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क्या आइंस्टीन के मूल समीकरण डार्क एनर्जी के बिना ब्रह्मांड के विस्तार को समझा सकते हैं?

यूसी डेविस के शोधकर्ताओं ने आइंस्टीन के फील्ड इक्वेशन्स के आधार पर डार्क एनर्जी की अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं, जिससे भौतिकी के स्टैंडर्ड मॉडल पर नई बहस छिड़ गई है।

आवतीकाल AI डेस्क2 नवंबर 2026 · 7 मिनट का पाठ
आइंस्टीन के फील्ड समीकरणों और गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग की अवधारणा को दर्शाता एक भित्ति चित्र।
आइंस्टीन के फील्ड समीकरणों और गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग की अवधारणा को दर्शाता एक भित्ति चित्र।
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ब्रह्मांड का रहस्य और डार्क एनर्जी के सामने उठे सवाल

आधुनिक खगोलशास्त्र और ब्रह्मांड विज्ञान के सामने अभी सबसे बड़ी पहेली यह है कि हमारा विश्व लगातार बढ़ती गति से क्यों फैल रहा है। 1998 में टाइप 1ए (Type Ia) सुपरनोवा के अवलोकनों से वैज्ञानिकों को पता चला था कि ब्रह्मांड का विस्तार धीमा पड़ने के बजाय त्वरित (accelerating) हो रहा है। इस अप्रत्याशित गतिविधि को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने 'डार्क एनर्जी' (dark energy) नामक एक अदृश्य ऊर्जा की कल्पना की थी। यह ऊर्जा पूरे अंतरिक्ष में समान रूप से फैली मानी जाती है और यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत जाकर जगह को बाहर की तरफ धकेलती है।

हालांकि, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया डेविस (UC Davis) के शोधकर्ताओं ने अब इस स्थापित मान्यता के सामने एक गंभीर सैद्धांतिक चुनौती पेश की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अल्बर्ट आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण के मूलभूत समीकरणों का उपयोग करके डार्क एनर्जी की आवश्यकता के बिना भी ब्रह्मांड के विस्तार की व्याख्या की जा सकती है। उन्होंने ब्रह्मांड विज्ञान के प्रचलित लैम्ब्डा-कोल्ड डार्क मैटर (Lambda-CDM) मॉडल में मौजूद कमजोरियों की आइंस्टीन के फील्ड समीकरणों के माध्यम से जांच की है। शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि फ्रीडमैन के गणितीय ढांचे में मौजूद अस्थिरताओं की गहरी जांच करने से एक नया ही मार्ग खुलता है।

बिग बैंग से शुरू करके आज के समय तक ब्रह्मांड के विस्तार का ऐतिहासिक क्रम
बिग बैंग से शुरू करके आज के समय तक ब्रह्मांड के विस्तार का ऐतिहासिक क्रम (Ann Feild (STScI), Public domain, Wikimedia Commons)

आइंस्टीन के फील्ड समीकरणों का गणित और संरचना

इस पूरे विचार को समझने के लिए आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षतावाद (General Theory of Relativity) के समीकरणों को समझना अनिवार्य है। ई.स. 1915 में प्रकाशित आइंस्टीन फील्ड इक्वेशंस (EFE) अंतरिक्ष और समय के ज्यामितीय ढांचे को उसमें मौजूद द्रव्य और ऊर्जा के वितरण के साथ जोड़ते हैं। जिस तरह मैक्सवेल के समीकरण विद्युत आवेश और प्रवाह के साथ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को जोड़ते हैं, उसी तरह आइंस्टीन का गणित द्रव्यमान-ऊर्जा के आधार पर स्पेसटाइम का वक्र (curvature) निर्धारित करता है।

ये समीकरण गणितीय रूप से टेंसर (tensor: ज्यामितीय राशियां दर्शाने वाला गणितीय साधन) के रूप में लिखे जाते हैं। इसका मानक स्वरूप $G_{\mu\nu} + \Lambda g_{\mu\nu} = \kappa T_{\mu\nu}$ है। यहाँ बाईं ओर स्पेसटाइम की ज्यामिति दर्शाती है, जबकि दाईं ओर स्पेसटाइम में मौजूद ऊर्जा-द्रव्य की मात्रा दर्शाती है। यह समीकरण इस बात को स्पष्ट करता है कि द्रव्य स्पेसटाइम को मुड़ने के लिए कहता है और मुड़ा हुआ स्पेसटाइम द्रव्य को गति करने का मार्ग दिखाता है।

आइंस्टाइन फील्ड इक्वेशन्स कैसे स्पेसटाइम और द्रव्य को जोड़ते हैं
  1. द्रव्य और ऊर्जा का वितरणअंतरिक्ष में स्थित तारों, गैसों और रेडिएशन का घनत्व एवं उसके दबाव को स्ट्रेस-एनर्जी टेंसर द्वारा गिना जाता है।
  2. स्पेसटाइम की ज्यामिति में मोड़यह द्रव्यमान और ऊर्जा की उपस्थिति आसपास के स्पेसटाइम के फैब्रिक को मोड़ती है, जो आइंस्टाइन टेंसर और मेट्रिक टेंसर द्वारा वर्णित है।
  3. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की रचनामुड़ा हुआ स्पेसटाइम मुक्त रूप से गति करते कणों और प्रकाश की किरणों के लिए जियोडेसिक मार्ग तय करता है।
  4. ब्रह्मांड का गतिशील विस्तारसमग्र ब्रह्मांड के स्तर पर ये समीकरण अंतरिक्ष के संकुचन या विस्तार की कुल दर को निर्धारित करते हैं।

