दिल्ली के 5 लाख झुग्गी परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान
दिल्ली सरकार ने झुग्गी बस्तियों के पुनर्वास के लिए नई नीति घोषित की है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 4:42 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लगभग 5 लाख परिवारों के लिए अब पक्के मकान पाने का सपना साकार होता दिख रहा है। इन परिवारों में लगभग 20 लाख लोग शामिल हैं, जिन्हें अब स्थायी आवास मिलने की आशा जगी है। दिल्ली सरकार ने झुग्गी वासियों के पुनर्वास के लिए एक नई नीति घोषित की है, जिसके तहत पात्रता रखने वाले परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।
दिल्ली सरकार द्वारा झुग्गी वासियों के पुनर्वास के लिए एक नई नीति अधिसूचित की गई है। इस नीति के तहत, जो झुग्गी बस्तियां 1 जनवरी 2025 तक स्थापित हो चुकी हैं, वहां रहने वाले और सरकार द्वारा निर्धारित सभी शर्तों को पूरा करने वाले परिवारों को पक्के मकान देने का प्रावधान है।
सरकार ने 'जहां झुग्गी वहां मकान' के संकल्प को और मजबूत करते हुए, लोगों को उसी स्थान पर पुनर्वासित करने को प्राथमिकता देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस नीति के अनुसार, झुग्गी वासियों को उनकी वर्तमान बस्ती में या उसके 3 किलोमीटर के दायरे में आवास उपलब्ध कराया जाएगा। मकान का आवंटन तभी किया जाएगा जब परिवार निर्धारित पात्रता और अन्य सभी आवश्यक शर्तें पूरी करेगा।
दिल्ली के शहरी विकास विभाग ने 'दिल्ली झुग्गी और झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्रिस्थापन नीति-2026' का गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नई नीति की विशेषता यह है कि इसमें केवल आवास देने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि लोगों के रोजगार, बच्चों की शिक्षा और उनके सामाजिक जीवन को भी ध्यान में रखा गया है।
इस नीति के तहत पात्र परिवारों को एक बेडरूम, एक हॉल और रसोई वाला मकान दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक झुग्गी में रहने वाले परिवारों को वैकल्पिक आवास आवंटित नहीं कर दिया जाता, तब तक उन्हें उनके स्थान से नहीं हटाया जाएगा। इसके अलावा, जो परिवार पिछली विभिन्न योजनाओं के दायरे से बाहर रह गए थे, उन्हें भी इस नई नीति के तहत लाभ पाने का अवसर मिल सकता है।
परिवार की संरचना को ध्यान में रखते हुए नीति में विशेष प्रावधान किया गया है। यदि झुग्गी में अलग-अलग परिवार अपना स्वतंत्र घर चला रहे हैं और वे पात्रता तथा दस्तावेजों संबंधी शर्तों को अलग से पूरा करते हैं, तो उन्हें अलग-अलग आवास इकाइयां देने पर विचार किया जाएगा। हालांकि, पति-पत्नी के मामले में मकान का आवंटन संयुक्त रूप से किया जाएगा।
दिव्यांग व्यक्ति वाले पात्र परिवारों के लिए भी इस नीति में विशेष प्रावधान हैं। प्रमाण पत्र संबंधी शर्तों को पूरा करने और मकानों की उपलब्धता के आधार पर, ऐसे परिवारों को ग्राउंड फ्लोर यानी भूतल पर मकान देने की प्राथमिकता दी जाएगी।
आवास के साथ-साथ इन क्षेत्रों में अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसमें स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों के लिए खेल के मैदान शामिल हैं। इन सभी सुविधाओं की व्यवस्था संबंधित क्षेत्र के नियोजन नियमों के अनुसार की जाएगी।
मकान आवंटन की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कंप्यूटरीकृत लॉटरी की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, यदि किसी को समस्या हो तो उसके लिए शिकायत निवारण और अपील करने का भी प्रावधान किया गया है। लाभार्थियों और इन परियोजनाओं पर निरंतर निगरानी रखने के लिए एक केंद्रीय जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा।
मकान आवंटन की तारीख से शुरू होकर पहले पांच वर्षों तक सरकार इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था का रखरखाव करेगी। इस पांच वर्ष की अवधि के अंत में, आवासीय परिसर की सामान्य सुविधाओं के संचालन और प्रबंधन के लिए लाभार्थी एसोसिएशन की भूमिका होगी।
जब पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास का काम चल रहा होगा, तब प्रभावित परिवारों को रहने के लिए अस्थायी आवास या किराए का मकान दिया जाएगा। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा किराए के लिए आर्थिक सहायता भी दी जा सकती है।
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