ध्वनि तरंगों का सटीक प्रहार: मस्तिष्क के घातक कैंसर के खिलाफ फोकस्ड अल्ट्रासाउंड की नई क्रांति
यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के वैज्ञानिकों ने ब्लड-ब्रेन बैरियर को भेदकर माइक्रो-आरएनए पहुंचाने के लिए ध्वनि तरंगों और सूक्ष्म बुलबुलों का अनूठा समन्वय साधा है।

मानव शरीर के सबसे संवेदनशील और जटिल अंग यानी मस्तिष्क में जब कैंसर की गांठ प्रवेश करती है, तो उसे नियंत्रित करना आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए सबसे कठिन चुनौतियों में से एक बन जाता है। वयस्कों में मस्तिष्क से ही उत्पन्न होने वाले कैंसर में 'ग्लियोब्लास्टोमा' (Glioblastoma) सबसे सामान्य और अत्यंत आक्रामक गांठ है। इस जानलेवा बीमारी से लड़ने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया (University of Virginia - UVA) कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं ने एक विशिष्ट प्रायोगिक पद्धति विकसित की है। उन्होंने उच्च केंद्रित ध्वनि तरंगों यानी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (focused ultrasound), सूक्ष्म बुलबुलों और नैनोपार्टिकल्स के सहारे मस्तिष्क की सुरक्षात्मक दीवार को अस्थायी रूप से खोलकर कैंसर-रोधी आनुवंशिक कणों को पहुँचाने में सफलता प्राप्त की है।
यूवीए (UVA) स्कूल ऑफ मेडिसिन के माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी और कैंसर बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रोजर अबुनादेर (Roger Abounader) और उनकी टीम ने पाया कि 'माइक्रो-आरएनए' (microRNA) नामक छोटे आनुवंशिक अणु ग्लियोब्लास्टोमा के विकास और प्रसार के लिए जिम्मेदार कई जीनों को एक साथ निष्क्रिय कर सकते हैं। लेकिन इन अणुओं को मस्तिष्क की गांठ तक पहुँचाने के लिए उन्होंने मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) निर्देशित फोकस्ड अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग किया था। इस अध्ययन के परिणाम प्रतिष्ठित 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन' (Journal of Clinical Investigation - JCI) में ओपन एक्सेस के रूप में प्रकाशित हुए हैं।
ग्लियोब्लास्टोमा की घातककता और ब्लड-ब्रेन बैरियर का अभेद्य किला
ग्लियोब्लास्टोमा को चिकित्सा जगत में पहले 'ग्लियोब्लास्टोमा मल्टीफॉर्म' (GBM) के रूप में जाना जाता था। यह मस्तिष्क में होने वाली सभी गांठों का 15% हिस्सा है और मस्तिष्क के भीतर ही पैदा होने वाले कैंसर में सबसे ऊपर है। अमेरिका में हर साल 13,000 से अधिक लोग इस एक ही बीमारी से मरते हैं। सामान्य तौर पर प्रति 1,00,000 व्यक्तियों में लगभग 3 लोगों में यह रोग देखा जाता है और इसके निदान की औसत आयु 64 वर्ष होती है। सिरदर्द, जी मिचलाना और उल्टी, दौरे पड़ना (seizures), याददाश्त कम होना तथा व्यवहार और स्वभाव में अचानक बदलाव आना इसके शुरुआती गैर-विशिष्ट लक्षण हैं, जो अक्सर स्ट्रोक जैसे भी लगते हैं।
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यह कैंसर इतना खतरनाक क्यों है, इसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, ग्लियोब्लास्टोमा की कोशिकाएं आसपास के स्वस्थ मस्तिष्क के ऊतकों में जड़ें जमाकर तेजी से फैल जाती हैं, जिससे सर्जनों के लिए सर्जरी द्वारा गांठ का पूरा हिस्सा पूरी तरह काटकर बाहर निकालना लगभग असंभव हो जाता है। दूसरा और सबसे बड़ा अवरोध है मस्तिष्क का प्राकृतिक सुरक्षा कवच—जिसे 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' (blood-brain barrier - BBB) कहा जाता है। यह सुरक्षा व्यवस्था मस्तिष्क को रक्त में मिले जहरीले तत्वों और संक्रमण से बचाती है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए दी जाने वाली अधिकांश दवाओं को भी मस्तिष्क में प्रवेश करने नहीं देती है।
| उपप्रकार (Subtype) | मुख्य आनुवंशिक परिवर्तन | विशेष लक्षण |
