भारत और फिलीपींस के बीच 800 मिलियन डॉलर के ब्रह्मोस मिसाइल सौदे पर अंतिम चर्चा
दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच फिलीपींस अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए और मिसाइलें खरीदेगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:39 · अपडेट सुबह 6:54 · 6 मिनट का पाठ
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भारत और फिलीपींस के बीच सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की बिक्री के विस्तार के लिए बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन जानकार सूत्रों ने पुष्टि की है कि नई दिल्ली 2022 में हुए पिछले समझौते के तहत डिलीवरी पूरी करने की तैयारी में है, जबकि अब एक नए और बड़े सौदे पर चर्चा चल रही है। इस प्रस्तावित समझौते के तहत फिलीपींस द्वारा लगभग 5 ब्रह्मोस सिस्टम और कुल 60 मिसाइलें खरीदने की संभावना है। दो भारतीय सूत्रों के अनुसार, इस नए सौदे का संभावित मूल्य 700 मिलियन डॉलर से 800 मिलियन डॉलर के बीच हो सकता है। संदेश और टीवी9 गुजराती की रिपोर्टों के अनुसार, यह राशि भारतीय रुपयों में लगभग ₹6,200 करोड़ से ₹7,100 करोड़ होती है, जबकि एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार यह राशि ₹6,600 करोड़ से ₹7,500 करोड़ से भी अधिक हो सकती है।
एक भारतीय सूत्र ने बताया, "मनीला ने फिर से लगभग 5 ब्रह्मोस सिस्टम प्राप्त करने में रुचि दिखाई है और वे अब भारत को एक अत्यंत विश्वसनीय भागीदार के रूप में देखते हैं।" फिलीपींस वर्तमान में अपनी सैन्य शक्ति का आधुनिकीकरण कर रहा है और अपने तटीय रक्षा तंत्र को मजबूत बना रहा है। यह कदम दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और चीन के साथ समुद्री विवादों के संदर्भ में उठाया जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच बार-बार टकराव हुए हैं और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण फिलीपींस अपनी रक्षा तैयारियों को तेज कर रहा है।
फिलीपींस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता आर्सेनिओ एंडोलोंग ने रॉयटर्स को बताया कि राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने और अधिक ब्रह्मोस मिसाइलें प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि, एंडोलोंग ने इस सौदे की सटीक संख्या या कीमत के बारे में अधिक विवरण नहीं दिया। इसके अलावा, फिलीपींस के रक्षा सचिव गिल्बर्टो टीओडोरो ने बुधवार को दिल्ली डिफेंस डायलॉग में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि फिलीपींस और अधिक ब्रह्मोस यूनिट्स सुरक्षित करने की आशा करता है। टीओडोरो ने आगे कहा कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों के साथ एक 'विश लिस्ट' (जरूरतों की सूची) साझा की है, ताकि ब्रह्मोस सिस्टम को फिलीपींस के पर्यावरण और उनकी विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार और अधिक अनुकूल बनाया जा सके।
यह नया संभावित सौदा 2022 में हुए 375 मिलियन डॉलर के पहले ब्रह्मोस समझौते से काफी बड़ा है। पिछले उस समझौते के तहत फिलीपींस ने अपनी नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदा था। मनीला अब अतिरिक्त खरीद के माध्यम से अपनी समुद्री निगरानी और तटीय रक्षा क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करना चाहता है। रॉयटर्स के अनुसार, इस सौदे के आकार और मूल्य के बारे में जानकारी सबसे पहले उन्होंने ही रिपोर्ट की है। इस संबंध में जब भारत के रक्षा और विदेश मंत्रालय तथा मिसाइल निर्माता ब्रह्मोस एयरोस्पेस से संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
ब्रह्मोस सिस्टम में वैश्विक स्तर पर रुचि बढ़ी है, विशेष रूप से पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष के बाद, जब भारत ने पहली बार युद्ध में इस हथियार प्रणाली का उपयोग किया था। भारत अब अन्य देशों के साथ भी इस सिस्टम के लिए चर्चा कर रहा है। जुलाई महीने में दिल्ली ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइलें उपलब्ध कराने की घोषणा की थी और वियतनाम के साथ भी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, भारत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे कई देशों के साथ इस सिस्टम के बारे में बातचीत कर रहा है। सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि मार्च तक के वित्तीय वर्ष के लिए भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ (4.11 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 62% से अधिक की उछाल दर्शाता है। यह वृद्धि भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान को गति दे रही है और भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित कर रही है।
संदेश और टीवी9 गुजराती की रिपोर्टों के अनुसार, यह सौदा केवल रक्षा-केंद्रित नहीं है बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती रणनीतिक गतिशीलता का संकेत है। भारत की बढ़ती रक्षा साझेदारी दक्षिण चीन सागर में शक्ति के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। ब्रह्मोस मिसाइल अपनी गति और सटीकता के लिए जानी जाती है, जो दुश्मन के युद्धपोतों और जमीन पर मुख्य लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी गति मैक 2.8 से 3 के बीच है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक बनाती है। इस मिसाइल को जमीन, समुद्र और हवा, इन तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।
ब्रह्मोस एक लंबी दूरी की, रैमजेट-पावर्ड सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल थी, जिसे पनडुब्बी, जहाजों, लड़ाकू विमानों या TEL से लॉन्च किया जा सकता था। यह भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूसी संघ के NPO मशीनोस्त्रोयिनिया के बीच एक संयुक्त उद्यम था, जिन्होंने मिलकर ब्रह्मोस एयरोस्पेस का गठन किया था। यह मिसाइल P-800 ओनिक्स पर आधारित थी। 'ब्रह्मोस' नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदियों के नाम पर रखा गया था।
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