इस समीकरण में $G_{\mu\nu}$ आइंस्टीन टेंसर है, जो स्पेसटाइम के स्थानीय वक्र का प्रतिनिधित्व करता है। यह रिची कर्वेचर टेंसर ($R_{\mu\nu}$) और स्केलर कर्वेचर ($R$) से परिभाषित होता है। दूसरी ओर, $g_{\mu\nu}$ मेट्रिक टेंसर (metric tensor: अंतरिक्ष में दूरी और समय मापने का साधन) है। समीकरण की दाईं ओर स्थित $T_{\mu\nu}$ स्ट्रेस-एनर्जी टेंसर है, जो द्रव्यमान, ऊर्जा, संवेग और दबाव की जानकारी संग्रहित करता है। यह समीकरण केवल एक साधारण रेखा नहीं है, बल्कि यह वास्तव में दस आंशिक अवकल समीकरणों (partial differential equations) का एक जटिल अरैखिक समूह है।

आइंस्टाइन फील्ड समीकरण के मूलभूत गणितीय घटकजनरल रिलेटिविटी के दस अरेखीय आंशिक विकलन समीकरणों का ढांचा
प्रतीकनामगणितीय भूमिका
G_μνआइंस्टाइन टेंसर (Einstein tensor)स्पेसटाइम का स्थानीय ज्यामितीय मोड़ दर्शाता है
g_μνमेट्रिक टेंसर (Metric tensor)अंतरिक्ष-समय में दूरी और समय का मापन तय करता है
Λकॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टेंट (Cosmological constant)शून्याकाश की ऊर्जा घनत्व या वैश्विक अपकर्षण
T_μνस्ट्रेस-एनर्जी टेंसर (Stress-energy tensor)द्रव्य, ऊर्जा, वेगमान और दबाव का वितरण दर्शाता है
κआइंस्टाइन ग्रेविटेशनल कॉन्स्टेंट8πG/c⁴ जितना मूल्य (~2.07665 × 10⁻⁴³ N⁻¹)

ब्रह्मांड में द्रव्य और डार्क एनर्जी का प्रमाण

आज के मुख्यधारा के खगोलशास्त्र के अनुसार ब्रह्मांड की रचना में तीन घटक मुख्य भूमिका निभाते हैं। लैम्ब्डा-सीडीएम (Lambda-CDM) मॉडल के अनुसार, आज के अवलोकन योग्य ब्रह्मांड में डार्क एनर्जी का हिस्सा लगभग 68% है। कोल्ड डार्क मैटर (cold dark matter) 27% हिस्सा रखता है, जबकि हम जिन तारों, ग्रहों और गैसों से परिचित हैं, वह सामान्य द्रव्य यानी बेरियोनिक मैटर (baryonic matter) मात्र 5% ही है। न्यूट्रिनो और फोटॉन जैसे अन्य कणों का हिस्सा नगण्य माना जाता है।

डार्क एनर्जी पूरे अंतरिक्ष में अत्यंत सूक्ष्म रूप में फैली हुई है। इसका घनत्व प्रति घन सेंटीमीटर मात्र 7 × 10⁻³⁰ ग्राम जितना अत्यंत कम है। हालांकि इतनी कम घनत्व होने के बावजूद, यह पूरे ब्रह्मांड में एकसमान रूप से फैली होने के कारण कुल ऊर्जा बजट पर हावी है। सामान्य द्रव्य की मात्रा आयतन बढ़ने के साथ विरल होती जाती है, लेकिन डार्क एनर्जी का घनत्व स्थान के विस्तार के साथ घटता नहीं है।

ब्रह्मांड के कुल द्रव्यमान-ऊर्जा बजट में घटकों का अनुमानित हिस्सालैम्बडा-सीडीएम स्टैंडर्ड मॉडल के अनुसार प्रतिशत
डार्क एनर्जी (Dark Energy)68%
डार्क मैटर (Dark Matter)27%
सामान्य द्रव्य (Ordinary Matter)5%

कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट: आइंस्टीन की सबसे बड़ी भूल या दूरदर्शिता?

