बेटी की कस्टडी मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने पिता की हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज की
माता प्राकृतिक अभिभावक होने के कारण नाबालिग बेटी की कस्टडी को अवैध नहीं माना जा सकता
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:10 · अपडेट सुबह 11:46 · 1 मिनट का पाठ
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गुजरात हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी की कस्टडी पाने के लिए पिता द्वारा दायर की गई हैबियस कॉर्पस याचिका को खारिज कर दिया है। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि यदि नाबालिग बेटी की कस्टडी माता के पास है, तो इसे अवैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि माता प्राकृतिक अभिभावक (Natural Guardian) होती हैं।
इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चैंबर में नाबालिग बेटी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की थी। बेटी ने कोर्ट के समक्ष बताया कि वह अपनी माता के साथ खुश है और पिता के साथ नहीं रहना चाहती। बेटी के इस बयान को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह अवलोकन किया था।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी कस्टडी के विवाद को हैबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से हल नहीं किया जा सकता। इस मामले में स्थायी कस्टडी (Permanent Custody) के लिए केस पहले से ही फैमिली कोर्ट में लंबित है। इसलिए, कस्टडी के संबंध में अंतिम निर्णय उचित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित अदालत द्वारा ही लिया जाएगा। इस फैसले से चाइल्ड कस्टडी विवाद और हैबियस कॉर्पस याचिका के संबंध में कानूनी चर्चा को बल मिला है।
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