जेल में बीमार रहने वाले पूर्व डीजीपी की विदेश में नौकरी की अर्जी पर हाईकोर्ट के सवाल
जेल के अस्पताल में रहने वाले और बाहर आते ही विदेश जाने की इच्छा रखने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी के दावों पर अदालत ने विरोधाभास जताया।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, शाम 6:42 · अपडेट शाम 4:36 · 4 मिनट का पाठ
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एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टॉमिन जे. थाचनकारी द्वारा विदेश में काम करने के लिए दायर की गई अर्जी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने जेल में उनकी बीमारी के दावों और अब विदेश में रोजगार पाने के लिए फिट होने के दावों के बीच के विरोधाभास पर सवाल किया है। इससे पहले केरल के इस पूर्व डीजीपी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें सजा भी हुई थी। जेल जाते ही उन्होंने बीमारी का हवाला दिया था और बाद में जेल के अस्पताल में रहे थे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी।
न्यायाधीश ए. बदरुद्दीन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब वे जेल जाते हैं तो उन्हें गंभीर बीमारियां होती हैं, लेकिन रिहा होने के बाद उन्हें सऊदी अरब या अमेरिका की यात्रा करने में कोई दिक्कत नहीं होती और ऐसा कैसे हो सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे दावों से लोगों को यह लग सकता है कि अदालतें इस स्पष्ट विरोधाभास को समझ नहीं पा रही हैं। अदालत ने पूछा कि जेल में रहते समय वे कई बीमारियों का हवाला देते हैं और अब वे नौकरी करने के लिए विदेश जाने की अनुमति मांग रहे हैं, तो यह विरोधाभास क्यों है।
ये टिप्पणियां तब आईं जब अदालत थाचनकारी की उस अर्जी पर विचार कर रही थी जिसमें भारत छोड़ने से पहले पूर्व अनुमति लेने की शर्त में ढील मांगी गई थी। हाईकोर्ट ने इससे पहले 15 अक्टूबर को आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनकी 4 साल की जेल की सजा को निलंबित कर दिया था और उन्हें जमानत दे दी थी। अदालत ने उन्हें ₹30.84 लाख जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि जमा कराने और दो विश्वसनीय जमानतदारों के साथ ₹5 लाख के जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया था।
जमानत मिलने के बाद थाचनकारी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाने की अनुमति मांगी थी और कहा था कि शारजाह में एक ज्वेलरी ग्रुप के साथ ऑपरेशन्स मैनेजर के रूप में अपनी नौकरी फिर से शुरू करने के लिए जाना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि यदि वे वापस नहीं लौटे तो अपनी नौकरी खो सकते हैं और वे दुबई स्थित इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी में भागीदार भी हैं।
न्यायाधीश बदरुद्दीन ने मौखिक टिप्पणी की कि वे विदेश कैसे जा सकते हैं और नौकरी कैसे कर सकते हैं। एक बार जब वे जेल जाते हैं तो उन्हें लगता है कि उन्हें कई बीमारियां हैं और अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है और छूटने के बाद वे विदेश जाकर काम करना चाहते हैं। यह पूरी तरह से विरोधाभासी स्थिति है और इसे कैसे उचित ठहराया जा सकता है।
इस मामले में अदालत ने जेल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है, जिसमें हिरासत में बिताए गए लगभग 4 सप्ताह के दौरान थाचनकारी के अस्पताल में भर्ती होने का विवरण दिया जाए। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वे कितने दिनों तक जेल अस्पताल में भर्ती रहे, किन बीमारियों के लिए उन्हें उपचार मिला और अस्पताल के बाहर कितने दिन रहे।
अदालत ने कहा कि वित्तीय मामलों का हवाला देकर रोजगार के लिए विदेश यात्रा करने की उनकी अर्जी उचित है या नहीं, यह जांचने के लिए यह जानकारी आवश्यक है। अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि लोगों को ऐसा लगेगा कि न्यायपालिका का संचालन ऐसे लोगों द्वारा किया जाता है जिनमें दिमाग नहीं है।
उल्लेखनीय है कि कोट्टायम विजिलेंस कोर्ट द्वारा 17 सितंबर को थाचनकारी को उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के लिए 4 साल की कठोर कैद और ₹30.84 लाख का जुर्माना लगाया गया था। हाईकोर्ट ने अभी तक उनकी विदेश यात्रा की अनुमति मांगने वाली अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
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