सीजेआई पर टिप्पणी मामले में केरल कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
संविधान सर्वोपरि है, न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं चलेगा: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:52 · अपडेट शाम 5:16 · 4 मिनट का पाठ
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के पदाधिकारियों को एक महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई एक विवादास्पद पोस्ट के संदर्भ में दिया गया है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की और कांग्रेस पदाधिकारियों से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर, 2026 को हुई थी, जब केरल कांग्रेस के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से सीजेआई सूर्यकांत को संबोधित करते हुए एक पोस्ट किया गया था। इस पोस्ट में लिखा था, "प्रिय सूर्यकांत, यदि कानून और व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपके स्थान पर ऐसे व्यक्ति को खोज लेंगे जो इसे संभाल सके।" यह पोस्ट दिल्ली पुलिस द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सीजेआई द्वारा की गई टिप्पणी के संदर्भ में थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान सर्वोपरि है और कोई भी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल संविधान से ऊपर नहीं है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता किसी राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह गणतंत्र और उसके लोगों के प्रति एक संवैधानिक गारंटी है। न्यायाधीशों ने फटकार लगाते हुए कहा कि न्यायिक निर्णयों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग न्यायपालिका को डराने या न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि न्यायपालिका के अधिकार को कमजोर करने के किसी भी प्रयास को 'लोहे के हाथ' से कुचल दिया जाएगा। खंडपीठ ने आगे कहा कि कोर्ट की ताकत कानून के शासन में निहित है, राजनीतिक समर्थन में नहीं। न्यायिक संयम को कभी भी संस्थागत कमजोरी नहीं समझना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का विवरण न्यूज़ 18 और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टों में दिया गया है।
सुनवाई के दौरान, केरल कांग्रेस के वकील ने कोर्ट को बताया कि विवादास्पद पोस्ट पार्टी पदाधिकारियों की जानकारी या सहमति के बिना एक कार्यकर्ता द्वारा की गई थी। वकील ने तर्क दिया कि जैसे ही यह मामला नेतृत्व के संज्ञान में आया, तुरंत पोस्ट को डिलीट कर दिया गया और बिना शर्त माफी मांगी गई। पार्टी ने यह दावा भी किया है कि जिस व्यक्ति ने यह पोस्ट की थी, उसे जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। केरल कांग्रेस के अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने भी इस मामले पर खेद व्यक्त किया है।
हालांकि, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए टिप्पणी की कि कोर्ट यह जांच करेगा कि माफी दिल से मांगी गई है या केवल कागजों पर है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक वरिष्ठ वकील को 'एमिकस क्यूरी' (कोर्ट के मित्र) के रूप में नियुक्त किया है, जो जांच करेंगे कि इस मामले में आपराधिक या नागरिक अवमानना लागू होती है या नहीं। इसके अलावा, कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी की मदद भी मांगी है।
इस विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCOARA) ने भी सीजेआई के इस्तीफे की मांग की कड़ी आलोचना की। यह मामला एडवोकेट विनीत जिंदल द्वारा दायर एक रिट याचिका के आधार पर लिया गया था, जिसमें सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) कार्यवाही की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जिसकी स्थापना भारतीय संविधान के तहत की गई थी। यह देश की सबसे बड़ी अदालत है और संविधान के संरक्षक की भूमिका निभाती है। अतीत में भी कोर्ट ने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं। न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिक जिम्मेदारी रही है, जो लोकतंत्र की नींव के समान है।
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