कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास की नागरिकता की जांच के लिए मद्रास हाईकोर्ट का नोटिस
चेन्नई के उद्योगपति द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सौरव दास से जवाब मांगा गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
1 नवंबर 2026, सुबह 5:37 · 4 मिनट का पाठ
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मद्रास हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास की नागरिकता की जांच करने के लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, यह आदेश शुक्रवार, 30 अक्टूबर, 2026 को दिया गया था। जनहित याचिका (PIL) में मांग की गई है कि यदि सौरव दास भारतीय नागरिक नहीं हैं, तो केंद्रीय गृह मंत्रालय को उनकी नागरिकता की जांच करनी चाहिए और उनका पासपोर्ट तथा आधार कार्ड रद्द करना चाहिए।
चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुलமுருகन की फर्स्ट डिवीजन बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार और सौरव दास दोनों को नोटिस जारी किया है। चेन्नई के उद्योगपति आर. गणेश कुमार द्वारा यह याचिका दायर की गई है। याचिका में न केवल नागरिकता, बल्कि सौरव दास के X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम हैंडल को ब्लॉक करने और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक बयान देने से रोकने के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ता आर. गणेश कुमार ने अपने वकील बी. जगन्नाथ द्वारा दायर हलफनामे में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सौरव दास का असली नाम योगेश शर्मा है और उनके मूल निवासी नेपाल में हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि CJP नेता ने अपनी पहचान और मूल छिपाकर धोखाधड़ी से भारत में आधार कार्ड, पासपोर्ट और वोटर आईडी प्राप्त किए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, इन महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया है।
हलफनामे में आगे कहा गया है कि, "उक्त प्रतिवादी नंबर 06 [श्री दास] के पास कोई वास्तविक काम नहीं है। वे एक बेरोजगार व्यक्ति हैं जिन्होंने खुद को CJP के प्रतिनिधि के रूप में पेश किया है और गलत तथा निराधार आरोपों के माध्यम से युवाओं में नफरत फैलाने के लिए सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग किया है।" याचिकाकर्ता ने यह सवाल भी उठाया है कि सौरव दास के पास कितने पासपोर्ट हैं यह नहीं पता, इसलिए राष्ट्र के हित में गहन जांच करने की आवश्यकता है।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने सौरव दास के विदेशी फंडिंग के स्रोतों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऐसी कई सोशल मीडिया पोस्ट की सूची दी है जिनमें दास ने न्यायपालिका की आलोचना की है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि वे निश्चित रूप से विदेश से फंडिंग प्राप्त कर रहे हैं और केवल जांच के माध्यम से ही उनके फंडिंग के स्रोतों का पता चलेगा। याचिकाकर्ता ने आगे आरोप लगाया कि CJP नेता सोशल मीडिया हैंडल का उपयोग केवल सत्ता के खिलाफ अराजकता, अराजकतावाद, निराशा और नफरत फैलाने के उद्देश्य से कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार, दास का X हैंडल और इंस्टाग्राम फीड न्यायपालिका का अपमान करने और कट्टर साम्यवादी विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है, जो दर्शाता है कि योगेश शर्मा (दास) एक साम्यवादी हैं। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा सुधार के नाम पर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान जंतर मंतर पर उन्होंने लोगों को 'संसद घेरने' का आह्वान किया था।
इस मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रंका ने इस याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे "सामूहिक शर्म का क्षण" बताया है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "यहाँ जो हो रहा है वह सामूहिक शर्म का क्षण है। केवल इसलिए कि कोई किसी को परेशान करना चाहता है या आप उनका काम सहन नहीं कर सकते - हम इस सब को कब तक सहन करेंगे?"
मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, CJP और अन्य पक्षों को छह सप्ताह के भीतर अपने संबंधित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। Hindustan Times ने नोट किया है कि उन्होंने इस याचिका के संबंध में सौरव दास की प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास किया है और विवरण अपडेट किए जाएंगे।
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