वर्ष 2027 तक सभी राज्यों की राजधानियों में विदेशी पंजीकरण कार्यालय स्थापित किए जाएंगे
केंद्र सरकार विदेशी नागरिकों के लिए इमिग्रेशन और कॉन्सुलर सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए कार्यरत है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, रात 9:15 · अपडेट सुबह 8:27 · 4 मिनट का पाठ
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस घोषणा के अनुसार, भारत सरकार वर्ष 2027 तक देश के सभी राज्यों की राजधानियों में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) स्थापित करने की योजना बना रही है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए इमिग्रेशन और कॉन्सुलर सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाना है। यह कदम विदेशी नागरिकों के प्रबंधन के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद यह निर्णय लिया गया है। देश में पर्यटन, चिकित्सा उपचार और शिक्षा के लिए आने वाले विदेशियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसे ध्यान में रखते हुए गृह मंत्री ने अधिकारियों को FRRO नेटवर्क का विस्तार करने का निर्देश दिया था। इस विस्तार से न केवल सेवाएं सुलभ होंगी, बल्कि नियामक अनुपालन भी मजबूत होगा और अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों को आकर्षित करने के भारत के प्रयासों को भी गति मिलेगी।
वर्ष 2025 से अब तक कुल 5 नए FRRO कार्यरत किए गए हैं, जिनमें से 2 कार्यालय तो इसी वर्ष शुरू हुए हैं। 2025 में जयपुर, चंडीगढ़ और गुवाहाटी में नए कार्यालय खोले गए थे। इस विस्तार के कारण पहले दिल्ली, अमृतसर और कोलकाता FRRO के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र अब स्थानीय अधिकार क्षेत्र में आ गए हैं। इस वर्ष मिजोरम के आइजोल और आंध्र प्रदेश के अमरावती में नए FRRO कार्यरत हुए हैं। आइजोल पहले कोलकाता FRRO के अंतर्गत था, जबकि अमरावती हैदराबाद के अधिकार क्षेत्र में आता था। इसके अलावा, सरकार ने कोहिमा, अगरतला और भुवनेश्वर में भी नए FRRO के लिए निर्देश जारी किए हैं। कोहिमा और अगरतला पहले कोलकाता के अंतर्गत थे, जबकि भुवनेश्वर हैदराबाद द्वारा संचालित था।
इन नए कार्यालयों के जुड़ने के साथ देश में कुल FRRO की संख्या 20 तक पहुंच गई है। वर्तमान में ये कार्यालय अहमदाबाद, अमरावती, अमृतसर, आइजोल, अगरतला, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, कालीकट, चेन्नई, कोचीन, चंडीगढ़, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता, कोहिमा, कोझिकोड, लखनऊ, मुंबई और तिरुवनंतपुरम में कार्यरत हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, सरकार बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मेघालय जैसे राज्यों में भी FRRO स्थापित करने के लिए काम कर रही है, जहां वर्तमान में ऐसा कोई कार्यालय नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, इस विस्तारित नेटवर्क से विदेशी नागरिकों को उनके निवास के पास ही वीजा एक्सटेंशन, वीजा कन्वर्जन, इमिग्रेशन अनुपालन और कानूनी अनुमतियों जैसी सेवाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा, इस कदम से केंद्र और राज्य अधिकारियों के बीच समन्वय में सुधार होगा और इमिग्रेशन कानूनों तथा राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकताओं का कार्यान्वयन अधिक सख्त बनेगा। हाल ही में हैदराबाद में 49 विदेशी नागरिक ओवरस्टेइंग करते हुए पाए गए थे, जिनमें से 12 को देश निकाला दे दिया गया था, जो दर्शाता है कि इस प्रकार के नियंत्रण कितने आवश्यक हैं।
यह विस्तार इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के कार्यान्वयन के कदम के रूप में किया गया है। इस कानून ने विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निवेश, आवाजाही और बाहर निकलने से संबंधित पिछले 4 अलग-अलग कानूनों को एकीकृत करके एक नया ढांचा तैयार किया है। इस कानून के तहत, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत FRRO द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। FRRO की मुख्य जिम्मेदारियों में विदेशी नागरिकों के आगमन के बाद पंजीकरण, पंजीकरण प्रमाणपत्र और रेजिडेंशियल परमिट देना, व्यक्तिगत और यात्रा विवरण अपडेट करना, सुरक्षित क्षेत्रों के दौरे के लिए अनुमति देना और आवश्यकता पड़ने पर एग्जिट परमिट देना शामिल है।
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