दिवाली से पहले सोने के भाव में बढ़ोतरी, बड़े ज्वैलर्स अभी भी खरीदारी में सतर्क
भारत में 22 कैरेट सोने के भाव में बढ़ोतरी हुई है, जबकि बड़े ज्वैलर्स भाव घटने का इंतजार कर रहे हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, सुबह 7:10 · 5 मिनट का पाठ
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भारत में दिवाली के त्योहार से पहले सोने के भाव में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बुधवार, 28 अक्टूबर, 2026 के दिन तनिष्क, मलबार गोल्ड एंड डायमंड्स, कल्याण ज्वैलर्स और जॉयलुक्कास जैसे मुख्य ज्वैलर्स के पास सोने के भाव बढ़े हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने भी रिपोर्ट दी है कि कल की तुलना में आज सोने और चांदी के सूचक ज्वैलरी के भाव में बढ़ोतरी हुई है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के बड़े ज्वैलर्स सोने की खरीदारी में विलंब कर रहे हैं। वे ऐसी अपेक्षा रख रहे हैं कि सोने के भाव में अभी और गिरावट हो सकती है। देश की सबसे बड़ी कीमती धातु रिफाइनर MMTC-PAMP के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर समित गुहा के अनुसार, बड़ी ज्वैलरी चेन अभी बाजार में पूरी तरह से वापस नहीं लौटी हैं। सामान्य तौर पर जब भाव बढ़ने लगते हैं तब बड़े ज्वैलरी उत्पादक आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए खरीदारी बढ़ाते हैं, लेकिन जब उन्हें लगता है कि भाव अभी और घटेंगे, तब वे इन्वेंट्री का उपयोग करते हैं।
फिलहाल खरीदारी का नेतृत्व छोटे और मध्यम आकार के ज्वैलर्स कर रहे हैं, जिनमें से कुछ ने बार-बार ऑर्डर दिए हैं। पिछले हफ्ते सोने का भाव पहली बार जुलाई के बाद $4,000 प्रति औंस से नीचे गिरा था। फरवरी के अंत में यूएस-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने के भाव में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है। उल्लेखनीय है कि जनवरी में सोने के भाव $5,400 को पार करके रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे।
भारत में सोने की मांग इस साल मंद रही है क्योंकि सरकार ने मई महीने में आयात ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी व्यापार घाटा घटाने के लिए भारतीयों को सोने की खरीदारी पर कटौती करने का बार-बार आग्रह किया है। भारत अपनी खपत का लगभग सारा सोना आयात करता है। ऊंची टैरिफ के कारण अधिक खरीदारी नकद बाजार में हो रही है। समित गुहा के अनुसार, ड्यूटी में बढ़ोतरी का असर खरीदारी पर पड़ा है। इसके विपरीत चीन में, जो विश्व का सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता है, वहां भाव घटने से घरों में मांग बढ़ी है।
Citi Research के अनुसार, कड़े आयात नियमों और अल नीनो के कारण मौसमी व्यवधान से ग्रामीण मांग में गिरावट आने से भारत का सोने का आयात घट सकता है। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान शिपमेंट अनुमानित 106 टन हो सकता है, जो ऐतिहासिक चौथी तिमाही के औसत 212 टन से लगभग आधा है। MMTC-PAMP की बिक्री में भी पिछले साल की तुलना में गिरावट देखी जा रही है और मांग छोटे सिक्कों और बार की तरफ अधिक है। समित गुहा ने जोड़ा कि यदि सोना वापस उछले तो खरीदारी देखने को मिलेगी।
The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, 28 अक्टूबर, 2026 के दिन तनिष्क पर 22 कैरेट सोने का भाव ₹13,245 प्रति ग्राम है, जो 27 अक्टूबर के ₹13,175 से अधिक है। मलबार गोल्ड एंड डायमंड्स, जॉयलुक्कास और कल्याण ज्वैलर्स तीनों में 22 कैरेट सोने का भाव ₹13,195 प्रति ग्राम है, जो कल ₹13,135 था। IBJA के सूचक रिटेल बिक्री भाव के अनुसार, 24 कैरेट (999) सोना ₹14,230 प्रति ग्राम, 22 कैरेट ₹13,889 प्रति ग्राम, 20 कैरेट ₹12,665 प्रति ग्राम और 18 कैरेट ₹11,526 प्रति ग्राम है। चांदी का भाव ₹1,90,000 प्रति किलो है।
IBJA के भाव की 27 अक्टूबर के साथ तुलना करने पर, 24 कैरेट में ₹87 की बढ़ोतरी, 22 कैरेट में ₹85 की बढ़ोतरी, 20 कैरेट में ₹78 की बढ़ोतरी, 18 कैरेट में ₹70 की बढ़ोतरी और 14 कैरेट में ₹56 की बढ़ोतरी हुई है। चांदी के भाव में ₹2,499 की गिरावट हुई है और वह ₹1,90,000 प्रति किलो पर है।
IBJA के अध्यक्ष और RiddiSiddhi Bullions Ltd. के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, फेड के निर्णय से पहले सोना $4,000/oz के करीब है। यह एक तरफ तेल आधारित मुद्रास्फीति के डर और दूसरी तरफ नरम ट्रेजरी यील्ड और भौतिक खरीदारी के बीच फंसा हुआ है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सोना $3,950 को टेस्ट कर सकता है और चांदी $50 की तरफ जा सकती है, लेकिन आगामी हफ्तों में 10-15% का उछाल आने की संभावना है। उन्होंने आगे बताया कि चीन में आयात मजबूत रहा है, जबकि भारत में दिवाली की मांग पश्चिमी देशों में कमजोर मांग की भरपाई कर सकती है।
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