2027 के विधानसभा पंचायत चुनाव से पहले पांच राज्यों में अधिकारियों के तबादले का आदेश
चुनाव आयोग ने गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अधिकारियों के तबादले के लिए दिशा-निर्देश जारी किए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, शाम 7:08 · अपडेट दोपहर 12:10 · 5 मिनट का पाठ
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भारतीय चुनाव आयोग ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के हिस्से के रूप में गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चुनाव संबंधी ड्यूटी करने वाले अधिकारियों के तबादले के निर्देश दिए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने उन अधिकारियों को स्थानांतरित करने का आदेश दिया है जो अपने गृह जिले में तैनात हैं या एक ही जिले में 3 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत हैं।
चुनाव आयोग ने मुख्य सचिवों और मुख्य चुनाव अधिकारियों को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि इस दिशा-निर्देश के अंतर्गत आने वाले किसी भी अधिकारी को उनके वर्तमान जिले में बने रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड के लिए 3 वर्ष पूरे करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2027 निर्धारित की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए यह समय सीमा 31 मई, 2027 रखी गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना आवश्यक है।
3 वर्ष की अवधि की गणना करते समय, जिले के भीतर ही किसी पद पर हुई पदोन्नति को गणना में लिया जाएगा। हालांकि, पिछले 4 वर्षों के दौरान 'राज्य के मुख्यालय' में दी गई सेवाओं को, भले ही वे उसी राजस्व जिले में हों, वर्तमान जिले में 3 वर्ष की अवधि की गणना में नहीं गिना जाएगा, ऐसा चुनाव आयोग ने बताया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति के तहत जिला चुनाव अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर, एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, एसडीएम, तहसीलदार और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर सहित कई अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा डिवीजनल और म्युनिसिपल कमिश्नर भी इस तबादले के दायरे में आएंगे।
पुलिस विभाग के अधिकारियों के लिए यह नियम सब-इंस्पेक्टर से लेकर रेंज आईजी और कमिश्नर तक लागू होगा। एक्साइज और ट्रांसपोर्ट विभाग के सब-इंस्पेक्टर रैंक और उससे ऊपर के अधिकारी भी इस आदेश के अंतर्गत आते हैं। राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि स्थानांतरित अधिकारियों की नियुक्ति उनके गृह जिले में नहीं की जाएगी। किसी भी जिला चुनाव अधिकारी, रिटर्निंग ऑफिसर, असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर, पुलिस इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर या उससे ऊपर के पद पर तैनात अधिकारी को ऐसे विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र या जिले में पुन: तैनात नहीं किया जा सकेगा जहां वे पिछली विधानसभा चुनाव या उसके बाद के किसी उप-चुनाव के दौरान ड्यूटी कर रहे थे।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि जो स्टाफ वर्तमान में मतदाता सूची के विशेष सारांश सुधार कार्य में लगा हुआ है, उनका तबादला मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ही मुख्य चुनाव अधिकारी के साथ परामर्श करके किया जाएगा। मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को इन निर्देशों पर की गई कार्रवाई की वापसी रिपोर्ट 30 नवंबर तक जमा करनी होगी। इसके अलावा, चुनाव संबंधी अधिकारियों को नामांकन पत्र भरने की अंतिम तिथि के दो दिन के भीतर एक घोषणापत्र दाखिल करना होगा, जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि वे किसी भी लड़ने वाले उम्मीदवार के करीबी रिश्तेदार नहीं हैं और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।
ये आदेश ऐसे समय में आए हैं जब आयोग पांच राज्यों में चुनाव के लिए बुनियादी काम तेज कर रहा है। डिप्टी इलेक्शन कमिश्नरों के नेतृत्व वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने तैयारियों की समीक्षा करना शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू तथा विवेक जोशी के नेतृत्व में पूर्ण आयोग का दौरा किया जाएगा। इन राज्यों में विधानसभा का कार्यकाल मणिपुर में 13 मार्च से लेकर उत्तर प्रदेश में 22 मई के बीच समाप्त हो रहा है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल में भी इस प्रकार की प्रक्रिया विवाद का विषय बनी थी, जब आयोग ने चुनाव की तारीखों की घोषणा के कुछ समय बाद मुख्य सचिव और DGP का तबादला कर दिया था। तृणमूल के नेताओं ने इस कदम को गलत बताते हुए आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया था। पश्चिम बंगाल में 73 रिटर्निंग अधिकारियों को भी हटाया गया था और 50 से अधिक अधिकारियों का तबादला किया गया था। इस मामले में दायर याचिका को कलकत्ता उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसी तरह का विवाद तमिलनाडु में भी देखा गया था, जहां चुनाव की तारीख से पखवाड़े पहले मुख्य सचिव के तबादले के आदेश का विरोध हुआ था।
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