आंतरिक कलह की खबरें गलत हैं और सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए: चुनाव आयोग
कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र एक अधिकारी की कार्यप्रणाली के संबंध में थे, नीतिगत मुद्दों पर नहीं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 12:39 · अपडेट दोपहर 1:16 · 3 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
भारत के चुनाव आयोग ने अपनी संस्था के भीतर मतभेदों और आंतरिक कलह की सभी खबरों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा लिए गए सभी निर्णय आपसी सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर आयोग के भीतर अनबन की चर्चाएं चल रही थीं, जिसके आधार पर विपक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी थी। विपक्ष ने इन रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग की थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया है और कहा है कि उसकी कार्यप्रणाली या निर्णयों में किसी भी प्रकार की असहमति नहीं रही है।
कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्रों के रहस्य पर प्रकाश डालते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्रों में कोई भी नीतिगत मुद्दा नहीं उठाया गया था। इसके अलावा, इन पत्रों में आईटी (IT) विभाग से जुड़ी कोई शिकायत भी नहीं की गई थी। आयोग के अनुसार, ये पत्र केवल डेप्युटेशन पर आए एक अधिकारी की कार्यप्रणाली और उनके व्यवहार को लेकर थे। इस स्पष्टीकरण के माध्यम से आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि संस्था की आंतरिक कार्यप्रणाली में कोई बड़ा विवाद नहीं है।
पूरी घटनाक्रम का विवरण देते हुए आयोग ने बताया कि 28 जुलाई 2026 को डेप्युटेशन पर आए एक आईएएस (IAS) अधिकारी ने, जो एडिशनल सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी थे, काम के बंटवारे को लेकर एक ऑफिस ऑर्डर जारी किया था। यह आदेश जारी होने के अगले ही दिन, यानी 29 जुलाई 2026 को, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे। इन दोनों आयुक्तों ने अपने पत्रों में उस अधिकारी द्वारा जारी आदेश और उनके व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने आगे स्पष्ट किया कि 28 जुलाई के आदेश पर दोनों आयुक्तों की असहमति होने के कारण, 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर एक नया निर्देश जारी किया था। इस नए निर्देश के परिणामस्वरूप 28 जुलाई को जारी किया गया काम के बंटवारे का आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ। आयोग ने इस संबंध में कड़े शब्दों में कहा कि आईटी विभाग की निगरानी करने के अधिकार कभी किसी व्यक्ति से वापस नहीं लिए गए थे, इसलिए उससे जुड़ी अफवाहें निराधार हैं।
वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए आयोग ने बताया कि दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा जिन मुद्दों को उठाया गया था, वे अब पूरी तरह से सुलझ गए हैं और अब उस मामले में आगे किसी विवाद की संभावना नहीं है। वर्तमान में चुनाव आयोग में काम का बंटवारा 23 सितंबर 2025 को जारी किए गए ऑफिस ऑर्डर के अनुसार ही चल रहा है। आयोग ने दोहराया है कि संस्था की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आईटी विभाग की मॉनिटरिंग से जुड़े अधिकारों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस प्रकार, आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और एकता का दावा किया है।
विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की प्रोविजनल उत्तर कुंजी जारी, 12 नवंबर तक करें आपत्ति दर्ज
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 की अनंतिम उत्तर कुंजी जारी कर दी गई है जिसमें उम्मीदवार 12 नवंबर तक ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।
पुराने कप में पेय परोसने के लिए बेंगलुरु में पीवीआर आइनॉक्स का काउंटर सील
ग्राहकों की शिकायत और वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग ने की कार्रवाई।
त्योहारों के मौसम में अपने वतन जाने के लिए migrant कामगारों में भारी भीड़
भारतीय रेलवे द्वारा त्योहारों के अवसर पर अट्ठारह हजार विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं।