न्याय की मांग कर रहे अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने राजघाट से हटाया
बुधवार को राजघाट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और अंकिता की मां बेहोश हो गईं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:41 · अपडेट सुबह 2:57 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली के राजघाट पर अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग करने पहुंचे अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस द्वारा बलप्रयोग कर हटाया गया। बुधवार को महात्मा गांधी स्मारक के पास स्थित पब्लिक गेट पर अंकिता के माता-पिता और दो अन्य व्यक्तियों ने धरना शुरू किया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चूंकि यह स्थान निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल नहीं था, इसलिए पुलिस ने उन्हें बार-बार वहां से हटने के लिए कहा था। हालांकि, जब उन्होंने हटने से इनकार किया, तो पुलिस ने उन्हें जबरन वहां से हटा दिया।
इस घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पहले अंकिता के पिता को पकड़कर अपने साथ ले गई और उसके बाद मां को भी उठाया गया। इस दौरान अंकिता की मां सोनी देवी नारे लगाते-लगाते अचानक बेहोश हो गईं। घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने उन्हें पानी पिलाया और इसके बाद उन्हें तुरंत बुराड़ी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना के एक दिन बाद सोनी देवी ने एक वीडियो जारी कर दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रोते हुए उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी नाक दबा दी थी जिससे वे सांस नहीं ले पा रही थीं। उन्होंने आगे कहा कि महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और बाद में उनकी गर्दन दबाई। सोनी देवी के अनुसार, पुलिसकर्मी उन्हें कह रहे थे कि वे 'नौटंकी' कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब अंकिता के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने बाहर नहीं निकल सकते और बेटी के लिए आवाज उठाना नौटंकी है?
सोनी देवी ने वीडियो में यह भी बताया कि उन्हें पता नहीं है कि पुलिस उन्हें रास्ते में कहां-कहां ले गई और अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें होश आया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयान के सोशल मीडिया अकाउंट पर यह वीडियो साझा किया गया है, जिसमें उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों ने दावा किया है कि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया था, बल्कि केवल स्थल से हटाया गया था। अस्पताल में मेडिको-लीगल जांच (MLC) के लिए ले जाने के बावजूद, सोनी देवी और उनके पति ने चिकित्सा जांच कराने से इनकार कर दिया था।
इस घटना के बाद बुराड़ी के आम आदमी पार्टी विधायक संजीव झा अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे, जिसके बाद अंकिता के माता-पिता विधायक के साथ वहां से रवाना हुए। अंकिता के माता-पिता इस प्रदर्शन के माध्यम से मामले की निष्पक्ष जांच करने और सिक्किम के राज्यपाल दुष्यंत कुमार गौतम को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस घटना से दो सप्ताह पहले, 14 अक्टूबर को इंडिया गेट के पास दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते समय भी अंकिता के माता-पिता को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था।
बुधवार को राजघाट पर अंकिता के माता-पिता मौन व्रत धारण कर बैठे थे। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयान और कांग्रेस नेता मुमताज पटेल भी मौजूद थे। वे मीडिया से बातचीत करने और प्रार्थना करने के लिए राजघाट पहुंचे थे, जिसके बाद उन्होंने धरना शुरू किया था।
अंकिता भंडारी के मामले की पृष्ठभूमि देखें तो, वह ऋषिकेश के वनंतर रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी और चार दिन बाद उनका शव चिल्ला नहर से मिला था। इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र हैं, और उनके दो साथियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इस मामले में किसी अज्ञात वीआईपी व्यक्ति की संलिप्तता के आरोपों के कारण यह मामला राजनीतिक चर्चा में रहा, जिसके कारण अंकिता के परिवार और कार्यकर्ताओं द्वारा इस दिशा में जांच की मांग की जा रही है।
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