आइंस्टीन के समीकरण में मौजूद ग्रीक अक्षर लैम्ब्डा ($\Lambda$) को कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट (cosmological constant) के रूप में जाना जाता है। 1915 में जब उन्होंने समीकरण प्रस्तुत किए, तब सामान्य मान्यता यह थी कि ब्रह्मांड स्थिर (static) है। गुरुत्वाकर्षण सभी वस्तुओं को अंदर की ओर खींचता है, इसलिए ब्रह्मांड संकुचित न हो जाए, इसके लिए आइंस्टीन ने समीकरण में कृत्रिम रूप से इस स्थिरांक को जोड़ा था, ताकि गुरुत्वाकर्षण का संतुलन बना रहे। आइंस्टीन ने बताया था कि खाली अंतरिक्ष नकारात्मक द्रव्यमान की तरह व्यवहार करके गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध प्रतिकर्षण पैदा कर सकता है।

लेकिन बाद में यह समझ आया कि यह स्थिरता लंबे समय तक टिक नहीं सकती। यदि ब्रह्मांड थोड़ा भी विस्तारित होता है, तो शून्य-बिंदु ऊर्जा (vacuum energy) की मात्रा बढ़ती है और यह और भी तीव्र विस्तार को प्रेरित करती है। 1929 में एडविन हबल नामक खगोलशास्त्री ने प्रमाण दिए कि आकाशगंगाएं एक-दूसरे से दूर जा रही हैं और ब्रह्मांड स्थिर नहीं बल्कि विस्तारित हो रहा है। यह जानकर आइंस्टीन ने कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट के विचार को अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल (greatest blunder) बताते हुए त्याग दिया था।

प्रारंभिक ब्रह्मांड के कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन का समग्र आकाश का नक्शा
प्रारंभिक ब्रह्मांड के कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन का समग्र आकाश का नक्शा (NASA / WMAP Science Team, Public domain, Wikimedia Commons)

1998 की क्रांति और स्टैंडर्ड मॉडल का उदय

1980 के दशक में अधिकांश भौतिक विज्ञानी मानते थे कि ब्रह्मांड में 95% डार्क मैटर और 5% सामान्य द्रव्य है। हालांकि 1992 में कोबे (COBE) अंतरिक्ष यान द्वारा कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) में मौजूद अनियमितताओं की खोज के बाद इस पुराने मॉडल में दरारें पड़ने लगी थीं। 1998 में एडम रीस और सोल पर्लमटर के नेतृत्व वाली टीमों ने सुपरनोवा अवलोकनों द्वारा सिद्ध किया कि विस्तार धीमा होने के बजाय तीव्र हो रहा है। उसी वर्ष कॉस्मोलॉजिस्ट माइकल एस. टर्नर ने 'डार्क एनर्जी' शब्द गढ़ा था।

इन परिणामों को समझाने के लिए वैज्ञानिकों ने फिर से आइंस्टीन के उस पुराने स्थिरांक Λ (लैम्ब्डा) का सहारा लिया। जनरल रिलेटिविटी के अनुसार द्रव्य का दबाव भी गुरुत्वाकर्षण में योगदान देता है। यदि किसी माध्यम में प्रचंड नकारात्मक दबाव (negative pressure) हो, तो वह गुरुत्वाकर्षण प्रतिकर्षण जैसा प्रभाव पैदा करता है। निर्वात की ऊर्जा (vacuum energy) ऐसा नकारात्मक दबाव पैदा कर सकती है। लेकिन क्वांटम फील्ड थ्योरी द्वारा गणना की गई वैक्यूम एनर्जी और वास्तविक अवलोकनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है, जिसे भौतिकी की अनसुलझी समस्या माना जाता है।

डार्क एनर्जी कैमरा (Dark Energy Camera) का त्रि-आयामी टेक्निकल रेंडर
डार्क एनर्जी कैमरा (Dark Energy Camera) का त्रि-आयामी टेक्निकल रेंडर (NOIRLab, CC BY 4.0, Wikimedia Commons)

यूसी डेविस के शोध की नई दिशा

इन अनिर्णीत समस्याओं के समाधान के रूप में यूसी डेविस के शोधकर्ताओं ने एक नया मार्ग प्रस्तुत किया है। उनका तर्क है कि हम ब्रह्मांड को समझने के लिए जिस लैम्ब्डा-सीडीएम मॉडल का उपयोग करते हैं, उसमें ब्रह्मांड को अत्यंत समान और एकसार मान लिया गया है। लेकिन वास्तविक ब्रह्मांड में आकाशगंगाएं और विशाल निर्वात के बड़े गड्ढे हैं। आइंस्टीन के समीकरण अरेखीय (nonlinear) होने के कारण, छोटी-छोटी अस्थिरताएं विशाल स्तर पर विस्तार की दर को प्रभावित कर सकती हैं।

यदि आइंस्टीन के मूल समीकरणों में निहित अस्थिरताएं और स्पेसटाइम के स्थानीय विकार ही त्वरित विस्तार का आभास पैदा करते हों, तो हमें किसी रहस्यमय 68% डार्क एनर्जी की कल्पना करने की आवश्यकता नहीं रहती है। मार्च 2025 में डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट (DESI) के विश्लेषण में भी संकेत मिले थे कि डार्क एनर्जी समय के साथ बदल रही हो सकती है। यदि भविष्य के गणितीय और टेलीस्कोपिक प्रमाण यूसी डेविस के इस विकल्प की पुष्टि करते हैं, तो आधुनिक ब्रह्मांड विज्ञान को अपने सबसे बड़े रहस्य को नए सिरे से परिभाषित करना होगा।

स्रोत

  1. toi
  2. Wikipedia
  3. Wikipedia

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