हाथियों के कॉरिडोर के संरक्षण के लिए मद्रास हाईकोर्ट ने जमीन हस्तांतरण पर लगाई रोक
भरथियार यूनिवर्सिटी की 196 एकड़ जमीन TIDCO को सौंपने के सरकारी आदेश पर रोक
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 3:08 · अपडेट सुबह 3:26 · 2 मिनट का पाठ
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मद्रास हाईकोर्ट की पर्यावरण और वन संबंधी मामलों की सुनवाई करने वाली स्पेशल डिवीजन बेंच ने कोइम्बतूर स्थित भरथियार यूनिवर्सिटी की 196 एकड़ जमीन तमिलनाडु इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (TIDCO) को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इस जमीन का उपयोग गैर-प्रदूषणकारी या प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए किया जाना था।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई निवासी याचिकाकर्ता एस. मुरलीधर ने जस्टिस एन. सतीश कुमार और जस्टिस जी.के. मुथुकुमार की बेंच का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि उच्च शिक्षा (H2) विभाग द्वारा इस वर्ष 14 मार्च को एक सरकारी आदेश (G.O.(Ms) No.89) जारी किया गया था। इस आदेश के माध्यम से यूनिवर्सिटी की 196 एकड़ जमीन TIDCO को सौंपने का निर्देश दिया गया था ताकि वहां प्रौद्योगिकी आधारित उद्योग विकसित किए जा सकें।
इस सरकारी आदेश में यह प्रावधान भी किया गया था कि मारुधमलाई की तलहटी में स्थित यूनिवर्सिटी की 77 एकड़ जमीन सरकार द्वारा ली जाएगी, जिसका उपयोग हाथियों के कॉरिडोर (प्रवासन मार्ग) के रूप में किया जाएगा।
अदालत ने पाया कि वर्ष 2024 में जब याचिकाकर्ता ने इस क्षेत्र में 'टेक सिटी' विकसित करने की पिछली सरकार की योजना को चुनौती दी थी, तब अदालत ने यथास्थिति (स्टेटस क्वो) बनाए रखने के दो आदेश दिए थे। अदालत ने नोट किया था कि यह क्षेत्र हाथियों के प्रवासन मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता है।
30 अक्टूबर, 2026 को दिए गए आदेश में बेंच ने कहा, "जब यह स्वीकार किया गया है कि यह क्षेत्र हाथियों के प्रवासन मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता है, तो हमारी राय है कि ऐसी जमीनों को औद्योगिक उद्देश्यों के लिए हस्तांतरित करने से न केवल कॉरिडोर, बल्कि उस क्षेत्र में मौजूद संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) नष्ट हो जाएगा।" इन कारणों से अदालत ने मार्च में उच्च शिक्षा (H2) विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश पर रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने अब स्पेशल गवर्नमेंट प्लीडर को इस मामले में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी, 2027 को होगी, जिसमें रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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