युवाओं की समस्याओं के लिए संवाद और लोकतंत्र में चुनाव के जरिए ही परिवर्तन जरूरी: होसबल
इंदौर में आरएसएस की वार्षिक बैठक के बाद महासचिव दत्तात्रेय होसबल के महत्वपूर्ण बयान।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:00 · अपडेट सुबह 2:08 · 8 मिनट का पाठ
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इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक समाप्त होने के बाद, संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबल द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों पर बयान दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, होसबल के अनुसार युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी शिकायतों पर ध्यान देना और उसके लिए संवाद स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने देश के भीतर और बाहर की कुछ "अराजक शक्तियों" के बारे में भी चेतावनी दी, जो युवाओं को राजनीतिक हितों, सामाजिक विभाजन और हिंसा के लिए उकसाने और उनका दुरुपयोग करने का प्रयास कर रही हैं।
दिल्ली के जंतर मंतर पर हाल ही में हुए 'Gen Z' के आंदोलनों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर होसबल ने कहा कि कुछ अराजक शक्तियां देश के भीतर और बाहर युवाओं को उकसाने के लिए साजिश रच रही हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि किसी भी समाज और सरकार को युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए और संघ युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने पर जोर देता है।
होसबल द्वारा 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले जेपी आंदोलन का उल्लेख किया गया, जो उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि हर युवा पीढ़ी में सत्ता विरोधी भावना जन्म लेती है। उन्होंने आगे बताया कि इस ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ने के रास्ते हैं, लेकिन इसका राजनीतिक स्वार्थ के लिए दुरुपयोग करना, समाज को तोड़ने का प्रयास करना या हिंसा का उपयोग करना बिल्कुल उचित नहीं है और संघ इस बात का विरोध करता है। उन्होंने स्वीकार किया कि जब वे स्वयं युवा थे तब उन्होंने गुस्से में विरोध प्रदर्शन किए थे और वे जेपी आंदोलन में भी शामिल थे। होसबल के अनुसार युवा ऊर्जा महत्वपूर्ण है लेकिन इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय सही दिशा में मोड़ना चाहिए।
सरकार में परिवर्तन लाने के बारे में बात करते हुए होसबल ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का परिवर्तन केवल चुनावों के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'रीजीम चेंज' या शासन परिवर्तन के लिए अशांति, विभाजन या हिंसा फैलाना समाज के हित में नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से राजनीतिक परिवर्तन कानूनी है, लेकिन अराजकता फैलाना गलत है।
चुनाव पत्र के सुधारों के बीच, होसबल ने चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का समर्थन किया। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और शुद्ध बनाना आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और गैर-नागरिकों के नाम हटाए जाने चाहिए। होसबल के अनुसार, इस प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 13 करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार कोई भी हो, तब भी मतदाता सूचियों को शुद्ध किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान उन्हें स्वयं भी एक नोटिस मिला था, लेकिन उन्होंने प्रक्रिया का पालन किया था इसलिए उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं थी।
दूसरी ओर, विपक्ष द्वारा SIR के खिलाफ किए जा रहे विरोध पर होसबल ने आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल अपने एजेंडे के अनुसार काम कर सकते हैं, लेकिन विपक्ष को केवल विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि यह जांचना चाहिए कि उस मुद्दे में सच्चाई है या नहीं। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम गलती से हटा दिए गए हैं, वे चुनाव आयोग या अदालतों के माध्यम से उपाय खोज सकते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध करने वालों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
आरक्षण और कोटा के मुद्दे पर होसबल ने कहा कि जब तक भेदभाव से उत्पन्न सामाजिक और शैक्षिक असमानताएं दूर नहीं हो जातीं, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इसके लाभ सभी पात्र समुदायों तक पहुंचने चाहिए। यदि लाभार्थी चाहें तो सुधारों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन आरक्षण का उपयोग वोटबैंक की राजनीति के लिए नहीं होना चाहिए।
आरएसएस के पंजीकरण के सवालों के जवाब में होसबल ने स्पष्ट किया कि कोई भी कानून आरएसएस के पंजीकरण को अनिवार्य नहीं बनाता है। उन्होंने तर्क दिया कि संघ समाज से अलग नहीं है बल्कि उसे संगठित करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि संस्था संविधान के अनुसार कार्य करती है और तमिलनाडु तथा कर्नाटक जैसे राज्यों में जब अनुमति नहीं दी गई, तब संघ को न्यायिक समर्थन भी मिला। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खर्गे ने आरएसएस से पंजीकरण करने और उसके वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने का बार-बार अनुरोध किया है, जिसका संदर्भ यहाँ महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघ की भूमिका के बारे में बात करते हुए होसबल ने कहा कि आरएसएस का अंतरराष्ट्रीय संस्था बनने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, जब विदेशी मीडिया, विधायकों, विश्वविद्यालयों और थिंक टैंकों में संघ को उसके कार्य के बारे में समझाने, आलोचना का जवाब देने या अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाता है, तब संघ विदेश में सक्रिय होता है।
संस्थागत ढांचे में बड़े बदलावों की घोषणा करते हुए होसबल ने बताया कि पश्चिम बंगाल में पिछले एक वर्ष में आरएसएस की शाखाओं में 150% की वृद्धि हुई है, जो राज्य में भाजपा की सरकार के गठन के साथ सुसंगत है। उन्होंने कहा कि पहले वहां शाखाएं चलाने का प्रयास करते समय सीधे और शारीरिक विरोध का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। उन्होंने आगे बताया कि नवंबर-दिसंबर में संस्थागत चुनावों के बाद नए प्रमुखों और कार्यकारी समितियों का चयन किया जाएगा और 88 संभाग (divisions) बनाए जाएंगे। भविष्य की कार्ययोजना इन 88 संभागों के परिप्रेक्ष्य में तैयार की जाएगी।
संघ के कार्यकर्ताओं के खिलाफ अतीत में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए होसबल ने कहा कि उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में, जिनमें त्रिपुरा, असम और केरल शामिल हैं, वहां संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या की गई थी। इसके बावजूद संस्था अपना विस्तार जारी रखे हुए है।
बढ़ते ड्रग्स के प्रश्न पर होसबल ने बताया कि प्रशासनिक तंत्र ड्रग नेटवर्क का सामना करने के लिए काम कर रहा है और गृह मंत्री इस दिशा में कदम उठा रहे हैं। संघ भी जागरूकता, पुनर्वास और मानसिक काउंसलिंग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक समर्पित प्रोजेक्ट के बारे में भी बैठक में चर्चा की गई। सोशल मीडिया और ओटीटी कंटेंट के बारे में बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीकी प्रभाव को केवल नियंत्रणों के माध्यम से रोकना कठिन है। टिकटॉक पर प्रतिबंध और बच्चों के लिए इंटरनेट के नियमों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सरकारें नियम ला सकती हैं, लेकिन परिवारों और समाज की भी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भारत का एक अग्रणी हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा वाला संगठन है, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वैचारिक आधार के रूप में कार्य करता है। यह एक स्वैच्छिक संगठन है जो सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में जुड़ा हुआ है।
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