RSS और दिल्ली पुलिस के नाम से भेजी गई कंटेंट हटाने की नोटिस फर्जी निकली
डिजिटल राइट्स ग्रुप्स को भेजी गई कानूनी नोटिस और पुलिस रिपोर्ट एक बड़ा होक्स निकली
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 12:56 · 4 मिनट का पाठ
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भारत में इंटरनेट सेंसरशिप बढ़ने की चिंता के बीच डिजिटल राइट्स ग्रुप्स को भेजी गई कानूनी नोटिस एक बड़ा होक्स निकली हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और दिल्ली पुलिस के नाम से भेजी गई इन नोटिसों में कंटेंट हटाने की मांग की गई थी, लेकिन जांच में पता चला है कि ये सभी दस्तावेज फर्जी थे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 30 अक्टूबर को हुई थी जब इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) और सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर जैसे डिजिटल राइट्स ग्रुप्स ने कुछ कानूनी नोटिस जारी किए थे। ये नोटिस सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक मातृसंस्था RSS के नाम से भेजे गए थे। इन नोटिसों में सरकार के कंटेंट प्रतिबंध के आदेशों का विरोध करने और उनका दस्तावेजीकरण बंद करने के लिए दबाव डाला गया था।
RSS द्वारा इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सलाहकार कंचन गुप्ता और RSS सदस्य एवं लेखक रतन शारदा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस बात का तुरंत खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था द्वारा ऐसी कोई नोटिस नहीं भेजी गई है।
इस घटना में मोड़ तब आया जब डिजिटल राइट्स ग्रुप्स को X की ओर से सूचित किया गया कि दिल्ली पुलिस ने एक "इलीगल कंटेंट रिपोर्ट" भेजी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन ग्रुप्स की पोस्ट और अकाउंट RSS की मानहानि करते हैं, इसलिए उन्हें हटा दिया जाना चाहिए। हालांकि, स्क्रॉल की रिपोर्ट के अनुसार, RSS के नाम से भेजी गई नोटिस की तरह दिल्ली पुलिस द्वारा X को भेजा गया संचार भी फर्जी है। इस मामले से परिचित एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर स्क्रॉल को बताया कि यह पुलिस रिपोर्ट भी बनावटी है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता को इस संबंध में प्रश्न भेजे गए थे, लेकिन प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं मिला था।
स्क्रॉल द्वारा की गई जांच में पता चला है कि इस पूरी साजिश की शुरुआत एक ईमेल एड्रेस से हुई थी, जो संभवतः 29 अक्टूबर को बनाया गया था। इस ईमेल एड्रेस को बनाने के मात्र 6 घंटे बाद ही डिजिटल राइट्स संस्थाओं को कानूनी नोटिस भेजे गए थे।
इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने 30 अक्टूबर को X पर एक बयान जारी किया था कि उन्हें पिछली रात गौरव तिवारी नामक एक वकील से ईमेल मिला था। इस ईमेल में तिवारी ने बताया कि वे "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्देशों और अधिकार" के तहत कानूनी नोटिस भेज रहे हैं। इस नोटिस में IFF पर आरोप लगाया गया था कि वे "राष्ट्रविरोधी, उकसाने वाले और भ्रामक कंटेंट" हटाने के सरकारी आदेशों का विरोध कर रहे हैं। संस्था को यह गतिविधि बंद करने और एक सप्ताह में अनुपालन की पुष्टि करने के लिए कहा गया था।
इसी तरह की नोटिस सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर और 'Geo Blocked in India' नामक X अकाउंट को भी ईमेल द्वारा भेजी गई थीं। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने इस नोटिस को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण माना था क्योंकि इसमें कोई ठोस आरोप नहीं लगाया गया था और न ही किसी कानूनी उल्लंघन का उल्लेख किया गया था। संस्था ने सवाल उठाया था कि RSS सरकार की ओर से अपवाद क्यों ले रहा है और यह नहीं बताया गया कि किस विशिष्ट कानून का उल्लंघन हुआ है।
स्क्रॉल ने RSS के संचार विभाग के प्रमुख सुनील अंबेकर से संपर्क किया था, लेकिन प्रकाशन तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके अलावा, नोटिस में दिए गए पते की जांच करने पर पता चला कि वह दिल्ली के बाहरी इलाके बवाना के एक फ्लैट की ओर ले जाता है।
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