|---|---|---|
| क्लासिकल (Classical) | EGFR जीन की अतिरिक्त प्रतियां (97% में), क्रोमोसोम 10 का नुकसान और 7 का विस्तार | TP53 में सामान्यतः परिवर्तन नहीं होता; EGFR का उच्च स्तर देखा जाता है |
| प्रोन्यूरल (Proneural) | TP53 (p53) और PDGFRA जीन में उच्च दर पर परिवर्तन | प्लेटलेट-डिराइव्ड ग्रोथ फैक्टर रिसेप्टर अल्फा के साथ जुड़ा हुआ |
| मेसेनकाइमल (Mesenchymal) | NF1 (न्यूरोफाइब्रोमिन 1) जीन में बड़े पैमाने पर म्यूटेशन | EGFR जीन में कम परिवर्तन और उसका कम एक्सप्रेशन |
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वर्ष 2021 के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गांठों के वर्गीकरण के अनुसार, अब केवल 'IDH वाइल्ड टाइप' जीन वाली गांठों को ही ग्लियोब्लास्टोमा के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इस कैंसर के रोगियों को सर्जरी के बाद टेमोज़ोलोमाइड (temozolomide) नामक कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। इसके बावजूद, अधिकतम उपचार के बाद भी यह कैंसर लगभग हमेशा दोबारा उभर आता है। उपचार के बिना रोगी केवल 3 महीने जीवित रह सकता है, जबकि आक्रामक उपचार के बाद भी सामान्य जीवन बनाए रखने की अवधि (median survival) केवल 10 से 13 महीने ही रहती है, और 5 वर्ष से अधिक जीवित रहने की दर 5% से 10% से भी कम है।
| उपचार की स्थिति | औसत जीवनकाल |
|---|---|
| उपचार के बिना | 3 महीने |
| आक्रामक उपचार के साथ | 10 से 13 महीने |
| 5 वर्ष से अधिक जीवित रहने की दर | 5% से 10% से कम |
ध्वनि तरंगों का कमाल: आवर्धक लेंस जैसा केंद्रित प्रभाव
इस अभेद्य ब्लड-ब्रेन बैरियर को अस्थायी रूप से खोलने के लिए शोधकर्ताओं ने हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (High-intensity focused ultrasound - HIFU) का उपयोग किया है। सामान्य डायग्नोस्टिक अल्ट्रासाउंड केवल आंतरिक अंगों की तस्वीर देखने के लिए होता है, जबकि फोकस्ड अल्ट्रासाउंड में ध्वनि तरंगों को एक निश्चित बिंदु पर एकत्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया को आवर्धक लेंस (magnifying glass) द्वारा सूर्य के प्रकाश की किरणों को कागज के एक छोटे से टुकड़े पर केंद्रित करने के उदाहरण से समझा जा सकता है; जिस तरह आसपास कुछ भी नहीं जलता लेकिन केंद्र बिंदु पर प्रचंड गर्मी पैदा होती है, उसी तरह अल्ट्रासाउंड बीम बीच के सामान्य ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना गहराई में स्थित टारगेट तक ऊर्जा पहुंचाती है।

चिकित्सीय उपयोग में जब ऊतक को नष्ट करना होता है, तब निरंतर तरंगें देकर तापमान 65 से 85 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाया जाता है, जिससे कोशिकाओं का प्रोटीन जम जाता है जिसे कोगुलेटिव नेक्रोसिस (coagulative necrosis) कहते हैं। ऊतक यदि 60 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर केवल 1 सेकंड भी रहे तो वह स्थायी रूप से नष्ट हो जाता है। लेकिन मस्तिष्क कैंसर की दवा की डिलीवरी के लिए शोधकर्ताओं ने पल्स आधारित ध्वनि तरंगों और 'माइक्रोबबल्स' (सूक्ष्म गैस भरे बुलबुले) की तकनीक चुनी है।
माइक्रोबबल्स और नैनोपार्टिकल्स: लक्ष्यभेदी प्रहार की कार्यप्रणाली
इस पद्धति में रोगी के रक्त प्रवाह में अतिसूक्ष्म माइक्रोबबल्स और माइक्रो-आरएनए ले जाने वाले विशिष्ट नैनोपार्टिकल्स डाले जाते हैं। जब मस्तिष्क के विशिष्ट कैंसरग्रस्त क्षेत्र पर एमआरआई (MRI) की निगरानी में फोकस्ड अल्ट्रासाउंड की तरंगें डाली जाती हैं, तब उस क्षेत्र की रक्त वाहिकाओं में मौजूद ये सूक्ष्म बुलबुले ध्वनि दबाव के कारण फैलते और सिकुड़ते हैं। इस प्रक्रिया को स्टेबल कैविटेशन (stable cavitation) कहा जाता है।
- 1. दवा और बुलबुलों का इंजेक्शनकैंसर-विरोधी माइक्रो-आरएनए युक्त नैनोपार्टिकल्स और सूक्ष्म माइक्रोबबल्स को रोगी के रक्तप्रवाह में प्रविष्ट किया जाता है।
