मां के गिफ्ट डीड से पुत्र को इनकम टैक्स नोटिस से बड़ी राहत मिली
जयपुर ITAT ने ₹13.04 लाख की अस्पष्ट नकदी जमा के संबंध में टैक्स नोटिस रद्द की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 12:13 · अपडेट सुबह 12:24 · 6 मिनट का पाठ
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जयपुर इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए, मां से प्राप्त उपहार के आधार पर बैंक खाते में जमा की गई नकदी को अस्पष्ट आय मानने के आयकर विभाग के निर्णय को रद्द कर दिया है। इस मामले में श्री राम नामक व्यक्ति को ₹20.23 लाख के अस्पष्ट संपत्ति निवेश और ₹13.04 लाख की अस्पष्ट नकदी जमा करने के लिए टैक्स नोटिस मिली थी, लेकिन अंततः वे यह मामला जीत गए हैं।
बिजनेस न्यूजपेपर 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब राम ने एक संपत्ति खरीदी थी और अपने बैंक खाते में बड़ी राशि नकदी के रूप में जमा की थी, लेकिन उन्होंने कोई इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल नहीं किया था। इनकम टैक्स के असेसिंग ऑफिसर (AO) के पास ऐसे स्रोत थे कि राम ने ₹20.23 लाख की संपत्ति खरीदी थी और ₹13.04 लाख नकदी जमा की थी। इस जानकारी के आधार पर AO ने राम को ITR फाइल करने के लिए नोटिस भेजा था।
नोटिस के जवाब में, राम ने ₹2.14 लाख की आय घोषित करते हुए ITR फाइल किया था। हालांकि, AO ने राम का ITR देखने के बाद इस मामले को संदिग्ध घोषित कर दिया और संपत्ति निवेश तथा नकदी जमा दोनों को अस्पष्ट आय घोषित करते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू कर दी। इस निर्णय से नाराज होकर राम ने कमिश्नर ऑफ अपील्स (CIT A) के पास अपील की।
CIT (A) ने राम को आंशिक राहत दी थी। उन्होंने ₹20.33 लाख के अस्पष्ट संपत्ति निवेश के संबंध में टैक्स नोटिस रद्द कर दी थी, लेकिन ₹13.04 लाख की अस्पष्ट नकदी के संबंध में टैक्स नोटिस बरकरार रखी थी। इसलिए, राम ने अस्पष्ट नकदी के मुद्दे पर फिर से ITAT जयपुर के पास अपील की। अंततः, 6 अक्टूबर, 2026 को राम यह मामला जीत गए और अब अस्पष्ट नकदी और अस्पष्ट संपत्ति दोनों के संबंध में टैक्स नोटिस रद्द कर दी गई है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट वरुण सिंघल द्वारा 'ET वेल्थ ऑनलाइन' को दिए गए बयान के अनुसार, राम यह मामला इसलिए जीत पाए क्योंकि वे एक नोटराइज्ड गिफ्ट डीड पेश करने में सफल रहे। इस दस्तावेज़ में दो गवाह थे, जो दर्शाता था कि उनकी मां ने 2 फरवरी, 2012 को उन्हें ₹16 लाख दिए थे और यह राशि उन्होंने बैंक खाते में जमा की थी। यह जमा राशि फरवरी-मार्च 2012 के दौरान की गई थी।
यह राशि उनकी मां ने अपने पुराने सोने के गहने बेचकर प्राप्त की थी, जिसका एक रजिस्टर्ड वैल्यूअर द्वारा 31 मार्च, 2011 को ₹18.36 लाख का मूल्यांकन किया गया था। ITAT जयपुर ने नोट किया कि आयकर अधिनियम की धारा 2(41) के तहत मां एक रिश्तेदार है और रिश्तेदारों से प्राप्त उपहार पर टैक्स नहीं लगता है।
मामले के दौरान, राम के प्रतिनिधि के रूप में चार्टर्ड अकाउंटेंट निखिलेश कटारिया ने तर्क दिया कि राम की मां ने पुराने गहने बेचकर 3 फरवरी, 2012 को ₹16 लाख नकद राम को दिए थे। हालांकि, AO ने इस बात को अस्वीकार कर दिया क्योंकि सोने की वस्तुओं की विशिष्टता दर्शाने वाले कोई सहायक दस्तावेज नहीं थे। कटारिया ने तर्क दिया कि आभूषणों के व्यापार में यह प्रचलित है कि जब पुराने गहने बेचे जाते हैं, तो इनवॉइस में केवल कुल वजन दिखाया जाता है, अलग से विशिष्टता नहीं दी जाती है।
AO ने यह भी आरोप लगाया कि बेचे गए गहनों का वजन मूल्यांकन रिपोर्ट में बताए गए कुल सोने के वजन से काफी कम है। इसके जवाब में कटारिया ने स्पष्ट किया कि राम की मां ने केवल 642.300 ग्राम सोना ₹16.1 लाख में बेचा था और ₹16 लाख राम को उपहार के रूप में दिए थे। उन्होंने सबूत के तौर पर गवाहों के हस्ताक्षर वाला नोटराइज्ड गिफ्ट डीड पेश किया।
इनकम टैक्स विभाग की ओर से ACIT श्रीमती आरती रावते ने निचले अधिकारियों के आदेशों का समर्थन किया और अस्पष्ट आय की राशि जोड़ने का अनुरोध किया। हालांकि, ITAT जयपुर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि गिफ्ट डीड स्पष्ट रूप से बताती है कि 4 फरवरी, 2012 को राम को उपहार दिया गया था और उसके आधार पर उन्होंने बैंक में नकदी जमा की थी।
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा, "यह उपहार मां की ओर से है जो धारा 2(41) के तहत परिभाषित रिश्तेदारों में आती है। इसके अलावा, करदाता की मां ने अपने वृद्धावस्था में सोने के गहनों की बिक्री से प्राप्त राशि का एक हिस्सा उपहार के रूप में दिया था, जिस पर संदेह नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह दो गवाहों के साथ एक वैध नोटराइज्ड गिफ्ट डीड द्वारा समर्थित है और गहनों का मूल्य एक रजिस्टर्ड वैल्यूअर द्वारा निर्धारित किया गया था। इसलिए AO द्वारा किया गया जोड़ रद्द करने योग्य है।"
चार्टर्ड अकाउंटेंट वरुण सिंघल के अनुसार, भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए दान देने वाले के पास पैसा कहां से आया इसका प्रमाण होना चाहिए। लेनदेन के समय के दस्तावेज जैसे कि डीड, वैल्यूएशन और ज्वेलर का इनवॉइस रखना चाहिए। जमा राशि उपहार की तारीख के करीब होनी चाहिए और यदि संभव हो तो दान देने वाले के बैंक रिकॉर्ड भी रखने चाहिए।
दूसरी ओर, सितंबर महीने में केंद्रीय कर राजस्व में वार्षिक आधार पर 5% की वृद्धि हुई है, लेकिन आयकर, उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क के संग्रह में कमजोरी देखी गई है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में गिरावट के बाद सितंबर में संग्रह में सुधार हुआ है।
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