भारत और SACU के बीच व्यापार समझौते के लिए बातचीत शुरू
यह प्रारंभिक समझौता भविष्य में पूरे अफ्रीका के साथ व्यापक व्यापार समीकरणों के लिए एक मॉडल बन सकता है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:54 · अपडेट सुबह 3:39 · 4 मिनट का पाठ
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भारत और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के बीच प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के लिए बातचीत शुरू हो गई है। भारत सरकार के एक बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने 12 अगस्त को इस बातचीत के नियमों (terms of reference) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहली बार है जब भारत अफ्रीका के किसी क्षेत्रीय समूह के साथ व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहा है।
भारत में दक्षिण अफ्रीका के हाई कमिश्नर अनिल सुक्लाल ने मिंट (Mint) को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि यदि अगले एक वर्ष में SACU के साथ यह समझौता पूरा हो जाता है, तो यह भारत और पूरे अफ्रीका के बीच अधिक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों के लिए एक मॉडल बन सकता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस समझौते की सफलता भारत-अफ्रीका के व्यापक आर्थिक ढांचे के लिए आधार प्रदान करेगी।
प्रस्तावित PTA में वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच, मूल के नियम (rules of origin), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, व्यापार सुविधा, सेनेटरी और तकनीकी मानक, ट्रेड रेमेडीज और विवाद समाधान जैसे विभिन्न विषयों के शामिल होने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि SACU क्षेत्र में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में नई प्रतिभाओं के विकास में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
व्यापारिक संबंधों की बात करें तो, वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 26 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13.55% घटकर 15.56 अरब डॉलर हो गया है, जो 2024-25 में 18 अरब डॉलर था। इसी तरह, FY26 में SACU के साथ भारत का कुल व्यापार 12.2% घटकर 16.80 अरब डॉलर रहा, जो FY25 में 19.14 अरब डॉलर था। हालांकि, SACU में दक्षिण अफ्रीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसकी FY26 में कुल 16.8 अरब डॉलर के व्यापार में 15.56 अरब डॉलर यानी 92.63% हिस्सेदारी है।
भारत के लिए यह समझौता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण अफ्रीका और SACU के माध्यम से प्लैटिनम, मैंगनीज और कॉपर जैसे महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच मिल सकती है। क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन के लिए ये खनिज अत्यंत आवश्यक हैं और वर्तमान में प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इन खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। दूसरी ओर, प्रिटोरिया के लिए नई दिल्ली के साथ घनिष्ठ संबंध पश्चिमी बाजारों और चीन के अलावा आर्थिक साझेदारी में विविधता लाने, निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक एवं तकनीकी सहयोग बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
अनिल सुक्लाल ने आगे बताया कि दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले वर्ष देश आने का निमंत्रण दिया है, जो 70वीं वर्षगांठ के समारोह का हिस्सा होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और वे अपने साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लेकर जाएंगे। यह यात्रा SACU के साथ व्यापार वार्ता को नई गति देगी। सुक्लाल ने कहा कि हालिया राष्ट्रपति यात्रा के दौरान दक्षिण अफ्रीका ने भारत में अपना अब तक का सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजा था, जिसमें लगभग 120 उद्योगपति शामिल थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिक्स संबंधित कार्यक्रमों के अलावा भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच चार समर्पित द्विपक्षीय व्यापार बैठकों में भी भाग लिया। सुक्लाल के अनुसार, भारत वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका में उपलब्ध ऊर्जा उत्पादन और वितरण के अवसरों में रुचि रखता है।
नई दिल्ली वर्तमान में खुद को ग्लोबल साउथ की अग्रणी आवाज के रूप में स्थापित कर रही है। दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का मुख्य सदस्य है, जबकि भारत 2026 में इस समूह की प्रेसीडेंसी संभालेगा और सितंबर में नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा।
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