सुप्रीम कोर्ट ने बाल मजदूरी रोकने के लिए विशेष सेल बनाने का केंद्र को दिया आदेश
खतरनाक उद्योगों में बाल मजदूरी रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को एक विशेष सेल बनाकर निगरानी करनी होगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 2:42 · अपडेट सुबह 2:54 · 3 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बाल मजदूरी संशोधन अधिनियम, 2016 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष सेल गठित करने का आदेश दिया है। इस सेल का मुख्य उद्देश्य खतरनाक उद्योगों में बाल मजदूरी पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून के कार्यान्वयन की प्रक्रिया की निरंतर और सख्त निगरानी करना होगा।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ ने इस संबंध में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने मंत्रालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों के माध्यम से विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश और आदेश जारी करे, ताकि कानून का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
बच्चों और किशोरों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से, अदालत ने दूसरे प्रतिवादी को एक विशेष सेल बनाने और कानून के कार्यान्वयन की निगरानी करने का आदेश दिया है। इस प्रक्रिया में वर्ष 2016 के अधिनियम संख्या 35 द्वारा किए गए संशोधनों के अनुसार सभी प्रावधानों का पालन करना होगा।
इस कानूनी लड़ाई में 'हेल्थ फॉर मिलियन' नामक एनजीओ की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण और प्रणव सचदेवा उपस्थित हुए थे। वर्ष 2009 में दायर इस याचिका में बाल श्रम अधिनियम, 1986 की धारा 3 के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। उस समय वर्कशॉप में पारिवारिक श्रम के हिस्से के रूप में और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बीड़ी रोलिंग जैसे खतरनाक कार्यों में बाल मजदूरी की अनुमति थी, जिसे इस याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार से यह भी मांग की थी कि ऐसे बाल श्रमिकों को शैक्षिक सुविधाएं और दो समय का मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाए।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील ने पीठ को सूचित किया कि मूल कानून में संशोधन होने के बाद याचिकाकर्ता की मुख्य शिकायतों का समाधान हो गया है, इसलिए अब इस याचिका पर आगे विचार करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि हालांकि याचिका का विशिष्ट भाग्य अब कायम नहीं रह सकता है, लेकिन 2016 के संशोधन के माध्यम से लाए गए परिवर्तनों का पूर्ण और सख्त कार्यान्वयन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने जोर देकर कहा कि बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम, 1986 के संशोधित प्रावधानों सहित सभी आदेशों का पालन किया जाना चाहिए।
बाल मजदूरी संशोधन अधिनियम, 2016, मुख्य बाल मजदूरी अधिनियम, 1986 में संशोधन करके लागू किया गया था। यह कानून 1 सितंबर, 2016 से प्रभावी हुआ था। इस कानून के माध्यम से 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सभी प्रकार के व्यवसायों और प्रक्रियाओं में काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
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