नागपुर डिफेंस हब ने सेना को नागस्त्र-1 ड्रोन सौंपे और पिनाका रॉकेट का निर्यात किया
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को 450 स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन्स दिए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:58 · अपडेट शाम 5:07 · 3 मिनट का पाठ
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ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद नागपुर शहर तेजी से स्वदेशी रक्षा उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर स्थित निजी कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित नागस्त्र-1 लोइटरिंग म्यूनिशन्स के 450 की एक खेप सौंपी है। राजस्थान में किए गए सफल परीक्षणों के बाद इन ड्रोनों की आपूर्ति सेना को की गई है।
नागस्त्र-1 एक एंटी-टैंक सुसाइड ड्रोन है, जिसे विशेष रूप से दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों जैसे लक्ष्यों को खोजने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये अत्याधुनिक ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं और सटीक हमले (प्रिसिजन स्ट्राइक्स) कर सकते हैं, जिससे भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता में वृद्धि होगी।
घरेलू सेना को मजबूत करने के साथ-साथ, इस रक्षा उत्पादन सुविधा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस केंद्र द्वारा 700 गाइडेड पिनाका रॉकेट आर्मेनिया को निर्यात किए गए हैं। रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और निर्यात अभियान में इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
विकास के ये समीकरण भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता में हुई वृद्धि को दर्शाते हैं। नागपुर अब केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक रक्षा हब के रूप में पहचाना जा रहा है, जहाँ निजी क्षेत्र और सरकारी आवश्यकताओं के समन्वय से आधुनिक हथियारों का निर्माण हो रहा है। नागस्त्र-1 जैसे ड्रोन और पिनाका रॉकेट की सफलता भारत की तकनीकी प्रगति को उजागर करती है।
निर्यात और आपूर्ति की इस प्रक्रिया के माध्यम से भारत अब अन्य देशों के लिए रक्षा उपकरणों के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर रहा है। आर्मेनिया को किया गया निर्यात यह साबित करता है कि भारतीय रक्षा उपकरण अब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी हैं। इसके साथ ही, भारतीय सेना को मिले नए ड्रोनों से सीमा सुरक्षा और दुश्मन पर नजर रखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित ये लोइटरिंग म्यूनिशन्स आधुनिक युद्धकला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि ये कम जोखिम के साथ अधिक प्रभावी ढंग से लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं। राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में हुए परीक्षणों ने इन ड्रोनों की क्षमता और सटीकता की पुष्टि की थी, जिसके आधार पर इन्हें सेना में शामिल किया गया है।
इस प्रकार, नागपुर डिफेंस हब द्वारा हासिल की गई यह दोहरी उपलब्धि—एक ओर भारतीय सेना का सशक्तिकरण और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय निर्यात—भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई ऊंचाइयों पर ले गई है। इस कदम से देश की रक्षा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा की कमाई में भी वृद्धि होगी।
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