भारतीय हॉकी के पूर्व कप्तान एम.एम. सोमया के घर से ओलंपिक गोल्ड मेडल चोरी
चोरों ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक के गोल्ड मेडल सहित ₹3.53 लाख की कीमत का कीमती सामान साफ किया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 8:25 · अपडेट रात 8:38 · 4 मिनट का पाठ
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बेंगलुरु के न्यू थिप्पासंद्रा इलाके में रहने वाले भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान एम.एम. सोमया के निवास पर चोरी की घटना हुई है। इस चोरी में उनके जीवन की सबसे कीमती उपलब्धि, 1980 के मॉस्को ओलंपिक का गोल्ड मेडल चोरी हो गया है। इसके अलावा अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल पदक, सोने-चांदी के गहने और नकदी भी चोरी हो गई है।
द हिंदू और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 28 अक्टूबर की सुबह हुई। 67 वर्षीय एम.एम. सोमया 25 अक्टूबर की सुबह अपने परिवार के साथ कर्नाटक के कोडगु जिले में गए थे। घर बंद और खाली होने का फायदा उठाकर दो अज्ञात चोरों ने 28 अक्टूबर को सुबह 2:34 बजे घर का मुख्य दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। सुबह 7:15 बजे एक पड़ोसी ने घर का दरवाजा खुला देखा और सोमया को सूचित किया, जिसके बाद इस चोरी का पता चला।
पड़ोसी के घर के सीसीटीवी फुटेज में दो व्यक्ति घर में प्रवेश करते दिख रहे हैं। पुलिस शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने नीले रंग की शर्ट और दूसरे ने लाल रंग की शर्ट पहनी थी। चोरों ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक का गोल्ड मेडल, 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों का सिल्वर मेडल, 1986 के सियोल एशियाई खेलों का ब्रोंज मेडल और 1982 की एम्स्टर्डम चैंपियंस ट्रॉफी का ब्रोंज मेडल चुराया है।
खेल पदकों के अलावा अन्य कीमती सामानों में 10 ग्राम की एक सोने की चूड़ी, 8 ग्राम का एक सोने का सिक्का, 144 ग्राम वजन के दो चांदी के कप (प्रत्येक 72 ग्राम), 200 ग्राम वजन के छह चांदी के चम्मच, 80 ग्राम का एक चांदी का पात्र और ₹30,000 नकद चोरी हुए हैं। पुलिस शिकायत में खेल पदकों के अलावा चोरी हुई वस्तुओं की कुल अनुमानित कीमत ₹3.53 लाख बताई गई है।
एम.एम. सोमया ने इस घटना के संबंध में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को पत्र लिखकर इस मामले में समयबद्ध और गहन जांच के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि, "ओलंपिक गोल्ड मेडल केवल एक व्यक्तिगत खेल उपलब्धि नहीं है; यह दुनिया के सर्वोच्च खेल मंच पर राष्ट्र के लिए अर्जित सम्मान है।" उन्होंने आगे कहा कि चोरी हुआ पदक पुरुषों की हॉकी में भारत का आखिरी ओलंपिक गोल्ड मेडल है, इसलिए इसका महत्व न केवल उनके लिए बल्कि राष्ट्र और भारतीय खेल इतिहास के लिए भी अपार है। उनके लिए यह वर्षों के समर्पण, त्याग और देश की सेवा का एक अद्वितीय प्रतीक है।
बेंगलुरु पुलिस के इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 331(4) और 305 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बेंगलुरु सिटी पुलिस के डीसीपी (पूर्वी डिवीजन) विक्रम आम्टे ने बताया कि आरोपियों की पहचान करने और चोरी हुए कीमती सामान तथा पदकों की बरामदगी के लिए दो विशेष टीमों का गठन किया गया है। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
एम.एम. सोमया की पृष्ठभूमि की बात करें तो, वे 1980 के दशक के दौरान भारतीय हॉकी टीम के मुख्य सदस्य थे। उन्होंने 1980 के मॉस्को गेम्स में पदार्पण किया था, जहाँ भारत ने पुरुषों की हॉकी में अपना आठवां ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने 1984 के लॉस एंजिल्स और 1988 के सियोल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 1988 में वे टीम के कप्तान थे। उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में दो वर्ल्ड कप, दो एशियाई खेल, दो एशिया कप और तीन चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट शामिल हैं। भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें 1985 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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