इसरो ने NVS-०३ सैटेलाइट लॉन्च कर भारत की नेविक नेविगेशन सिस्टम को सक्रिय किया
इस सफलता से भारत की अपनी नेविगेशन सेवा अधिक विश्वसनीय और सटीक बनेगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 6:39 · अपडेट रात 11:59 · 4 मिनट का पाठ
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आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने 30 अक्टूबर, 2026 को श्रीहरिकोटा से GSLV-F१८ रॉकेट के माध्यम से NVS-०३ सैटेलाइट का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। इस प्रक्षेपण के माध्यम से भारत की अपनी नेविगेशन सिस्टम को सक्रिय किया गया है।
इस सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने के लिए तीन सटीक मैन्युवर्स किए गए थे। इस प्रक्रिया के बाद, NVS-०३ सैटेलाइट 111.75 डिग्री पूर्वी देशांतर पर जियोसिंक्रोनस कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया है।
इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि भारत की अपनी नेविगेशन सिस्टम, जिसे NAVIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) के रूप में जाना जाता है, वह फिर से कम से कम चार सैटेलाइटों की व्यवस्था पर आ गई है। इस व्यवस्था के होने से अब पूरे भारत और उसकी सीमाओं से 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग की विश्वसनीय सेवाएं उचित रूप से मिल सकेंगी। यह उपलब्धि देश की अंतरिक्ष क्षमता को और अधिक मजबूत बनाती है।
NVS-०३ सैटेलाइट की तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो, इसमें भारत की तीसरी स्वदेशी रुबिडियम एटमिक क्लॉक लगाई गई है। यह अत्याधुनिक घड़ी समय का अत्यंत सटीक मापन करने में मदद करती है, जो नेविगेशन सिस्टम के लिए अनिवार्य है। इसके अलावा, इस सैटेलाइट में L१ बैंड सिग्नल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं, जो सामान्य नागरिकों के उपयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे।
इस सैटेलाइट की कार्यक्षमता और जीवनकाल के बारे में बताते हुए रिपोर्ट में उल्लेख है कि NVS-०३ कम से कम 12 वर्ष तक कार्यरत रहेगा। इस सैटेलाइट का उपयोग न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए, बल्कि ट्रेन ट्रैकिंग जैसे नागरिक कार्यों के लिए भी किया जाएगा।
इससे पहले NAVIC सिस्टम में कुछ सैटेलाइटों की विफलता या उनकी निर्धारित आयु पूरी हो जाने के कारण सेवाओं पर असर पड़ रहा था। NVS-०३ के आगमन से यह कमी दूर हो गई है, जिससे सिस्टम की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायण ने इस उपलब्धि के बारे में बताया कि यह सैटेलाइट विदेशी नेविगेशन सिस्टम पर भारत की निर्भरता को कम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि जीपीएस जैसी विदेशी सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करने के बजाय भारत अब अपना मजबूत नेटवर्क विकसित कर रहा है। इस कदम से सैन्य और नागरिक दोनों क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
इस सिस्टम की उपयोगिता अनेक क्षेत्रों में देखने को मिलेगी। विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों, समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यह सैटेलाइट बहुत उपयोगी साबित होगा। भारत के तेजी से विकसित होते अंतरिक्ष क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विश्व के सामने देश की तकनीकी क्षमता को प्रदर्शित करता है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से NAVIC सिस्टम को चार सैटेलाइटों के न्यूनतम स्तर पर वापस लाना अत्यंत महत्वपूर्ण बात है। इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं दोनों अधिक मजबूत होंगी। इसके अलावा, स्वदेशी एटमिक क्लॉक का विकास भारत की तकनीकी कुशलता का एक बड़ा प्रमाण है।
भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में इस सिस्टम में और अधिक सैटेलाइट जोड़े जाएंगे, जिससे NAVIC अधिक सटीक और व्यापक बनेगा। कुल मिलाकर, NVS-०३ का सफल संचालन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की निरंतर सफलता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण है, जो भविष्य की बड़ी उपलब्धियों के लिए आधार प्रदान करेगा।
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