अंतरिक्ष में वर्चुअल डेटा सेंटर: उपग्रहों को सुपरकंप्यूटर में बदलती सॉफ्टवेयर क्रांति
Satlyt कंपनी ने कक्षा में स्थित कंप्यूटरों के बीच प्रोसेसिंग कार्य का वितरण करके अंतरिक्ष में सुपरकंप्यूटिंग का सफल प्रयोग किया है, जिससे पृथ्वी पर डेटा भेजने की गति में अभूतपूर्व सुधार होगा।

जब मानव जाति ने 4 अक्टूबर 1957 को 'स्पुतनिक 1' (Sputnik 1) लॉन्च किया था, तब अंतरिक्ष केवल एक अवलोकन स्थल था। लेकिन आज पृथ्वी की कक्षा में हजारों उपग्रह घूम रहे हैं। ये उपग्रह लगातार अरबों गीगाबाइट कच्चा डेटा एकत्र करते हैं, जिसे पृथ्वी पर भेजने के लिए 'डाउनलिंक' (downlink: उपग्रह से पृथ्वी पर डेटा ट्रांसमिट करने की प्रक्रिया) पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, सीमित 'कम्युनिकेशन विंडो' (communication window: पृथ्वी और उपग्रह के बीच संपर्क का समय) के कारण यह प्रक्रिया अत्यंत धीमी साबित होती है। इस जटिल समस्या का समाधान करने के लिए टेक्नोलॉजी स्टार्टअप Satlyt ने कक्षा में ही डेटा प्रोसेस कर सकने वाले 'वर्चुअल डेटा सेंटर' (virtual data center: सॉफ्टवेयर से जुड़ा कंप्यूटिंग नेटवर्क) के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
Google और SpaceX के पूर्व कर्मचारी रमा अफुल्लो (Rama Afullo) द्वारा वर्ष 2024 में स्थापित की गई Satlyt कंपनी ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है जो मौजूदा उपग्रहों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर स्पेस डेटा प्रोसेसिंग नेटवर्क बना सके। इस ऑर्बिटल डेटा सेंटर कॉन्सेप्ट के जरिए उपग्रहों पर ही 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (artificial intelligence: कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और अन्य कंप्यूटेशनल एप्लिकेशन चलाए जा सकेंगे। इस तकनीक के कारण उपग्रह जहां डेटा एकत्र करता है, उसके करीब ही उसका विश्लेषण हो जाएगा, जिससे पृथ्वी पर मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले विश्लेषण पर निर्भरता कम होगी।
| देश | उपग्रहों की संख्या |
|---|---|
| यूनाइटेड स्टेट्स (USA) | 8,530 |
| रूस | 1,559 |
| चीन | 908 |
| कुल वैश्विक संख्या | 12,952 |
13 महीने की मेहनत और सफल परीक्षण: रमा अफुल्लो का प्रयोग
अंतरिक्ष में डेटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में Satlyt ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। लगभग 13 महीने की कड़ी मेहनत के बाद कंपनी ने अक्टूबर 2026 के पहले पंद्रह दिनों में कक्षा में एक सफल परीक्षण पूरा किया था। यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के साथ मिलकर और 'नासा' (NASA) की फंडिंग से चल रहे अनुसंधान प्रोजेक्ट के तहत यह प्रयोग किया गया था। अफुल्लो के अनुसार, उपयोगकर्ताओं को केवल अनुमति, प्राथमिकताएं और ऑपरेटिंग सीमाएं तय करनी होंगी, जबकि सॉफ्टवेयर उन सीमाओं में रहकर स्वयं निर्णय लेगा।
कंपनी का यह सॉफ्टवेयर अब तक कक्षा में मौजूद 3 उपग्रहों पर सफलतापूर्वक इंस्टॉल किया जा चुका है। नासा के मिशन भी ऐसी ही सीमाओं का सामना करते हैं, जिनमें सीमित कंप्यूटिंग संसाधन, समय-समय पर बाधित होने वाला कम्युनिकेशन और पृथ्वी पर लोगों तक तेजी से उपयोगी जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता शामिल है। कक्षा में चले इस प्रयोग में Satlyt के सॉफ्टवेयर ने दिखाया कि वह उपलब्ध कंप्यूटिंग क्षमता और कनेक्टिविटी के आधार पर विभिन्न उपग्रहों के बीच कार्य का बंटवारा कर सकता है।
ઉપગ્રહો
किस तरह काम करती है यह सिस्टम? सिमुलेशन और वास्तविकता
इस परीक्षण के दौरान कंपनी ने 4 कंप्यूटर, 4 यूज़र्स और 8 सेवाओं वाला एक सिम्युलेटेड नेटवर्क तैयार किया था। सॉफ्टवेयर ने उपलब्ध 'कंप्यूट' (compute: कंप्यूटिंग प्रक्रिया करने की क्षमता) और संचार सुविधाओं का मूल्यांकन करके कार्य सौंपने की एक उचित योजना बनाई थी। अंतरिक्ष यान में मौजूद केवल 1 भौतिक कंप्यूटर पर यह सॉफ्टवेयर रन किया गया था, जबकि बाकी के 3 कंप्यूटर केवल सिमुलेशन के रूप में थे। अंततः इस प्रोसेसिंग के परिणाम पृथ्वी पर वापस भेजे गए थे।
इस प्रयोग से यह साबित हुआ है कि Satlyt का सॉफ्टवेयर अंतरिक्ष में हार्डवेयर पर प्रोसेसिंग प्लान बना सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई अंतरिक्ष यान पृथ्वी पर किसी दावानल (wildfire) को देखता है, तो यह सॉफ्टवेयर पूरा कच्चा डेटा भेजने के बजाय केवल सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पृथ्वी पर तेज़ी से भेज देता है। इससे सीमित कम्युनिकेशन विंडो का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सकता है।
- डेटा एकत्र करनाअंतरिक्ष यान पृथ्वी पर की घटनाओं जैसे कि दावानल या प्राकृतिक आपदा का कच्चा डेटा या छवियां एकत्र करता है।
- नेटवर्क मूल्यांकनसॉफ्टवेयर कक्षा में उपलब्ध कंप्यूटिंग क्षमता और कम्युनिकेशन कनेक्टिविटी की जांच करता है।
- कामकाज का बंटवारातय की गई परमिशन और प्राथमिकता के अनुसार सॉफ्टवेयर कंप्यूटिंग कार्यों को विभिन्न उपग्रहों के बीच बांटता है।
- त्वरित डाउनलिंककच्चा विशाल डेटा भेजने के बजाय केवल प्रोसेस की गई उपयोगी जानकारी ही पृथ्वी पर वापस भेजी जाती है।
इस तकनीक की सफलता में कुछ दिलचस्प निष्कर्ष भी सामने आए थे। परीक्षण के दौरान एक दृष्टिकोण सबसे बेहतर तरीके से काम कर रहा था, लेकिन उसे अन्य दृष्टिकोण की तुलना में अधिक कंप्यूटिंग पावर की आवश्यकता पड़ी थी। इसके अलावा सॉफ्टवेयर में समय के संदर्भ में एक तकनीकी त्रुटि भी देखी गई थी। सॉफ्टवेयर विलंब के समय को 'एलाप्स्ड डिले' (elapsed delay: डेटा पहुँचने में लगा समय) के बजाय 'अराइवल टाइम' (arrival time: पहुँचने का समय) के रूप में स्टैम्प कर रहा था। हालाँकि, अफुल्लो के अनुसार इससे प्रयोग विफल नहीं हुआ, क्योंकि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, ऑनबोर्ड एक्जीक्यूशन और आउटपुट वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह से सफल रही थी।

