फ्रांस की ब्लड सर्विस के रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर साइबर हमला, तापमान बढ़ाने का प्रयास
हैकर्स ने तीन साइटों पर कोल्ड स्टोरेज का तापमान बढ़ाया था, लेकिन ब्लड प्रोडक्ट्स सुरक्षित रहे
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:24 · अपडेट सुबह 2:37 · 3 मिनट का पाठ
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फ्रांस की राष्ट्रीय नागरिक ब्लड सर्विस, EFS, पर 2 नवंबर को एक गंभीर साइबर हमला हुआ। इस हमले में हैकर्स ने रक्त और प्लाज्मा के भंडारण के लिए उपयोग किए जाने वाले रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाया और फ्रीज के तापमान को बहुत उच्च स्तर तक ले जाने का प्रयास किया। इस घटना से ब्लड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता और सुरक्षा खतरे में पड़ने की संभावना थी।
मंगलवार, 3 नवंबर को जारी एक बयान में फ्रेंच ब्लड एस्टाब्लिशमेंट (EFS) ने बताया कि यह हमला उनकी तीन अलग-अलग साइटों पर संचालित कोल्ड स्टोरेज रूम के मॉनिटरिंग और कंट्रोल सिस्टम पर हुआ था। इन साइटों पर ट्रांसफ्यूजन के लिए उपयोग किए जाने वाले प्लाज्मा और ब्लड सैंपल का भंडारण किया गया था। EFS ने स्पष्ट किया कि हैकर्स ने सीधे EFS पर हमला करने के बजाय उनके रेफ्रिजरेशन उपकरण प्रदान करने वाले सप्लायर को निशाना बनाया था।
EFS के बयान के अनुसार, "2 नवंबर, 2026 को, फ्रेंच ब्लड एस्टाब्लिशमेंट (EFS) का एक रेफ्रिजरेशन इक्विपमेंट सप्लायर साइबर सुरक्षा घटना का शिकार हुआ। जिसके कारण तीन EFS साइटों पर तैनात कोल्ड स्टोरेज रूम के मॉनिटरिंग और कंट्रोल सिस्टम प्रभावित हुए।" इस हमले के परिणामस्वरूप कोल्ड स्टोरेज रूम के ऑपरेटिंग पैरामीटर्स में बदलाव हुआ और तापमान तथा डीफ्रॉस्टिंग की सीमाओं को बहुत उच्च स्तर तक बढ़ा दिया गया था।
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने तापमान को -30 डिग्री सेल्सियस (-22 डिग्री फारेनहाइट) से बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस (230 डिग्री फारेनहाइट) तक पहुँचाने का प्रयास किया था। हालांकि, EFS के मॉनिटरिंग और अलार्म सिस्टम द्वारा तापमान में इस वृद्धि को तुरंत पहचान लिया गया। जिसके कारण समय पर कदम उठाए गए और कोई भी ब्लड सैंपल या प्रोडक्ट नष्ट नहीं हुआ और न ही उसकी गुणवत्ता पर कोई असर पड़ा।
संस्था ने आगे बताया कि ट्रांसफ्यूजन के लिए प्लाज्मा बैग और दवाओं के उत्पादन के लिए फ्रैक्शनेशन प्लाज्मा बैग सहित सभी प्रभावित उपकरणों में संग्रहीत उत्पादों को सुरक्षित किया गया या अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया। स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक बदलाव किए गए और कोई स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव नहीं देखा गया है।
रेफ्रिजरेशन सप्लायर कंपनी 'कूलवर्ल्ड' (Coolworld) ने भी इस घटना को स्वीकार किया है। हालांकि, कंपनी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि जिस घटक (component) में खराबी थी, वह तीसरे पक्ष के प्रदाता द्वारा प्रदान किया गया था और वह कूलवर्ल्ड के सीधे नियंत्रण में नहीं था। कंपनी ने बताया कि केवल सीमित संख्या में कूलवर्ल्ड यूनिट प्रभावित हुए थे और उन्होंने तेजी से उचित कदम उठाए।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूरोप के कई सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर भी साइबर हमले हुए थे। स्वीडन, बेल्जियम और एस्टोनिया जैसे देशों में कई स्टोरों में फ्रिज और फ्रीजर का तापमान बढ़ा दिया गया था। स्वीडन के एक रिटेलर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दावा किया कि वहां तापमान 122 डिग्री फारेनहाइट तक सेट किया गया था। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, यह एक व्यापक साइबर हमला अभियान का हिस्सा हो सकता है।
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