सोमनाथ मंदिर के पास नॉनवेज बिक्री पर प्रतिबंध को लेकर हाईकोर्ट में भारी ड्रामा
सिंगल बेंच ने प्रतिबंध रद्द किया लेकिन डिवीजन बेंच ने फैसले पर स्टे लगाकर प्रतिबंध चालू रखा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, रात 8:10 · अपडेट दोपहर 3:55 · 4 मिनट का पाठ
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सोमनाथ महादेव मंदिर और उसके आसपास के पवित्र यात्रा मार्गों पर नॉनवेज खाद्य पदार्थों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर शुक्रवार ३० अक्टूबर के दिन गुजरात हाईकोर्ट में अत्यंत नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था। दिन के दौरान कानूनी स्थिति में बड़ा बदलाव हुआ था, जिसमें दोपहर को होटल मालिकों को मिली बड़ी राहत शाम को डिवीजन बेंच ने स्थगित कर दी थी।
दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के अनुसार, सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के लिए कुछ रेस्टोरेंट मालिकों ने हाईकोर्ट में अर्जी की थी। दोपहर को करीब ३ बजे सिंगल जज जस्टिस निशा एम. ठाकोर ने इन अर्जियों को मंजूर किया था और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए अधिसूचना की सूचना को रद्द किया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि स्थानीय प्रशासन ने अपनी सत्ता का गलत उपयोग किया है।
हालांकि, इस फैसले के बाद राज्य सरकार के कानूनी तंत्र ने तत्काल कार्रवाई शुरू की थी। टीवी९ गुजराती के रिपोर्ट के अनुसार, एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी और सरकारी वकील जी.एच. विर्क ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए दिन के अन्य कानूनी कामकाज बाजू पर रखे थे। राज्य सरकार ने चीफ जस्टिस मनाश रंजन पाठक और जस्टिस निर्मल देसाई की डिवीजन बेंच के समक्ष तत्काल अपील दाखिल की थी। शाम को करीब ६:४५ बजे डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के फैसले के अमल पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण नॉनवेज पर का प्रतिबंध चालू रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ था। इस प्रकार, ४ घंटे से भी कम समय में इस केस में कानूनी मोड़ आया था।
इस विवाद की शुरुआत १० अगस्त, २०२६ के दिन गीर सोमनाथ के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए अधिसूचना से हुई थी। इस अधिसूचना के तहत सोमनाथ मंदिर के ५०० मीटर के परिधि में और मंदिर को जोड़ने वाले ६ मुख्य यात्रा मार्गों पर नॉनवेज खाद्य पदार्थ तैयार करने, संग्रह करने या बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इन यात्रा मार्गों में भालका तीर्थ, भीडिया सर्कल, शंख सर्कल, सफारी सर्कल, गीता मंदिर और हमीरजी सर्कल जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का समावेश होता है।
अर्जदारों और रेस्टोरेंट मालिकों ने दलील की थी कि वे पिछले २०-२५ साल से लाइसेंस लेकर व्यवसाय कर रहे हैं, किंतु सरकार इसे जबरदस्ती बंद करवा रही है। एक व्यापारी के साथ तो पुलिस चौकी में ले जाकर भविष्य में नॉनवेज नहीं बेचने का लिखित दस्तावेज भी लिया गया होने का उन्होंने दावा किया था। अर्जदारों के मत में, यह कदम उनके संवैधानिक कलम १९(१)(जी) के तहत मिले व्यवसाय करने की मूलभूत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार कोई नया कारण दिए बिना पुराने आर्डर पर नए आर्डर लगाकर पूरे सोमनाथ शहर को धीरे-धीरे 'वेज जोन' बना रही है।
दूसरी तरफ, गुजरात सरकार के वकील जी.एच. विर्क ने दलील की थी कि सोमनाथ मात्र एक बाजार नहीं है, परंतु एक अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थल है। उन्होंने बताया कि ९ महीने में यहाँ १.१६ करोड़ श्रद्धालु आते हैं। सरकार ने तर्क दिया था कि हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर (स्वर्ण मंदिर), मथुरा-वृंदावन और अयोध्या जैसे स्थलों पर भी ऐसे प्रतिबंध हैं और हाईकोर्ट ने इसे योग्य माना है। सरकार के मत में वे दुकानें बंद नहीं कर रहे हैं, केवल शाकाहारी विकल्प बेचने की छूट दे रहे हैं। साथ ही, सोमनाथ जिला नया बनने के कारण और मंदिर कॉरिडोर बनने के कारण प्रतिबंध का विस्तार बढ़ाना जरूरी है ऐसी दलील भी की गई थी।
राज्य सरकार का मुख्य तर्क यह था कि सोमनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है और उसका आध्यात्मिक महत्व असाधारण है। यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की अंतिम लीलाओं के साथ भी जुड़ा हुआ है। सरकार के मत में, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले स्थलों पर व्यापारी स्वतंत्रता को अमर्यादित रूप से देखा जा सकता नहीं। वर्तमान में डिवीजन बेंच ने स्टे लगाने से प्रतिबंध चालू रहा है, परंतु सरकार अब इस मामले में डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट में जा सकती है।
इस समाचार का स्रोत
- दैनिक भास्कर
- ટીવી9 ગુજરાતી
- The Times of India (Ahmedabad)
- अमर उजाला
- The Times of India (Ahmedabad)
- Hindustan Times
- સંદેશ
- The Hindu
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