अंतरिक्ष का इतिहास और उपग्रहों के विशिष्ट आँकड़े
मानवजाति द्वारा लॉन्च किए गए पहले मानव निर्मित उपग्रह 'स्पुतनिक 1' से शुरू होकर आज अंतरिक्ष क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन आया है। जून 2025 तक के आँकड़ों के अनुसार पृथ्वी की कक्षा में कुल 12,952 उपग्रह चक्कर लगा रहे हैं। जिनमें से सबसे अधिक 8,530 उपग्रह यूनाइटेड स्टेट्स के हैं। रूस के पास 1,559 और चीन के पास 908 उपग्रह कक्षा में सक्रिय हैं। लगभग 90% उपग्रह 'लो अर्थ ऑर्बिट' (low Earth orbit: पृथ्वी के निकट की निचली कक्षा) या जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थित हैं।

वर्ष 2020 में 1,000 से अधिक सक्रिय उपग्रहों वाले SpaceX के Starlink नेटवर्क ने बड़े उपग्रह इंटरनेट कॉन्स्टेलेशन का निर्माण किया था। आज उपग्रहों की बढ़ती संख्या के कारण डेटा का आकार भी अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। जहाँ शुरुआती उपग्रह केवल रेडियो सिग्नल या मौसम की तस्वीरें भेजते थे, वहीं वर्तमान समय में पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन उपग्रह अरबों बाइट्स का डेटा एकत्र करते हैं।

सीमाएँ और भविष्य की चुनौतियाँ: आगामी कदम
Satlyt कंपनी ने कंप्यूटिंग कार्यों को साझा करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। सॉफ्टवेयर को विभिन्न वर्कलोड, हार्डवेयर और कनेक्टिविटी स्थितियों में परखा जाना बाकी है। इसके अलावा, अलग-अलग अंतरिक्ष यान ऑपरेटरों से अनुमति लेना, सुरक्षित डेटा ट्रांसफर, रिसोर्स शेड्यूलिंग और कनेक्शन टूटने पर रिकवरी जैसे क्षेत्रों में अभी विकास की आवश्यकता है।
कंपनी के अनुसार, आगामी तकनीकी कदमों में व्यापक वैलिडेशन और इंटीग्रेशन शामिल होंगे। इसके बाद अलग-अलग अंतरिक्ष यानों के बीच कंप्यूटिंग कार्यों को साझा करने की क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा। रमा अफुल्लो का दीर्घकालिक विजन यह है कि डेवलपर्स हर मिशन के लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए बिना सीधे अंतरिक्ष के लिए एप्लिकेशन बना सकें, जो वास्तव में अंतरिक्ष में एक वर्चुअल AI डेटा सेंटर का निर्माण करेगा।


