती है। २०२५ तक इसके सदस्यों की संख्या ४,५०० को पार कर चुकी है। लिनक्स (Linux) जैसी ऑपरेटिंग सिस्टम अब RISC-V को पूरा समर्थन देती है। मई २०२३ में 'RISE' (RISC-V Software Ecosystem) नाम की पहल शुरू की गई, जिसमें सैमसंग (Samsung) और रेड हैट (Red Hat) जैसी कंपनियाँ जुड़ी हैं ताकि RISC-V पर चलने वाले सॉफ़्टवेयर ज़्यादा तेज़ी से विकसित हो सकें। यह आर्किटेक्चर केवल शैक्षणिक अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सर्वर, डेस्कटॉप और मोबाइल बाज़ार में भी प्रवेश कर रहा है।
- आर्किटेक्चर चयनआवश्यकतानुसार 32-बिट या 64-बिट बेस और जरूरी एक्सटेंशन (M, A, F आदि) तय करना।
- लॉजिक डिजाइनप्रोसेसर के आंतरिक लॉजिक को हार्डवेयर लैंग्वेज में लिखना और उसकी कार्यक्षमता जांचना।
- सॉफ्टवेयर टेस्टिंगओपन-सोर्स कंपाइलर का उपयोग करके प्रोग्राम्स रन करना और त्रुटियां सुधारना।
- उत्पादनबिना कोई रॉयल्टी चुकाए डिजाइन को फैब्रिकेशन के लिए भेजना।

चिप डिजाइन की प्रक्रिया में RISC-V कैसे काम करता है, यह समझने के लिए इसके चरणों को देखना आवश्यक है। सबसे पहले डिजाइनर अपनी आवश्यकतानुसार बेस ISA का चयन करता है। इसके बाद इसमें आवश्यक एक्सटेंशन जोड़े जाते हैं। इस डिजाइन को Verilog जैसी हार्डवेयर विवरण भाषा में लिखा जाता है और फिर इसका सिमुलेशन किया जाता है। अंत में, इस डिजाइन को फैब्रिकेशन प्लांट में भेजकर सिलिकॉन चिप बनाई जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी लाइसेंस की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय और धन दोनों की बचत होती है।

भारत के लिए महत्व और भविष्य की दिशा
भारत के लिए RISC-V अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर बनाने की दिशा में RISC-V आधारशिला साबित हो रहा है। IIT मद्रास द्वारा विकसित 'शक्ति' (SHAKTI) प्रोसेसर RISC-V आर्किटेक्चर पर ही आधारित है। इससे भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने और अपनी सुरक्षित चिप्स बनाने में मदद मिलेगी। जब हार्डवेयर ओपन-सोर्स होता है, तो उसमें किसी 'बैकडोर' (backdoor): गुप्त रूप से जानकारी चुराने का रास्ता होने की संभावना कम हो जाती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।
हालांकि, RISC-V के सामने अभी भी कुछ चुनौतियां हैं। ARM और x86 के पास दशकों पुरानी सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम है, जिसके सामने टिके रहने के लिए RISC-V को अभी और अधिक सॉफ्टवेयर सपोर्ट की आवश्यकता है। साथ ही, अभी भी हाई-परफॉर्मेंस गेमिंग या जटिल सर्वर कार्यों में यह स्थापित आर्किटेक्चर की तुलना में पीछे है। फिर भी, जिस तरह दुनिया भर की कंपनियां और शोधकर्ता इससे जुड़ रहे हैं, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि भविष्य ओपन-सोर्स हार्डवेयर का ही है। 2026 में लॉन्च हुई 'रेटिफाइड स्पेसिफिकेशन लाइब्रेरी' ने इंजीनियरों के लिए इस तकनीक का उपयोग करना और अधिक आसान बना दिया है।

निष्कर्ष में, RISC-V केवल एक तकनीकी मानक नहीं है, बल्कि यह हार्डवेयर की दुनिया में आई एक लोकतंत्र है। यह तकनीक के क्षेत्र में इनोवेशन (innovation): नवीनता लाने के लिए बाधाओं को दूर करता है। जैसे लिनक्स ने सॉफ्टवेयर की दुनिया बदल दी, वैसे ही RISC-V के अगले दशक में हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर उद्योग का चेहरा बदल देने की पूरी संभावना है।


