दुलारचंद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, मोकामा के विधायक अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार को चार महीने में जांच पूरी करने का आदेश दिया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:27 · अपडेट सुबह 8:07 · 4 मिनट का पाठ
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मोकामा के विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद हत्याकांड के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करके जेल वापस लौटने का आदेश दिया है। दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, जिसमें कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
जस्टिस एमएम सुंदरेष और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को शादी का कार्यक्रम है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक का समय दिया है, जिसके बाद उन्हें आत्मसमर्पण करके जेल वापस लौटना होगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को इस मामले की जांच अगले चार महीने में पूरी करने के लिए भी निर्देश दिया है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में अगली सुनवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि समझना जरूरी है। 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। उस समय अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे थे। दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे और इस हिंसा के दौरान दुलारचंद यादव की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था। हालांकि, जेल में रहने के बावजूद उन्होंने चुनाव जीत लिया था। इसके बाद मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट द्वारा उन्हें जमानत दी गई थी और वे जेल से बाहर आए थे।
अनंत सिंह के लिए मुश्किलें केवल कानूनी ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बढ़ गई हैं। 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से बाहर निकाल दिया है। अनंत सिंह लगातार पार्टी लाइन से अलग हटकर बयान दे रहे थे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लिए अनुचित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे थे। इसके अलावा, वे विधान परिषद के चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने यह आदेश जारी किया है और विधानसभा के स्पीकर को अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने के लिए सिफारिश भी की है। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करके उन्हें अगले 6 साल के लिए पार्टी से बाहर किया गया है।
पार्टी से निकाले जाने के बाद अनंत सिंह के परिवार पर सरकारी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने उनकी पत्नी नीलम देवी को पटना के 1, मॉल रोड स्थित सरकारी आवास को 25 नवंबर 2026 तक खाली करने का नोटिस दिया है। इस नोटिस के बाद कांग्रेस की पूर्व विधायक नीतू सिंह अनंत सिंह से मिलने उनके आवास पर पहुंची थीं। इसके अलावा, सोमवार सुबह नीलम देवी को 20 सूत्री समिति के सदस्य पद से हटा दिया गया था और उन्हें मिला राज्य मंत्री का दर्जा भी वापस ले लिया गया था।
अनंत सिंह के पहले के कुछ विवादास्पद बयान भी चर्चा में रहे हैं। बिहार एमएलसी चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए 9 हत्याएं करवाई थीं। उन्होंने कहा था कि जब नीतीश कुमार की राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं थी और वे इधर-उधर घूम रहे थे, तब भी वे उनके साथ खड़े रहे थे। उन्होंने आगे जोड़ा था कि उन्होंने पार्टी के लिए बलिदान दिया है और मेरी तरह कोई बलिदान नहीं दे सकता। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने इस बयान पर स्पष्टीकरण दिया था कि उन्होंने कई बलिदान दिए हैं और लालू यादव के शासन के दौरान उनके नौ आदमी मारे गए थे क्योंकि उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन किया था।
इस समाचार का स्रोत
- दैनिक भास्कर
- The Times of India
- Hindustan Times
- The Economic Times
- The Hindu
- NDTV
- The Times of India
- The Hindu
- Hindustan Times
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