भारत का लक्ष्य 2030 तक अंतरिक्ष को मलबे से मुक्त बनाना
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद में कॉस्मोसर्व स्पेस की नई सुविधा का उद्घाटन किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:31 · अपडेट सुबह 7:01 · 6 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत अंतरिक्ष से मलबे को हटाने के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में उभर रहा है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज घोषणा की कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष को मलबे से मुक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि एक भारतीय स्टार्टअप अंतरिक्ष को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने पर काम कर रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने हैदराबाद के गचीबोवली स्थित VSD टेक पार्क में 'कॉस्मोसर्व स्पेस' की 'बेस-1' सुविधा का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में वे नई दिल्ली के कर्तव्य भवन से वर्चुअल माध्यम से मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े थे। इस अवसर पर तेलंगाना सरकार के आईटी और उद्योग मंत्री श्री डी. श्रीधर बाबू विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि कॉस्मोसर्व स्पेस के संस्थापक और सीईओ डॉ. चिरंजीवी फाहिंद्रा भी मौजूद थे।
मंत्री ने कहा कि सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने की भारत की बढ़ती क्षमताएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में देश के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व और पूरी मानवता के लिए सुरक्षित अंतरिक्ष वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि कॉस्मोसर्व स्पेस की यह पहल 'विश्व बंधु भारत' की भावना को साकार करती है, जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर मानवता के हित के लिए अंतरिक्ष की स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दिखाती है।
कॉस्मोसर्व स्पेस की 'बेस-1' सुविधा के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह लगभग 14,800 वर्ग फुट में फैली एक व्यापक और अत्याधुनिक सुविधा है। यहाँ अंतरिक्ष रोबोट्स की डिजाइनिंग, निर्माण और अंतरिक्ष जैसी स्थितियों में उनका परीक्षण किया जाता है। इस सुविधा का संचालन इसके मिशन कंट्रोल के माध्यम से किया जाता है। इस केंद्र में ऑर्बिटल रेंडेवू और कैप्चर लैब्स, स्पेस रोबोटिक्स इनोवेशन लैब्स, माइक्रोग्रैविटी सिमुलेशन प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट इंटीग्रेशन क्लीन रूम जैसी विशिष्ट क्षमताएं उपलब्ध हैं। यह सुविधा भारत की निजी अंतरिक्ष क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।
अंतरिक्ष में कार्यरत पुराने उपग्रह और रॉकेट के टुकड़े बहुत तेज गति से घूमते हैं, जो सक्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष स्टेशनों के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं। डॉ. सिंह ने कॉस्मोसर्व स्पेस की टीम द्वारा किए गए 'मिशन एम्ब्रेस' के कार्य की प्रशंसा की। इस मिशन के तहत जुलाई 2026 में कंपनी की स्थापना के एक वर्ष के भीतर अंतरिक्ष में 'सॉफ्ट रोबोटिक पेटल्स' का परीक्षण किया गया था। यह तकनीक रोबोटिक आर्म की तरह काम करेगी, जो मलबे को पकड़कर उसे नष्ट करने या सुरक्षित कक्षा में भेजने में मदद करेगी। मंत्री ने उल्लेख किया कि यह टीम इसरो (ISRO) और गगनयान कार्यक्रम में प्राप्त अनुभव को निजी क्षेत्र में सहयोगी मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही है।
भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास के बारे में बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सैटेलाइट सिस्टम के लिए पिक्सेल, प्रोपल्शन सिस्टम के लिए ड्रुव एयरोस्पेस नीदरलैंड और लॉन्च सेवाओं के लिए स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ कॉस्मोसर्व स्पेस की साझेदारी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पूर्ण समाधानों के लिए सहयोग की संस्कृति को दर्शाती है। भारतीय स्टार्टअप स्वदेशी पेलोड, बैटरी तकनीक, सैटेलाइट सिस्टम और निजी लॉन्च क्षमताओं को जोड़कर एकीकृत अंतरिक्ष मिशन विकसित कर रहे हैं और वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतरिक्ष क्षेत्र के परिवर्तनकारी सुधारों का श्रेय देते हुए मंत्री ने कहा कि यह यात्रा लगभग पांच से छह साल पहले शुरू हुई थी। न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और इन-स्पेस (IN-SPACe) की स्थापना के बाद देश के अंतरिक्ष इकोसिस्टम में बुनियादी बदलाव आया है। उन्होंने सांख्यिकीय जानकारी देते हुए बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और अगले दशक में इसके 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा, भारत का स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम भी एक अंक से बढ़कर अब लगभग 450 उद्यमों तक फैल गया है।
डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा या तकनीकी क्षमता की कभी कमी नहीं रही है, लेकिन युवाओं की असीम क्षमताओं को बाहर लाने के लिए एक अनुकूल इकोसिस्टम की आवश्यकता थी। उन्होंने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से अंतरिक्ष क्षेत्र में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया। इसके अलावा, उन्होंने विज्ञान और अनुसंधान में नवाचार को गति देने, सहयोग को मजबूत करने और उभरती प्रौद्योगिकियों को समर्थन देने के लिए परोपकारी योगदान बढ़ाने का अनुरोध किया।
भारत के अंतिम उद्देश्य के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता और संप्रभु क्षमताएं हासिल करना है। चंद्रयान और गगनयान कार्यक्रमों की सफलता यह साबित करती है कि भारत बहुत कम खर्च में जटिल और अत्याधुनिक मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने आगे कहा कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं का उपयोग गति शक्ति, स्मार्ट सिटी, आपदा तैयारी और अन्य कई क्षेत्रों में करके पृथ्वी पर जीवन को सुधारा जा रहा है, जिसका सीधा लाभ नागरिकों को मिल रहा है।
अंत में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कॉस्मोसर्व स्पेस की टीम के कार्य के लिए बधाई दी और कहा कि ऐसी पहल भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करेगी और उसकी भू-राजनीतिक प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगी। उन्होंने जल्द ही व्यक्तिगत रूप से इस सुविधा का दौरा करने और टीम के साथ बातचीत करने की उत्सुकता भी व्यक्त की।
केरल में इंटरनेशनल मैरीटाइम म्यूजियम और ओशिएनियम प्रोजेक्ट को गति देने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल के ड्राफ्ट मेमोरेंडम और आट्रिकल्स को मंजूरी दी।
पीसी मेमोरी विवाद के बाद सैम ऑल्टमैन ने अपना नाम बदलकर 'राम' रखा
ओपनएआई के सीईओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना नाम बदलकर 'राम ऑल्टमैन' कर लिया है।
रूसी विदेश मंत्री का फर्जी वीडियो शेयर करने पर प्रशांत भूषण के खिलाफ पुलिस शिकायत
सोशल मीडिया पर भ्रामक और उकसावे वाले वीडियो फैलाने के आरोप में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है।