विदेशी ग्राहकों के साथ काम करने वालों के लिए आरबीआई के विनिमय नियमों में राहत
सेवा निर्यात और आयात के नियमों में ढील दी गई, अब अलग से एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 9:56 · 3 मिनट का पाठ
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सेवा निर्यात और आयात से संबंधित विदेशी विनिमय नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करके उन्हें सरल बना दिया है। इस निर्णय से उन सभी व्यक्तियों और कंपनियों को लाभ होगा जो विदेशी ग्राहकों के लिए काम करते हैं या विदेश से सेवाएं खरीदते हैं। एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, इन परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य छोटे लेनदेन और सेवाओं के माध्यम से होने वाली भुगतान प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है।
नए नियमों के अनुसार, विदेश में सेवाएं प्रदान करने वाले और विदेश से भुगतान प्राप्त करने वाले भारतीय निवासियों को अब अलग से एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म (EDF) जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे बैंक रिपोर्टिंग की प्रक्रिया में भी कमी आएगी। अब व्यक्ति को अपने खाते में भुगतान जमा करने के लिए केवल अपने बैंक को आवश्यक जानकारी प्रदान करनी होगी। उदाहरण के लिए, यदि भारत में रहने वाला कोई फ्रीलांसर किसी विदेशी कंपनी के लिए वेबसाइट डिजाइन करता है और बदले में विदेशी मुद्रा में भुगतान प्राप्त करता है, तो उसे अब अलग से EDF जमा करने की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, केवल बैंक को आवश्यक विवरण देने होंगे।
यह सुविधा केवल फ्रीलांसरों तक ही सीमित नहीं है। भारत के निवासी नहीं होने वाले गैर-निवासी निर्यातकों को भी कुछ शर्तों के तहत इस राहत का लाभ मिलेगा। यदि ऐसे निर्यातकों के लिए विदेश से प्राप्त सेवा भुगतान ₹10 लाख तक है, तो उन्हें केवल बैंक को आवश्यक जानकारी प्रदान करनी होगी। हालांकि, यदि भुगतान की राशि ₹10 लाख से अधिक है, तो पिछली घोषणा के अनुसार शर्तें ही लागू होंगी।
सेवा आयात के संबंध में भी नियमों में बदलाव किया गया है। आरबीआई ने सेवा आयात के लिए रिपोर्टिंग नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत बैंकों को अब IDPMS में सेवा आयात की जानकारी दर्ज करने के लिए दो विशिष्ट शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली शर्त यह है कि सेवा खरीदने वाला व्यक्ति भारत का निवासी नहीं होना चाहिए। दूसरी शर्त यह है कि इनवॉइस की राशि ₹10 लाख से अधिक होनी चाहिए। यदि ये दोनों शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो बैंकों को यह जानकारी दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी।
ये परिवर्तन विशेष रूप से भारत में रहने वाले उन लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होंगे जो डिजिटल या अन्य सेवाओं के माध्यम से विदेशी ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हैं और विदेशी मुद्रा में धन प्राप्त करते हैं। इससे छोटे लेनदेन की भुगतान प्रक्रिया में आने वाली बाधाएं दूर होंगी और व्यावसायिक गतिविधियां आसान होंगी।
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