ग्रामीण रोजगार योजना में शिकायत निवारण नियमों में ढील देने पर कांग्रेस की आलोचना
जयराम रमेश ने सरकार पर अधिकार-आधारित कानून को महज एक प्रशासनिक योजना में बदलने का आरोप लगाया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:54 · अपडेट सुबह 3:37 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम 'विकसित भारत गारंटी फॉर एम्प्लॉयमेंट एंड लाइवलीहुड मिशन (ग्रामीण)' के तहत शिकायत निवारण प्रणाली को कमजोर करने के लिए केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने भारत के सबसे महत्वपूर्ण अधिकार-आधारित कानून को महज एक प्रशासनिक योजना में बदल दिया है। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम ने इस वर्ष जुलाई महीने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लिया था।
द हिंदू की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री रमेश ने कहा कि सरकार ने मई में प्रसारित किए गए ड्राफ्ट नियमों से कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को हटा दिया है, जो पिछले ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम का हिस्सा थे। उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा कि सरकार के पास कार्यक्रम के प्रावधानों के उल्लंघन को दूर करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने का अवसर था, लेकिन इसके बजाय उसने उन रास्तों को पूरी तरह से हटा दिया है।
जयराम रमेश के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा 2 नवंबर 2026 को घोषित अंतिम VB-G RAM G शिकायत निवारण नियमों ने मई 2026 के ड्राफ्ट नियमों में मौजूद कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को काफी हद तक शिथिल कर दिया है। उन्होंने इन बदलावों में पांच मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया है।
पहला, निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायतों का निवारण न करने पर दंड का प्रावधान हटा दिया गया है। ड्राफ्ट नियमों में स्पष्ट था कि सात कार्य दिवसों में शिकायत का निपटारा न करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा और धारा 27 के तहत कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अंतिम नियमों से इस प्रावधान को हटा दिया गया है। अब समय सीमा तो है, लेकिन इसका पालन न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
दूसरा, वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की जिम्मेदारी हटा दी गई है। ड्राफ्ट के अनुसार, यदि प्रारंभिक जांच या सोशल ऑडिट के निष्कर्षों में वित्तीय अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया सबूत मिलते हैं, तो जिला कार्यक्रम समन्वयक (DPC) के लिए कानूनी सलाह लेकर FIR दर्ज करना और आवश्यक कार्रवाई करना अनिवार्य था, जिसे अब पूरी तरह से हटा दिया गया है।
तीसरा, निर्वाचित पंचायती राज संस्थाओं द्वारा अनिवार्य निगरानी का प्रावधान हटा दिया गया है। ड्राफ्ट में मांग की गई थी कि शिकायतों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा और निगरानी के लिए इसे मध्यवर्ती और जिला पंचायत की बैठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, लेकिन इस प्रावधान को हटाने से शिकायत निवारण पर लोकतांत्रिक निगरानी कमजोर हुई है।
चौथा, हर हफ्ते एक दिन शिकायतें स्वीकार करने के अनिवार्य दिनों की आवश्यकता को हटा दिया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार, हर स्तर पर अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम एक निर्धारित दिन शिकायतें स्वीकार करने के लिए उपलब्ध रहना था, जिसे अब हटा दिया गया है। इससे श्रमिकों के लिए यह जानना मुश्किल होगा कि अधिकारियों से कब और कहां संपर्क करना है।
पांचवां, समर्पित शिकायत निवारण डेस्क बनाने का प्रावधान हटा दिया गया है। ड्राफ्ट में प्रत्येक ब्लॉक और जिले में शिकायत पंजीकरण और कानून के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी देने के लिए शिकायत निवारण डेस्क होना अनिवार्य था, लेकिन इस प्रावधान को भी अंतिम नियमों से हटा दिया गया है। श्री रमेश ने इस पूरी प्रक्रिया को श्रमिकों और लोगों के अधिकारों को छीनने और उनके अधिकार को महज एक 'जुमला' बनाने के समान बताया है।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा
સીબીઆઈએ કિશોર બિયાણી અને ફ્યુચર રિટેલ સામે ₹૯૦૪ કરોડની છેતરપિંડીનો કેસ દાખલ કર્યો
સ્ટેટ બેંક ઓફ ઈન્ડિયાની ફરિયાદ બાદ સીબીઆઈએ મુંબઈમાં સર્ચ ઓપરેશન હાથ ધર્યું