- 2. एमआरआई निर्देशित लक्ष्य निर्धारणएमआरआई इमेजिंग द्वारा मस्तिष्क में गांठ का सटीक स्थान निर्धारित करके अल्ट्रासाउंड तरंगों को केवल उसी भाग पर केंद्रित किया जाता है।
- 3. कैविटेशन और बैरियर का खुलनाध्वनि तरंगों के दबाव से माइक्रोबबल्स कंपन करते हैं, जिसके कारण ब्लड-ब्रेन बैरियर की संरक्षक दीवारें क्षणिक समय के लिए खुल जाती हैं।
- 4. नैनोपार्टिकल्स का प्रवेश और आनुवंशिक नियंत्रणखुले मार्ग से नैनोपार्टिकल्स कैंसर कोशिकाओं में प्रवेश कर माइक्रो-आरएनए मुक्त करते हैं, जो गांठ बढ़ाने वाले बहुविध जीनों को रोकते हैं।

इन बुलबुलों के हल्के कंपन ब्लड-ब्रेन बैरियर की कोशिकाओं के बीच की दीवारों (tight junctions) को क्षणिक समय के लिए ढीला कर देते हैं। इस अल्पकालिक खिड़की का लाभ उठाकर नैनोपार्टिकल्स रक्त से सीधे मस्तिष्क के ऊतकों और कैंसरग्रस्त कोशिकाओं में प्रवेश कर जाते हैं। एक बार अंदर पहुंचने के बाद नैनोपार्टिकल्स से मुक्त हुए माइक्रो-आरएनए कैंसर कोशिकाओं के विभाजन और विकास के लिए जिम्मेदार जीनों की गतिविधि को रोक देते हैं।
पारंपरिक कैंसर की दवाएं आमतौर पर किसी एक विशिष्ट जैविक प्रक्रिया को लक्षित करती हैं। लेकिन ग्लियोब्लास्टोमा में असाधारण आनुवंशिक विविधता होती है और यह आसानी से एक ही दवा के प्रभाव के प्रति प्रतिरोध (resistance) विकसित कर लेता है। यदि एक से अधिक पारंपरिक दवाओं का मिश्रण रोगी को दिया जाए, तो इसके शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं। इसके अलावा, कैंसर की वृद्धि में शामिल कई अणु ऐसे हैं जिनके लिए अभी तक कोई दवा नहीं खोजी गई है। इसके विपरीत, माइक्रो-आरएनए में एक साथ कई समस्याग्रस्त जीनों की गतिविधि को दबाने की प्राकृतिक क्षमता होती है। प्रयोगशाला और जानवरों के मॉडल पर किए गए परीक्षणों में देखा गया कि इस थेरेपी से ट्यूमर का फैलाव धीमा हो गया और जानवरों की आयु में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

भविष्य की संभावनाएं और क्लिनिकल ट्रायल्स का मार्ग
अल्ट्रासाउंड तकनीक के क्षेत्र में यूवीए हेल्थ (UVA Health) लंबे समय से अग्रणी रहा है। कैंसर देखभाल में इसकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए, यूवीए द्वारा चार्लोट्सविले स्थित 'फोकस्ड अल्ट्रासाउंड फाउंडेशन' के साथ मिलकर दुनिया का पहला 'फोकस्ड अल्ट्रासाउंड इम्यूनो-ऑन्कोलॉजी (FUSION) सेंटर' स्थापित किया गया है। इस केंद्र में फोकस्ड अल्ट्रासाउंड को कैंसर इम्यूनोथेरेपी के साथ जोड़कर उपचार करने की पद्धतियों पर शोध चल रहा है। यूवीए कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर अमेरिका की नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) द्वारा 'कॉम्प्रिहेंसिव' दर्जा प्राप्त करने वाले देश के केवल 57 केंद्रों में से एक है।
इस प्रोजेक्ट को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक द्वारा अनुदान प्राप्त हुआ था। यूवीए का पॉल एंड डियान मैनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी भी नई दवाओं को तेजी से मरीजों तक पहुंचाने के लिए क्लिनिकल ट्रायल्स नेटवर्क तैयार कर रहा है। हालांकि यह नवीन रणनीति फिलहाल प्रयोगशाला और पशु परीक्षणों के चरण में सफल रही है और मनुष्यों पर व्यापक क्लिनिकल ट्रायल होने में अभी थोड़ा समय लगेगा।
यदि यह पद्धति मानवीय परीक्षणों में भी अपेक्षित सफलता प्राप्त करती है, तो यह न केवल ग्लियोब्लास्टोमा, बल्कि अल्जाइमर, पार्किंसंस और मस्तिष्क के अन्य जटिल रोगों में भी दवाएं पहुंचाने के लिए एक क्रांतिकारी माध्यम साबित हो सकती है। ध्वनि तरंगों का यह अहिंसक और लक्ष्यभेदी प्रहार भविष्य में सबसे क्रूर कैंसर के खिलाफ मानवजाति का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।


