पावर ग्रिड और टोरेंट पावर के विस्तार के साथ ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी हलचल
जायडस वेलनेस के मुनाफे में बढ़ोतरी, जबकि केरल में बिजली खरीद के मुद्दे पर विवाद गहराया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:24 · 3 मिनट का पाठ
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देश के ऊर्जा क्षेत्र में वर्तमान में विभिन्न कंपनियों के वित्तीय परिणामों और नीतिगत बदलावों को लेकर बड़ी हलचल देखी जा रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया आने वाले समय में बड़े पैमाने पर वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। कंपनी के पास ₹2.2 लाख करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक है, जो जीईसी-3, एचवीडीसी, अंतर-राज्य ट्रांसमिशन और स्टोरेज परियोजनाओं द्वारा संचालित है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया कंपनी के लिए मुख्य चुनौतियां बन सकती हैं।
दूसरी ओर, टोरेंट पावर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी की एकीकृत आय 24 प्रतिशत बढ़कर ₹9,801.58 करोड़ दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में ₹7,876 करोड़ थी। कंपनी का कर पश्चात लाभ ₹837.96 करोड़ रहा है, जो पिछले वर्ष के ₹741.55 करोड़ की तुलना में अधिक है। टोरेंट पावर का एबिटडा 26 प्रतिशत बढ़कर ₹1,988 करोड़ हो गया है। कंपनी की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 6.8 जीडब्ल्यूपी है, जिसमें गैस, रिन्यूएबल और कोयला आधारित प्लांट शामिल हैं।
एफएमसीजी क्षेत्र की जायडस वेलनेस के परिणाम भी सामने आए हैं। सितंबर तिमाही में कंपनी ने ₹5.1 करोड़ का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में कंपनी को ₹52.8 करोड़ का नुकसान हुआ था। कंपनी की परिचालन से आय बढ़कर ₹1,126.6 करोड़ हो गई है, जो पहले ₹650.5 करोड़ थी। हालांकि, कंपनी का कुल खर्च भी बढ़कर ₹1,125.4 करोड़ हो गया है। बीएसई पर कंपनी के शेयर 0.63 प्रतिशत बढ़कर ₹486.25 पर ट्रेड कर रहे थे।
केरल में बिजली के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केरल सरकार द्वारा निजी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिजली खरीदने के निर्णय की स्वतंत्र जांच की मांग की है। इलामारम करीम ने आरोप लगाया है कि जीएनए एनर्जी से ₹8.63 प्रति यूनिट की दर से 500 मेगावाट बिजली खरीदने से केएसईबी पर ₹727 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केएसईबी के अध्यक्ष एम.जी. राजामाणिकम का तबादला सरकार की बात न मानने के कारण किया गया है। इसके अलावा, स्मार्ट मीटर के दूसरे चरण के टेंडर की समय सीमा 11 नवंबर को समाप्त हो रही है।
तमिलनाडु सरकार ने भी नई बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (बीईएसएस) पॉलिसी 2026 घोषित की है, जिसका उद्देश्य 2029 तक 10 जीडब्ल्यूएच क्षमता हासिल करना है। इस नीति के तहत, 1 मेगावाट या उससे अधिक की सौर परियोजनाओं के लिए 10 प्रतिशत बीईएसएस क्षमता अनिवार्य कर दी गई है। तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड पहले चरण में 2,500 मेगावाट स्टोरेज क्षमता खरीदेगा। पात्र परियोजनाओं को 10 वर्षों के लिए ट्रांसमिशन शुल्क में पूर्ण छूट दी जाएगी।
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