उमर अब्दुल्ला, सारा अली खान और मोहम्मद दीपक के खिलाफ फतवा जारी
बरेली के मौलाना ने तीन दिनों में तीन अलग-अलग विषयों पर फतवा देकर विवाद खड़ा किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, सुबह 7:09 · 4 मिनट का पाठ
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उत्तर प्रदेश के बरेली से मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान और उत्तराखंड के एक युवक के खिलाफ लगातार तीन दिनों में तीन अलग-अलग फतवा जारी किए हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ये फतवा उमर अब्दुल्ला के विवाह, सारा अली खान की केदारनाथ में पूजा और एक युवक द्वारा अपने नाम के साथ 'मोहम्मद' शब्द जोड़ने के विषयों पर दिए गए हैं। मौलाना ने इन तीनों बातों को शरीयत के विरुद्ध और अमान्य माना है।
प्रथम फतवे के तहत, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पूर्व पत्रकार निधि राजदान के संबंधों और विवाह के संबंध में अपनी राय दी है। मौलाना के अनुसार, उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान का विवाह शरीयत के नियमों के अनुसार पूरी तरह से अमान्य है। उन्होंने शरीयत के बुनियादी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि निकाह के लिए पहली शर्त यह है कि लड़का और लड़की दोनों को कलमा पढ़कर इस्लाम का अनुयायी बनना चाहिए। यदि दोनों में से कोई भी गैर-मुस्लिम रहता है, तो वह विवाह मान्य नहीं हो सकता।
मौलाना ने स्पष्ट किया है कि उमर अब्दुल्ला मुस्लिम हैं जबकि निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं, इसलिए यह संबंध विवाह नहीं बल्कि गैर-शरीई है। मौलाना के अनुसार, उमर अब्दुल्ला को विवाह करने से पहले निधि राजदान को कलमा पढ़ाकर उचित रूप से इस्लाम स्वीकार कराना चाहिए था। धर्म परिवर्तन न होने के कारण, यह निकाह इस्लाम की दृष्टि से पूरी तरह से अमान्य है।
दूसरे फतवे में, बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान द्वारा केदारनाथ धाम में दर्शन और पूजा करने के मामले में मौलाना ने कड़े शब्द कहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शरीयत की रोशनी में किसी भी मुस्लिम के लिए मंदिर जाना, दर्शन करना या पूजा-अर्चना करना पूरी तरह से अमान्य और हराम है। उन्होंने देशभर के मुस्लिम युवाओं के प्रश्नों का हवाला देते हुए बताया कि इस्लाम अपने अनुयायियों को शिर्क यानी मूर्तिपूजा या गैर-इस्लामी धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति नहीं देता है।
सारा अली खान द्वारा मंदिर जाकर आधे घंटे तक पूजा-पाठ किया गया था, जिसे मौलाना ने शरीयत के नियमों का सीधा उल्लंघन माना है। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस कृत्य के बाद सारा अली खान शरीयत की नजर में अपराधी बन गई हैं और बड़े पाप की भागीदार बनी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें तुरंत खुदा के दरबार में सच्चे हृदय से माफी मांगकर तौबा करना चाहिए।
तीसरा फतवा उत्तराखंड के कोटद्वार के निवासी दीपक कुमार के खिलाफ जारी किया गया है। दीपक कुमार ने अपने नाम के आगे 'मोहम्मद' शब्द जोड़ा था। मौलाना ने इस मामले पर भी सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि शरीयत में किसी भी गैर-मुस्लिम के लिए अपने नाम के साथ 'मोहम्मद' लगाना पूरी तरह से ममनू यानी वर्जित है। मौलाना ने तर्क दिया कि 'मोहम्मद' कोई सामान्य शब्द नहीं है, बल्कि इस्लाम के पैगंबर का अत्यंत पवित्र, बरकतवाला और गरिमामय नाम है। यह नाम रखने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को है जो इस्लाम और कुरान पर ईमान रखता हो।
मौलाना ने आगे बताया कि हालांकि दीपक ने एक बुजुर्ग मुस्लिम के समर्थन में भावुक होकर यह नाम रखा था, लेकिन धार्मिक सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। मौलाना ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार करता है तभी यह नाम उचित है, अन्यथा दीपक को अपने मूल नाम और सही पहचान के साथ ही जीना चाहिए।
बरेली के मरकज से जुड़े उलेमा इन फतवों को इस्लामी सिद्धांतों का संरक्षण मान रहे हैं। दूसरी ओर, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस मामले को व्यक्तिगत निर्णयों और निजी स्वतंत्रता में सीधा हस्तक्षेप माना जा रहा है। एक मुख्यमंत्री, एक जानी-मानी अभिनेत्री और एक सामान्य नागरिक के नाम आए इन फतवों ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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